✦ राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर बच्चों के समय पर टीकाकरण की जागरूकता बढ़ाई गई।
✦ सीएचसी अछनेरा और बरौली अहीर में माता-पिता को टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित किया गया।
✦ कार्यक्रम में टीकों के लाभ और सुरक्षित भविष्य के लिए टीकाकरण की अहमियत बताई गई।
आगरा (ब्यूरो)।राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर सोमवार को जनपद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अछनेरा और बरौली अहीर पर विशेष गोष्ठियों का आयोजन कर आमजन को बच्चों के समय पर टीकाकरण कराने के महत्व और इससे होने वाले लाभ के बारे में अवगत कराया गया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य आमजन को बच्चों के टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने शून्य से पांच साल तक के बच्चों का समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं और अपने पड़ोसियों, रिश्तेदारों और समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। टीकाकरण ही बच्चों के स्वास्थ्य और उनके उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. उपेंद्र कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण किया जाता है। यह बच्चों को 11 जानलेवा बीमारियों से बचाने में मदद करता है। उन्होंने बताया कि टीकाकरण से न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि समाज में रोग फैलने की संभावना भी कम होती है।

सीएचसी अछनेरा के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार ने कहा कि गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य समाज में टीकाकरण के प्रति जागरूकता फैलाना और माता-पिता को अपने बच्चों का सही समय पर टीकाकरण कराना सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि टीकाकरण एमसीपी कार्ड पर दी गई तारीख के अनुसार करना चाहिए और कार्ड हमेशा अपने पास रखना चाहिए।
सीएचसी अछनेरा के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी बिपिन बिहारी मिश्रा ने बताया कि गोष्ठी में टीकाकरण के लाभों के साथ-साथ टीकाकरण कराने के दौरान और उसके बाद होने वाली सामान्य परेशानियों के बारे में भी जानकारी दी गई। वहीं, बरौली अहीर सीएचसी के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी सतीश यादव ने कहा कि टीकाकरण के बाद मामूली बुखार जैसी प्रतिक्रिया सामान्य है और यह संकेत है कि टीका प्रभावी रूप से कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर बच्चों को दिए जाने वाले प्रमुख टीकों की जानकारी भी साझा की गई। जन्म के समय बीसीजी, ओपीवी और हेपेटाइटिस-बी, 6 और 10 सप्ताह पर ओपीवी, पेंटावैलेंट, रोटावायरस और पीसीवी, 14 सप्ताह पर ओपीवी, पेंटावैलेंट, रोटावायरस और पीसीवी, 9-12 महीने पर खसरा-रूबेला (एमएमआर), जापानी इंसेफेलाइटिस और न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन, तथा 16-24 महीने पर एमएमआर की दूसरी खुराक और वार्षिक इन्फ्लूएंजा वैक्सीन बच्चों को दी जाती हैं।
टीकाकरण के लाभों के बारे में बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि यह बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाता है, गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए तैयार करता है और समाज में बीमारियों के फैलाव को रोकता है। उन्होंने सभी से अपील की कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करें, टीकाकरण केंद्रों तक पहुंच में मदद करें और समाज में टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाएं।
इस प्रकार राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने न केवल जनपद के नागरिकों में बच्चों के समय पर टीकाकरण कराने के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि टीकाकरण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है और हर बच्चे के स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

