आगरा। डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के जुबली हॉल में शनिवार को कन्हैया लाल माणिक लाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ (केएमआई) और साहित्य साधिका समिति के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. रमा ‘रश्मि’ की गद्य कृति ‘नारी विमर्श और प्रभा खेतान’ और काव्य कृति ‘धूप और चाँद’ का लोकार्पण किया गया। समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी, केएमआई निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर, सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सीमा समृद्धि, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नीलम भटनागर, डॉ. आरएस तिवारी ‘शिखरेश’, डॉ. सुषमा सिंह और अन्य प्रमुख साहित्यकार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आरंभ डॉ. राजेंद्र दवे द्वारा स्वस्ति वाचन और ललिता कर्मचंदानी द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद रीता शर्मा, नूतन अग्रवाल, ममता भारती, अलका अग्रवाल, डॉ. मंजू स्वाति, संगीता अग्रवाल और राकेश निर्मल ने डॉ. रमा ‘रश्मि’ की कविताओं का पाठ कर सभी को भाव विभोर कर दिया। साहित्य साधिका समिति की सचिव डॉ. यशोधरा यादव ने सभी अतिथियों, उपस्थित साहित्यकारों और शिक्षक समुदाय का आभार व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि रमा ‘रश्मि’ का साहित्य आज की बेटियों के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता का मतलब स्वच्छंदता नहीं है और माता-पिता को धोखा देना उचित नहीं है। हर नारी पिता के आशीर्वाद और पति के सहयोग के बल पर किसी भी मंजिल को पा सकती है। कुलपति प्रो. आशु रानी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि नारी और पुरुष में शारीरिक अंतर जरूर है, लेकिन संवेदना, सृजन, चेतना, शक्ति और साहस में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने रमा ‘रश्मि’ के रचना कर्म की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम नारी सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है।
केएमआई निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने कहा कि डॉ. रमा ने अपनी कविताओं और गद्य कृतियों के माध्यम से समाज के यथार्थ को उजागर किया है। उनकी रचनाएँ समाज का सच्चा दर्पण हैं। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सीमा समृद्धि ने कहा कि स्त्री विमर्श सिर्फ मानवता के हक-अधिकार की लड़ाई है। इतिहास बदल नहीं सकता, लेकिन वर्तमान को सुधारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज की नारी रमा ‘रश्मि’ के रूप में बोल रही है और अपनी सोच पर गर्व कर रही है।
गद्य कृति ‘नारी विमर्श और प्रभा खेतान’ की समीक्षा करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नीलम भटनागर ने कहा कि रमा ने हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण के लिए आर्थिक स्वावलंबन आवश्यक है। डॉ. अनिल उपाध्याय ने कहा कि यदि प्रभा खेतान का साहित्य नारी विमर्श की गीता है, तो रमा ‘रश्मि’ की यह कृति उस गीता पर लिखा उत्कृष्ट और प्रामाणिक भाष्य है।
काव्य कृति ‘धूप और चाँद’ की समीक्षा करते हुए डॉ. आरएस तिवारी ‘शिखरेश’ ने कहा कि यह कृति यथार्थवाद, आशावाद और मानवीय संवेदनाओं का त्रिवेणी संगम है। साहित्य साधिका समिति की संस्थापक और पूर्व प्राचार्य डॉ. सुषमा सिंह ने भी रमा ‘रश्मि’ की रचना धर्मिता और समाज सेवा को सराहा।
डॉ. रमा ‘रश्मि’ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “तमस के वातावरण में अपनी रश्मियाँ बिखेरती हूँ। साहित्य को समर्पित होकर सत्य को साधती हूँ।” उन्होंने अपनी गद्य कृति के बारे में कहा कि नारी विमर्श को जानने-समझने के लिए प्रभा खेतान का साहित्य सर्वोत्तम मार्गदर्शक है।
समारोह में लेखक के परिवार के सदस्य रूप किशोर वर्मा, भूपेंद्र सिंह, भानेंद्र सिंह, मनोज कुमार, रीना, राजेश कुमार, रोहित कुमार, रेखा और नमस्या उपस्थित रहे। अन्य साहित्यकारों और शिक्षाविदों में बाँकेलाल गौड़, प्रो. शिखा श्रीधर, रमेश पंडित, डॉ. राजेंद्र मिलन, राज बहादुर राज, नीरज जैन, शीलेंद्र वशिष्ठ, डॉ. ब्रज बिहारी लाल बिरजू, जितेंद्र फौजदार, डॉ. शेषपाल सिंह, मीरा परिहार, रवींद्र वर्मा, अलका चौधरी, साधना वैद, डॉ. केशव शर्मा, रामेंद्र शर्मा ‘रवि’, दुर्ग विजय सिंह दीप, डॉ. युवराज सिंह, आनंद राय, नंद नंदन गर्ग, रितु गोयल, हिमानी चतुर्वेदी, अदिति कात्यायन, प्रकाश गुप्ता बेबाक और शहर के जाने-माने साहित्यकार एवं शिक्षाविद प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इस प्रकार यह कार्यक्रम न केवल डॉ. रमा ‘रश्मि’ की साहित्यिक उपलब्धियों का उत्सव रहा, बल्कि नारी सशक्तिकरण, साहित्यिक चेतना और शिक्षा के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच भी साबित हुआ।

