- चंबल नदी में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त निगरानी
- अंतरराज्यीय समन्वय से बनेगी संयुक्त एसओपी और कार्ययोजना
- आगरा सीमा पर सीसीटीवी, ड्रोन और चेकिंग सिस्टम होगा मजबूत
आगरा। जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में चंबल नदी क्षेत्र से जुड़े अवैध बालू खनन और उसके परिवहन पर रोक को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में स्पष्ट किया गया कि राजस्थान और मध्यप्रदेश से होने वाले अवैध खनन के आगरा सीमा तक आने वाले प्रभाव को रोकने के लिए संयुक्त टीम, तकनीकी निगरानी, अंतरराज्यीय समन्वय और सख्त प्रवर्तन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

जिला प्रशासन आगरा द्वारा चंबल नदी क्षेत्र में अवैध बालू खनन और उसके परिवहन को रोकने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी मनीष बंसल ने की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन की स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में बताया गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में बढ़ते अवैध रेत खनन को गंभीर पर्यावरणीय खतरा मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश मिलकर एक समान, व्यापक और समयबद्ध मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करें, जिससे अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि अवैध खनन की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए तीनों राज्यों के बीच वास्तविक समय सूचना साझा करने की व्यवस्था विकसित की जाए। इसके साथ ही संयुक्त अभियान, त्वरित कार्रवाई और सीमा पार समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को तत्काल रोका जा सके।

बैठक में यह भी सामने आया कि चंबल नदी क्षेत्र में अवैध खनन से घड़ियाल सहित कई लुप्तप्राय जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ रहे इस प्रभाव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं और प्रवर्तन एजेंसियों को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने को कहा है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आगरा जनपद की सीमा से अवैध खनन सामग्री के परिवहन को रोकने के लिए बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली लागू की जाए। इसके लिए सीमावर्ती तहसीलों में एसडीएम, एसीपी, एआरटीओ और खनन विभाग की संयुक्त प्रवर्तन टीम गठित की जाएगी, जो नियमित रूप से चेकिंग और निगरानी का कार्य करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि अवैध खनन के संभावित मार्गों को चिन्हित कर उन पर आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं तथा एक केंद्रीकृत कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए, जिससे 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित हो सके। वन विभाग को ड्रोन आधारित सर्विलांस प्रणाली अपनाने और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि अवैध खनन में प्रयुक्त वाहनों को तत्काल प्रभाव से सीज किया जाएगा और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रवर्तन कार्यवाही को और तेज किया जाएगा।
इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों के संबंधित जनपदों के अधिकारियों के साथ नियमित संयुक्त बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए, ताकि अंतरराज्यीय समन्वय को और मजबूत किया जा सके। साथ ही पर्यावरणीय क्षति की भरपाई “प्रदूषक भुगतान सिद्धांत” के तहत सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि जनपद में चंबल नदी क्षेत्र में कोई वैध खनन पट्टा नहीं है और अवैध परिवहन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। समय-समय पर चलाए गए विशेष अभियानों में कई वाहन जब्त किए गए हैं और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया गया है।
जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए और निगरानी व्यवस्था को तकनीकी रूप से और मजबूत किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि जिले की सीमा में प्रवेश न कर सके।
बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, पुलिस एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिला खनन अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
