आगरा।अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप और रोजगारोन्मुख शिक्षा को सुदृढ़ बनाने पर व्यापक मंथन करते हुए भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के आईक्यूएसी कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में सत्र 2024 से संचालित AEDP (Apprenticeship Embedded Degree Programme – अप्रेंटिसशिप समेकित डिग्री कार्यक्रम) के अंतर्गत चल रहे पाठ्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा इनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी।
बैठक की शुरुआत AEDP कोर्सेज के नोडल अधिकारी प्रो. शरद चन्द्र उपाध्याय द्वारा सभी प्रतिभागियों के स्वागत के साथ हुई। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा को केवल सैद्धांतिक न रखकर उसे पूर्णतः व्यावहारिक एवं उद्योग आधारित बनाना है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक कार्य अनुभव प्राप्त हो सके। इस दौरान संचालित पाठ्यक्रमों के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों एवं विभिन्न महाविद्यालयों द्वारा सामना की जा रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी समस्याएं और सुझाव खुलकर रखे, जिनमें इंटर्नशिप प्लेसमेंट, उद्योगों से समन्वय, छात्र पंजीकरण प्रक्रिया एवं पाठ्यक्रम संचालन से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतें शामिल रहीं। सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए यह आश्वासन दिया गया कि प्रत्येक समस्या का समाधान विश्वविद्यालय एवं CRISP के समन्वय से शीघ्र किया जाएगा। साथ ही उद्योगों के साथ बेहतर एलाइनमेंट सुनिश्चित करने, पाठ्यक्रम को अधिक उपयोगी बनाने तथा छात्रों को अधिकतम लाभ दिलाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी साझा किए गए।
बैठक में CRISP की प्रतिनिधि निहारिका ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि अब AEDP के अंतर्गत अध्ययनरत सभी छात्रों के लिए नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम (NATS) पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इसके माध्यम से बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (BOAT) द्वारा छात्रों को व्यवस्थित रूप से अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्हें उनके गृह जनपद या निकटवर्ती क्षेत्रों में ही इंटर्नशिप दिलाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे उन्हें अनावश्यक स्थानांतरण या आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े।
इसके अतिरिक्त महाविद्यालयों को निर्देशित किया गया कि वे BOAT के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) करें, ताकि छात्रों को अधिक से अधिक उद्योगों में प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक बैच में छात्रों की संख्या निर्धारित की जाएगी, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनी रहे और सभी छात्रों को समुचित अवसर मिल सकें।
अप्रेंटिसशिप के दौरान छात्रों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से न्यूनतम ₹12,300 प्रतिमाह स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा, जो BOAT के माध्यम से दिया जाएगा। इस स्टाइपेंड का वहन सरकार अथवा संबंधित उद्योग द्वारा किया जाएगा, जिससे छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी प्राप्त होगा।
वर्तमान में विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा को अधिक व्यावहारिक एवं रोजगारपरक बनाने के उद्देश्य से BBA (रिटेल, टूरिज्म एवं मैनेजमेंट), BBA लॉजिस्टिक्स तथा B.Com (BFSI) जैसे AEDP पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही 20 नए AEDP कोर्स को भी स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है, जिससे आने वाले समय में छात्रों के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।
बैठक में CRISP की कोऑर्डिनेटर निहारिका यादव, विश्वविद्यालय के AEDP नोडल अधिकारी प्रो. एस.सी. उपाध्याय, डीन मैनेजमेंट प्रो. यू.एन. शुक्ला, प्रो. के.पी. तिवारी, प्रो. विनय जैन, डॉ. के.के. पचौरी, डॉ. विक्रांत शास्त्री, डॉ. स्वाति माथुर, डॉ. रुचिरा प्रसाद, डॉ. प्रवीण यादव, डॉ. श्रद्धा सिंह, डॉ. रहीबा मलिक, डॉ. जितेंद्र सिंह, सिमरन मगन, डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. शिखा कन्नौजिया, मिशिका श्रीवास्तव, डॉ. विकास तिवारी, डॉ. अपर्णा शुक्ला एवं शैलेश कुमार सिंह सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त दाऊ दयाल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन, सेठ पदमचंद जैन इंस्टीट्यूट, आगरा कॉलेज, सेंट जॉन्स कॉलेज एवं बैकुंठी देवी कॉलेज सहित अनेक प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की।
बैठक के अंत में विश्वविद्यालय प्रशासन ने NAAC मान्यता प्राप्त सभी संस्थानों से आह्वान किया कि वे सत्र 2026-27 से AEDP पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के लिए विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी से संपर्क करें, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ा जा सके और उन्हें भविष्य के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें।

