आगरा। पेट दर्द, उल्टी, कमजोरी और भूख न लगने की समस्या से जूझ रहे 53 वर्षीय मरीज के शरीर में पेट के पीछे विशाल ट्यूमर पाया गया, जो किडनी, लिवर और प्रमुख रक्त वाहिनियों तक फैल चुका था। गंभीर स्थिति में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की टीम ने कई घंटों तक चली जटिल सर्जरी कर ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकालते हुए मरीज की जान बचाई।
आगरा निवासी 53 वर्षीय विजय पिछले कई महीनों से लगातार पेट दर्द और कमजोरी से परेशान थे। धीरे-धीरे उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें खाना खाने के बाद लगातार उल्टियां होने लगीं। भूख लगभग खत्म हो चुकी थी और शरीर तेजी से कमजोर होता जा रहा था। परिवार ने कई अस्पतालों में इलाज और परामर्श लिया, लेकिन मामला अत्यधिक जटिल होने के कारण उन्हें सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक स्थित कैंसर सर्जरी विभाग में रेफर किया गया। यहां मरीज ने ओपीडी में डॉ. गौरव सिंह से परामर्श लिया।
डॉक्टरों की टीम ने मरीज की विस्तृत जांच, स्कैन और अन्य जरूरी परीक्षण कराए। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉक्टर भी गंभीर स्थिति को लेकर सतर्क हो गए। रिपोर्ट में पता चला कि मरीज के पेट के पीछे रेट्रोपेरिटोनियल स्पेस में एक विशाल ट्यूमर विकसित हो चुका है। यह ट्यूमर शरीर की प्रमुख रक्त वाहिनियों, दाहिनी किडनी और लिवर के कुछ हिस्सों को प्रभावित कर रहा था। विशेषज्ञ जांच में मरीज को “राइट रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा विद मल्टीऑर्गन इन्वॉल्वमेंट” नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित पाया गया।
स्थिति को देखते हुए सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की टीम ने तुरंत ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। डॉ. वरुण अग्रवाल और डॉ. गौरव सिंह के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने कई घंटों तक चली जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। ऑपरेशन के दौरान पेट के पीछे गहराई में फैले विशाल ट्यूमर को दाहिनी किडनी सहित सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया।
डॉक्टरों के अनुसार यह सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि ट्यूमर महत्वपूर्ण रक्त वाहिनियों और आसपास के कई अंगों से जुड़ा हुआ था। ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार की चूक मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। इसके बावजूद पूरी टीम ने बेहतर समन्वय, तकनीकी दक्षता और सावधानी के साथ सर्जरी को सफल बनाया।
सर्जरी के बाद मरीज की हालत स्थिर बनी हुई है। उन्हें चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है और लगातार स्वास्थ्य परीक्षण किए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की रिकवरी पर लगातार नजर रखी जा रही है और उनकी स्थिति पहले से बेहतर है।
सर्जरी टीम में डॉ. वरुण अग्रवाल, डॉ. गौरव सिंह और डॉ. सुभजीत शामिल रहे। वहीं जूनियर रेजिडेंट के रूप में डॉ. जफर, डॉ. अर्पित शर्मा, डॉ. अश्वनी और डॉ. विवेक ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अर्पिता सक्सेना और डॉ. योगिता के साथ रेजिडेंट डॉ. काजल, डॉ. विकास और डॉ. जसलीन ने सुरक्षित एनेस्थीसिया प्रबंधन सुनिश्चित किया।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में लगातार आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजेश गुप्ता ने कहा कि मरीजों को सुरक्षित और अत्याधुनिक शल्य चिकित्सा उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि सुपरस्पेशलिटी बिल्डिंग में प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को कैंसर सर्जरी की ओपीडी संचालित की जाती है, जहां कैंसर और जटिल सर्जरी से संबंधित मरीज विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श और उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
