– प्रहलाद मंदिर में होलिका दहन के दौरान 11 गांवों की होली एक साथ मनाई गई।
– हजारों श्रद्धालु और विदेशी पर्यटक इस अनोखे समारोह का हिस्सा बने।
मथुरा। मथुरा जिले के फालैन गांव में मंगलवार की सुबह प्रहलाद मंदिर के प्रांगण में एक भव्य और अनोखा होलिका दहन समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन केवल धार्मिक रीति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अद्भुत था। प्रह्लाद मंदिर इस परंपरा का केंद्र रहा, जहां श्रद्धालुओं और साधु-संतों की उपस्थिति ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया।
इस बार समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा संजू पांडा, जिन्होंने सुबह 3:45 बजे अखंड अग्नि मार्ग से गुजरकर परंपरा का निर्वाह किया। मंदिर में जलते दीपक पर हाथ रखकर समय का अनुमान लगाने के बाद उन्होंने पारंपरिक अग्नि मार्ग से गुजरने की शुरुआत की। जैसे ही उनकी हथेली को दीपक की शीतलता महसूस हुई, उन्होंने समझ लिया कि गुज़रने का सही समय आ गया है। इसके तुरंत बाद पूरे मंदिर और आसपास के क्षेत्र में भक्तों ने “प्रह्लाद जयकारे” के साथ उत्साहपूर्ण हर्षोल्लास मनाया।
प्रहलाद मंदिर की यह होलिका दहन परंपरा सैकड़ों वर्षों पुरानी मानी जाती है। मंदिर के आसपास के 11 गांवों की होली भी इसी अवसर पर एक साथ मनाई जाती है। स्थानीय समाज और पंडों की टीम द्वारा 20 फीट ऊंची होलिका संरचना तैयार की गई, जिसे पूरी श्रद्धा और सावधानी के साथ अग्नि में प्रवेश कराया गया।
संजू पांडा ने इस बार लगातार दूसरे वर्ष अखंड अग्नि मार्ग से गुजरने की परंपरा निभाई। उन्होंने एक माह पूर्व ही अपने घर को छोड़ दिया और मंदिर के पास स्थित प्रह्लाद कुण्ड पर तपस्या और साधना आरंभ कर दी थी। मंदिर परिसर में अखंड वन पूजन 24 घंटे तक चलता रहा, जिससे भक्तों और साधुओं के लिए पवित्र वातावरण सुनिश्चित हो सके।
समारोह में हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे, जिनमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए भक्त और विदेशी पर्यटक भी शामिल थे। मंदिर परिसर और होलिका दहन स्थल पर भक्तगण धार्मिक भक्ति में लीन थे। जैसे ही संजू पांडा ने प्रह्लाद कुण्ड से स्नान कर अग्नि मार्ग से पार किया, भक्तों ने जयकारों और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया।
संजू पांडा ने बताया, “यह अद्भुत अनुभव भक्त प्रह्लाद की महिमा का प्रमाण है। हम मंदिर में प्रह्लाद की माला धारण कर अग्नि में प्रवेश करते हैं और इससे आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। यह केवल साहसिक कार्य नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।”
इस अनोखे होलिका दहन के अवसर पर गांव के बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी उपस्थित थे। हर किसी ने इस आयोजन को अपने जीवन का आध्यात्मिक अनुभव माना। मंदिर प्रबंधन समिति ने सुरक्षा और व्यवस्थित प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए।
प्रहलाद मंदिर का यह होलिका दहन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मथुरा के लोक-जीवन और सांस्कृतिक परंपराओं का भी प्रतिनिधित्व करता है। समारोह में पारंपरिक कथाओं और लोकगीतों का समावेश रहा, जिससे दर्शकों और श्रद्धालुओं को अतीत की सांस्कृतिक विरासत का अनुभव हुआ।
मथुरा का यह अनोखा होलिका दहन समारोह आज भी लोगों में आस्था, भक्ति और सामुदायिक एकता का संदेश दे रहा है।
संजू पांडा ने मंदिर में जलते दीपक पर हाथ रखकर समय का अनुमान लगाया और फिर श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच पारंपरिक अग्नि मार्ग से होकर गुजरे। मंदिर परिसर में अखंड वन पूजन 24 घंटे तक चलता रहा, जिससे भक्तों और साधुओं के लिए पवित्र वातावरण सुनिश्चित हुआ। इस दौरान मंदिर प्रांगण और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक “प्रह्लाद जयकारे” लगाकर समारोह को भव्य बनाया।

