• आगरा के लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर में सांस्कृतिक-साहित्यिक कार्यक्रम
• आदर्श नंदन गुप्ता की पुस्तक का प्रभु चरणों में समर्पण
• आगरा की संस्कृति और साहित्य पर विद्वानों की चर्चा
आगरा। यह आयोजन आगरा की सांस्कृतिक पहचान को एक नई दृष्टि देने वाला रहा, जहां ‘संस्कृति, साहित्य और परंपराओं का शहरः आगरा’ पुस्तक को धार्मिक भावनाओं के साथ मंदिर में समर्पित किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने भाग लिया और पुस्तक को युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक परंपरा और ऐतिहासिक महत्व को समर्पित एक विशेष आयोजन शनिवार को लंगड़े की चौकी स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर साहित्यसेवी आदर्श नंदन गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक ‘संस्कृति, साहित्य और परंपराओं का शहरः आगरा’ को विधिवत रूप से प्रभु चरणों में अर्पित किया गया।
यह आयोजन मंदिर के महंत डोरीदास उपाध्याय के सानिध्य में संपन्न हुआ, जहां पूरे धार्मिक वातावरण में पूजा-अर्चना महंत गोविंद उपाध्याय द्वारा कराई गई। कार्यक्रम में शहर के अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद और समाजसेवी मौजूद रहे।
पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुए लेखक आदर्श नंदन गुप्ता ने बताया कि यह कृति उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की अनुदान योजना के अंतर्गत प्रकाशित की गई है। लगभग 120 पृष्ठों की इस पुस्तक में 16 पृष्ठ रंगीन चित्रों के शामिल किए गए हैं, जिनमें आगरा के विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों, परंपराओं और ऐतिहासिक स्थलों का सुंदर चित्रण किया गया है।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों ने पुस्तक को आगरा की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. सुषमा सिंह ने कहा कि यह पुस्तक युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत उपयोगी है क्योंकि इसमें आगरा के हर क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां संकलित की गई हैं, जो शहर की पहचान को समझने में मदद करती हैं।
साहित्यकार डॉ. शशि गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि इस पुस्तक में आगरा की कला, संस्कृति और परंपराओं को समग्र रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने इसे शोधार्थियों के लिए भी उपयोगी बताया। वहीं सेंट एंड्रूज स्कूल के सीएमडी डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा कि यदि छात्रों को अपने शहर की जड़ों से परिचित होना है, तो यह पुस्तक उनके लिए एक मार्गदर्शक साबित होगी।
उप्र हिंदी संस्थान के निराला सम्मान प्राप्त कवि कुमार ललित ने कहा कि इस प्रकार का साहित्य समाज को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में ऐसी पुस्तकों की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है, जो आने वाली पीढ़ियों को उनकी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ सके।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अन्य गणमान्य लोगों ने भी पुस्तक के महत्व पर अपने विचार साझा किए। पार्षद पूजा बंसल, गिर्राज बंसल, साहित्यसेवी संजय गुप्ता, शरद गुप्ता, जितेंद्र निगम, निरुपमा, अनुभूति, आदीपिका सहित कई लोगों ने आयोजन में भाग लिया और इसे एक प्रेरणादायक पहल बताया।
मंदिर परिसर में हुए इस आयोजन ने धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से विशेष महत्व प्राप्त किया। उपस्थित लोगों ने कहा कि आगरा केवल एक ऐतिहासिक शहर ही नहीं बल्कि साहित्य, कला और परंपराओं का जीवंत केंद्र भी है, जिसे इस पुस्तक के माध्यम से और बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पुस्तक के माध्यम से आगरा की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रचारित करने के प्रयास की सराहना की और इसे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान बताया।

