सर्किट हाउस में हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, CCI, CSB की समीक्षा बैठक, मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर जोर
निर्यातकों और कारीगरों के सुझाव] प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग की मांग
प्रदर्शनी का निरीक्षण, आधुनिक तकनीक, फाइबर इनोवेशन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर चर्चा
आगरा। केंद्रीय वस्त्र मंत्री की अध्यक्षता में सर्किट हाउस सभागार में हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, सीसीआई, सीएसबी एवं टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े क्षेत्रीय पदाधिकारियों और हितधारकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य उद्योग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना, निर्यात को बढ़ावा देना तथा उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के लिए रणनीतियों पर चर्चा करना रहा।

बैठक के दौरान टेक्सटाइल और लेदर उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि असेंबलिंग की तुलना में मैन्युफैक्चरिंग पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए, जिससे देश में मूल्य संवर्धन बढ़े और रोजगार के अवसर सृजित हों। बैठक में उपस्थित AFMAC के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता और ACEA के डीएन कालसी ने अपने विचार साझा किए और उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सामने रखा।
केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत को शून्य प्रदूषण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया और विशेष रूप से वाटरलेस डाइंग तकनीक अपनाने का सुझाव दिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उत्पादन लागत में भी संतुलन स्थापित किया जा सके। बैठक में कार्पेट निर्यातकों ने मांग रखी कि कार्पेट को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में शामिल किया जाए और कार्पेट कारीगरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिससे इस क्षेत्र को नई पहचान और बाजार मिल सके।

निर्यातकों द्वारा लेदर, नॉन-वोवन और लैमिनेशन से संबंधित तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई गई, जिस पर उन्हें सहयोग का आश्वासन दिया गया। साथ ही सभी हितधारकों से प्रधानमंत्री की PLI योजना, PM-MITRA और NTTM योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया गया, ताकि टेक्सटाइल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
बैठक के उपरांत केंद्रीय मंत्री ने आगरा में आयोजित एक हस्तशिल्प प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें 10 हस्तशिल्पियों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए। उन्होंने आगरा की प्रसिद्ध स्टोन इनले (पच्चीकारी) कला, जरी एम्ब्रॉयडरी, तुलसी कंठी माला, फिरोजाबाद के ग्लास उत्पाद और मथुरा की सांझी आर्ट की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक कलाओं में सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ निर्यात की भी व्यापक संभावनाएं हैं और शिल्पकारों को नवाचार के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी पहचान मजबूत करनी चाहिए।

इसके अलावा शिकोहाबाद में आयोजित DDW के दौरान तैयार उत्पादों का भी अवलोकन किया गया। आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित डायमंड एक्सपोर्ट यूनिट का निरीक्षण करते हुए मंत्री ने कार्पेट निर्माण में टेक्निकल टेक्सटाइल के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने मिल्कवीड (आक) फाइबर को ऊन के साथ मिश्रित करने की सिफारिश की, जिससे पर्यावरण-अनुकूल और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जा सकें।
उन्होंने निफ्ट के VisioNxt सिस्टम का उल्लेख करते हुए बताया कि यह एआई और इमोशनल इंटेलिजेंस आधारित ट्रेंड फोरकास्टिंग लैब है, जो भारतीय फैशन और टेक्सटाइल उद्योग के लिए स्वदेशी तकनीक प्रदान करती है। इसके माध्यम से बाजार की विविधता को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है और भविष्य की मांग का अनुमान लगाया जा सकता है।

इसके साथ ही केला, अनानास और वॉटर हायसिंथ जैसे प्राकृतिक फाइबर के उपयोग और उनके ट्विस्टिंग के जरिए यार्न की मजबूती बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। लेदर और कार्पेट उद्योग के लिए प्रदूषण मानकों की समीक्षा पर भी सहमति जताई गई। साथ ही आगरा के कार्पेट उद्योग को ODOP योजना में शामिल करने की पहल पर विचार किया गया, जहां लेदर और स्टोन-मार्बल हैंडीक्राफ्ट पहले से प्रमुख उत्पाद हैं।
अंत में निर्यात को बढ़ाने के लिए एक्सपोर्ट एसोसिएशनों से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। उद्योग को उच्च स्केल उत्पादन, वैल्यू एडेड उत्पाद, वर्ष भर उत्पादन और बाजार विविधीकरण पर ध्यान देने की सलाह दी गई, ताकि 2030-31 तक 100 बिलियन डॉलर के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट लक्ष्य को हासिल किया जा सके। यह कदम आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

