आगरा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) आगरा की ओर से रविवार को होटल हॉलिडे इन में आयोजित IMA Agra CME 2026 में चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव और नई तकनीकों की झलक देखने को मिली। स्टेथोस्कोप टू रोबोटिक्स विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक सर्जरी और नई चिकित्सा तकनीकें इलाज का तरीका बदल देंगी। साथ ही यह भी कहा गया कि आधुनिक तकनीक के बावजूद डॉक्टर और मरीज के बीच भरोसा, सही जांच और बेहतर संवाद सबसे अधिक जरूरी रहेंगे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यथार्थ ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. कपिल त्यागी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केवल नई तकनीक जानना ही काफी नहीं है। ईमानदारी, मरीज के प्रति संवेदनशीलता, लगातार सीखने की इच्छा और बेहतर सेवा ही एक अच्छे डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान होती है। उनके संबोधन को खासकर युवा डॉक्टरों ने काफी सराहा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। उन्होंने पीसीपीएनडीटी अधिनियम पर हुई चर्चा में डॉक्टरों के सवालों का विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कानून के व्यवहारिक पक्ष, इसके पालन में आने वाली दिक्कतों और उनसे जुड़ी जरूरी बातों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में IMA उत्तर प्रदेश की उपाध्यक्ष डॉ. वाणी पुरी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. एस.पी.एस. चौहान और प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. वाई.बी. अग्रवाल की भी विशेष उपस्थिति रही।
वैज्ञानिक सत्र की शुरुआत डॉ. राकेश भाटिया के व्याख्यान से हुई। उन्होंने कहा कि नई मशीनें और आधुनिक जांच सुविधाएं आने के बाद भी स्टेथोस्कोप और डॉक्टर की सही जांच का कोई विकल्प नहीं है। सही जांच ही सही इलाज की पहली सीढ़ी होती है।

डॉ. सुनील बंसल ने गंभीर मरीजों में दिखाई देने वाले शुरुआती संकेतों की पहचान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय रहते बीमारी को पहचान लेने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
डॉ. रजनीश कुमार मिश्रा ने डॉक्टर और मरीज के बीच बेहतर संवाद को इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अच्छी बातचीत मरीज का भरोसा बढ़ाती है और कई कानूनी विवादों से भी बचाती है।
डॉ. दिप्तिमाला अग्रवाल ने एंटीबायोटिक दवाओं के कम असरदार होने की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दवाओं का सही और जरूरत के अनुसार उपयोग करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

डॉ. प्रांजल गुप्ता ने नई एनेस्थीसिया तकनीकों की जानकारी देते हुए बताया कि आने वाले समय में यह प्रणाली इलाज को और सुरक्षित बनाएगी।
डॉ. प्रभात अग्रवाल ने मोटापा और मधुमेह के इलाज में नई दवाओं की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं डॉ. वरुण अग्रवाल ने कैंसर के मरीजों के लिए व्यक्ति विशेष के अनुसार इलाज की नई संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
डॉ. सुरेश खुशवाहा ने मरीजों को चढ़ाए जाने वाले तरल पदार्थों के सही उपयोग पर व्यावहारिक सुझाव दिए, ताकि इलाज के दौरान अनावश्यक जोखिम से बचा जा सके।
पीसीपीएनडीटी अधिनियम पर आयोजित पैनल चर्चा में डॉक्टरों ने अपने अनुभव साझा किए और कानून से जुड़े कई सवाल उठाए, जिनका विस्तार से समाधान किया गया।
डॉ. मयंक जैन ने चिकित्सा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह तकनीक डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकती है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा डॉक्टर का ही रहेगा।
डॉ. स्वाति द्विवेदी ने नवजात शिशुओं की शुरुआती जांच के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जन्म के तुरंत बाद जांच होने से कई गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
डॉ. रणवीर सिंह त्यागी ने गर्भावस्था के दौरान हृदय गति रुकने जैसी गंभीर स्थिति में तुरंत और टीम के साथ इलाज शुरू करने की जरूरत बताई।
कार्यक्रम में रोबोटिक तकनीक सबसे अधिक चर्चा का विषय रही। डॉ. मेघल गोयल ने रोबोटिक जोड़ प्रत्यारोपण को भविष्य की अधिक सटीक और सुरक्षित सर्जरी बताया। वहीं डॉ. श्वेतांक प्रकाश ने रोबोटिक सर्जरी के वर्तमान और भविष्य पर विस्तार से जानकारी दी और बताया कि इससे मरीजों को जल्दी राहत मिलने और कम समय में स्वस्थ होने में मदद मिल रही है।
कार्यक्रम का समापन “साल 2036 का भारतीय डॉक्टर कैसा होगा” विषय पर हुई चर्चा के साथ हुआ। इसमें विशेषज्ञों ने माना कि भविष्य का डॉक्टर नई तकनीक का बेहतर उपयोग करेगा, लेकिन मरीज के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार उसकी सबसे बड़ी ताकत बने रहेंगे।
IMA आगरा के अध्यक्ष डॉ. पंकज नगायच ने कहा कि यह सीएमई केवल जानकारी देने वाला कार्यक्रम नहीं था, बल्कि डॉक्टरों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का एक प्रयास भी था। उन्होंने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
IMA आगरा के मानद सचिव डॉ. रजनीश कुमार मिश्रा ने कार्यक्रम की सफलता का श्रेय सभी वक्ताओं, चेयरपर्सन, पैनलिस्ट, आयोजन समिति, IMA आगरा की कार्यकारिणी, वैज्ञानिक समिति, सहयोगी संस्थाओं और सभी प्रतिभागियों को दिया। उन्होंने कहा कि IMA आगरा आगे भी ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि डॉक्टरों का ज्ञान बढ़े और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

