नगर निगम पर होटल संचालकों का बड़ा आरोप
सार
आगरा में नगर निगम द्वारा होटल कारोबार पर लगाए गए ट्रेड लाइसेंस शुल्क को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। होटल संचालकों ने आरोप लगाया है कि निगम उनके साथ भेदभावपूर्ण नीति अपना रहा है और दोगुना शुल्क वसूला जा रहा है। इसी मुद्दे पर होटल एसोसिएशन ने बैठक कर चेतावनी दी है कि यदि आने वाली सदन बैठक में होटल ट्रेड लाइसेंस शुल्क रद्द नहीं किया गया तो शहर में होटल-रेस्टोरेंट बंद कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
आगरा। व्यापारिक गतिविधियों के बीच एक बार फिर नगर निगम और होटल संचालकों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। मामला नगर निगम द्वारा लागू किए गए ट्रेड लाइसेंस शुल्क से जुड़ा है, जिसे लेकर होटल एसोसिएशन ने तीखा विरोध दर्ज कराया है।
नगर निगम ने 1 सितंबर 2025 को सदन की बैठक में शहर के व्यापारियों के लिए ट्रेड लाइसेंस शुल्क लागू करने का प्रस्ताव पास किया था। प्रस्ताव लागू होने के बाद जब व्यापारियों से शुल्क वसूली शुरू हुई तो पूरे शहर में विरोध की लहर फैल गई। व्यापारियों ने इसे अनुचित बताते हुए मेयर और नगर निगम अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे और कई जगह प्रदर्शन भी किया।
लगातार बढ़ते विरोध को देखते हुए नगर निगम ने अन्य व्यापारिक वर्गों के लिए ट्रेड लाइसेंस शुल्क को रद्द कर दिया, लेकिन होटल कारोबार इससे अलग रह गया। इसी फैसले को लेकर होटल संचालकों में गहरा आक्रोश है।
होटल एसोसिएशन का कहना है कि एक तरफ सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की बात करती है, वहीं दूसरी ओर होटल व्यवसायियों पर अलग से आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। एसोसिएशन के अनुसार होटल कारोबार पहले से ही जीएसटी, लाइसेंस फीस और अन्य करों का भुगतान कर रहा है, इसके बावजूद अतिरिक्त ट्रेड लाइसेंस शुल्क थोपना अनुचित है।
सोमवार को होटल एसोसिएशन की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी प्रमुख होटल संचालक और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में नगर निगम के खिलाफ कड़ा विरोध जताया गया। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने कहा कि यह नीति होटल व्यवसाय के लिए शोषण के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य व्यापारियों का ट्रेड लाइसेंस शुल्क रद्द कर दिया गया, लेकिन होटल व्यवसाय को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
एसोसिएशन के पदाधिकारी राजकुमार खंडेलवाल ने शुल्क संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1 से 10 कमरों वाले होटल पर 1000 रुपये सालाना शुल्क है, 1 से 20 कमरों पर 3000 रुपये और 30 कमरों वाले होटल पर 6000 रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि समान अनुपात में शुल्क तय नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से दोगुनी वसूली है, जो किसी भी तरह से उचित नहीं है।
होटल संचालकों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा बनाई गई नीति में पारदर्शिता नहीं है और यह छोटे से लेकर बड़े होटल व्यवसाय को प्रभावित कर रही है। उनका कहना है कि इससे होटल उद्योग की लागत बढ़ रही है और पर्यटन पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
एसोसिएशन ने मांग की है कि जिस तरह अन्य व्यापारिक वर्गों के लिए ट्रेड टैक्स समाप्त किया गया है, उसी तरह होटल उद्योग पर भी यह शुल्क पूरी तरह से समाप्त किया जाए। साथ ही एक समान टैक्स नीति लागू की जाए ताकि किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो।
होटल संचालकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी नगर निगम सदन की बैठक में होटल ट्रेड लाइसेंस शुल्क को रद्द नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर होटल और रेस्टोरेंट बंद कर विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा।
इस पूरे मामले ने आगरा के व्यापारिक माहौल को गर्मा दिया है। अब सभी की नजरें आगामी नगर निगम सदन की बैठक पर टिकी हैं, जिसमें इस विवाद पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
