आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के स्वामी विवेकानंद परिसर, खंदारी स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) में आयोजित 21-दिवसीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता ओरिएंटेशन कार्यक्रम ‘एआई फॉर ऑल’ (AI for All) के नवें दिवस पर ‘एआई टूल्स के प्रयोग’ (Using of AI Tools) विषय पर एक महत्त्वपूर्ण व्याख्यान सत्र का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशू रानी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं प्रेरणा तथा संस्थान के निदेशक प्रोफेसर मनुप्रताप सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों, कर्मचारियों एवं शोधार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समकालीन उपयोगों से परिचित कराना है, जिससे शोध एवं शैक्षणिक कार्यों की गुणवत्ता में वृद्धि हो सके।

कार्यक्रम के नवें दिवस पर विषय विशेषज्ञ वक्ता डॉ. प्रज्ञा काबरा ने ‘एआई टूल्स के प्रयोग’ विषय पर व्यावहारिक एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक शोध पद्धति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित टूल्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है, जो शोध की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, तर्कसंगत एवं प्रभावशाली बनाते हैं। उन्होंने विभिन्न प्रमुख AI टूल्स—जैसे Overleaf, SciSpace, Elicit, Semantic Scholar, Paperpal, Napkin AI तथा Consensus—का विस्तृत परिचय देते हुए इनके व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डाला।
डॉ. काबरा ने बताया कि Semantic Scholar जैसे टूल्स शोधार्थियों को प्रासंगिक शोध-पत्रों की खोज में सहायता प्रदान करते हैं, जबकि Overleaf के माध्यम से शोधकर्ता उच्च गुणवत्ता वाले शोध-पत्र एवं प्रोजेक्ट LaTeX आधारित स्वरूप में तैयार कर सकते हैं। Paperpal डॉक्यूमेंटेशन, भाषा-संशोधन एवं संदर्भ निर्माण (referencing) में महत्वपूर्ण सहयोग देता है, जिससे शोध लेखन अधिक सुसंगत एवं अकादमिक मानकों के अनुरूप बनता है। Napkin AI जैसे टूल्स के माध्यम से प्रभावशाली ग्राफिक्स एवं विज़ुअल प्रस्तुतियाँ तैयार की जा सकती हैं, जो शोध के प्रस्तुतीकरण को अधिक स्पष्ट और आकर्षक बनाती हैं। Consensus का उपयोग साक्ष्य-आधारित उत्तर एवं निष्कर्ष प्राप्त करने के लिए किया जाता है, जिससे शोध की विश्वसनीयता में वृद्धि होती है। वहीं SciSpace को एक ‘ऑल-इन-वन’ AI टूल के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि यह शोध-पत्रों की समझ, विश्लेषण और समग्र अध्ययन में अत्यंत उपयोगी है।
व्याख्यान के दौरान डॉ. काबरा ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि इन AI टूल्स के समुचित और नैतिक उपयोग के माध्यम से शोध की गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रासंगिकता को सुदृढ़ किया जा सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि AI केवल सहायक उपकरण है, न कि शोध का विकल्प; अतः शोधकर्ता की मौलिकता, आलोचनात्मक दृष्टि और अकादमिक ईमानदारी सर्वोपरि रहनी चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम संयोजिका डॉ. शिल्पी लवानिया द्वारा किया गया, जिन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हुए प्रतिभागियों को सक्रिय सहभागिता हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में कंप्यूटर साइंस विभाग की सह-आचार्य डॉ. प्रतिभा रश्मि ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए संसाधन व्यक्ति, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

