आगरा। बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने के बाद नकल और अन्य अनियमितताओं को लेकर सामने आ रहे मामलों ने एक बार फिर विभागीय निगरानी और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभिन्न क्षेत्रों से लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें नकल के नाम पर वसूली, विरोध करने पर छात्रों के साथ मारपीट और फर्जी परीक्षार्थी बैठाने जैसे आरोप शामिल हैं। इन घटनाओं में शिकायत दर्ज होने और वीडियो वायरल होने के बावजूद जांच पूरी नहीं हो सकी है, जिससे कार्रवाई की गति पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पहला मामला शमशाबाद क्षेत्र से जुड़ा है, जहां मार्च के पहले सप्ताह में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में एक शिक्षक यह कहते हुए नजर आ रहा था कि यदि छात्र का आधार कार्ड और 10 हजार रुपये दिए जाएं तो वह उसे बोर्ड परीक्षा में बैठा सकता है। वीडियो में आधार कार्ड में बदलाव कराने का भी दावा किया गया। यह वीडियो सामने आने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रशेखर ने 3 मार्च को तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया। इस कमेटी में सह जिला विद्यालय निरीक्षक विश्व प्रताप सिंह, राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य मानवेंद्र सिंह और दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल स्कूल मनकेंडा के प्रधानाचार्य सुजीत कुमार को शामिल किया गया और उन्हें साक्ष्यों के आधार पर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। हालांकि 18 दिन बीत जाने के बाद भी न तो जांच रिपोर्ट सौंपी गई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है, जिससे मामले की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
दूसरा मामला किरावली क्षेत्र के अभुआपुरा स्थित रामखिलाड़ी इंटर कॉलेज से संबंधित है, जहां एक छात्र की पिटाई का वीडियो सामने आया है। पीड़ित छात्र ने अपना नाम सेवला निवासी सुरजीत बताया है। आरोप है कि परीक्षा के दौरान नकल कराने के नाम पर रुपये लिए गए थे और जब नकल नहीं कराई गई तो पैसे वापस मांगने पर शिक्षक सुखवीर सिंह ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। छात्र के साथी द्वारा घटना का वीडियो बना लिया गया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। इसके अलावा यह भी आरोप है कि छात्र की बाइक रोकी गई, जिसे डायल 112 पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद छोड़ा गया।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रशेखर ने जांच के लिए एक नई कमेटी गठित की है। इस कमेटी में राजकीय स्कूल रायभा के प्रधानाचार्य उदयभान सिंह, राजकीय स्कूल जऊपुरा के प्रधानाचार्य बहोरन लाल और खंड शिक्षाधिकारी अछनेरा सौरभ आनंद को शामिल किया गया है। कमेटी को दो दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं शमशाबाद के मामले में पूर्व में गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट को वापस करते हुए कुछ अतिरिक्त बिंदु जोड़कर दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी तथ्यों की विस्तृत जांच हो सके।
इन घटनाओं के लगातार सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा संचालन और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जांच और कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। फिलहाल दोनों मामलों में प्रशासनिक स्तर पर जांच प्रक्रिया जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

