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Agra News : डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में अंतरराष्ट्रीय हिंदी व्याख्यान—नार्वे और मॉरीशस से मिली प्रेरणा, विद्यार्थियों ने जाना हिंदी का वैश्विक महत्व

Students attending the international Hindi lecture at Dr. Bhimrao Ambedkar University, Agra with speakers from Norway and MauritiusDr. Bhimrao Ambedkar University, Agra organizes international Hindi lecture showcasing Norway and Mauritius, inspiring students with global significance of Hindi
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आगरा। कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के हिंदी विभाग द्वारा आज विद्यापीठ के सूरकक्ष में अंतरराष्ट्रीय प्रसार व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में संचालित हुआ और इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को हिंदी की वैश्विक महत्ता, विदेशों में हिंदी का सृजन और संस्कृति से जुड़ाव समझाना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यापीठ के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर द्वारा अतिथियों का स्वागत और बीज वक्तव्य के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि व्याख्यानमाला का उद्देश्य विदेशों में साहित्य-सृजन कर रहे अंतरराष्ट्रीय अतिथियों को आमंत्रित कर वहां हिंदी की वास्तविक स्थिति का अनुभव करना और विद्यार्थियों को उससे जोड़ना है।

नार्वे के वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार सुरेशचंद्र शुक्ल (शरद आलोक) ने ‘नार्वे में हिंदी पत्रकारिता’ विषय पर अपने व्याख्यान में बताया कि नार्वे जैसे सुंदर उत्तरी देश में भारतीयों की उपस्थिति ने हिंदी पत्रकारिता को मजबूती प्रदान की। उन्होंने ‘उत्तर प्रवासी’, ‘संबंध’ और ‘परिचय’ जैसी पत्रिकाओं का उल्लेख किया और बताया कि वर्तमान में प्रकाशित ‘स्पाइल दर्पण’ पत्रिका भारत और नार्वे के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य कर रही है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हम अपने बच्चों को हिंदी से जोड़ेंगे, तभी विदेशों में हिंदी पत्रकारिता जीवंत रह सकेगी। उन्होंने हिंदी के उज्ज्वल भविष्य पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में यह और अधिक लोगों की भाषा बनेगी।

मॉरीशस के महात्मा गांधी संस्थान की हिंदी व्याख्याता डॉ. तनुजा पदारथ ने ‘मॉरीशस में हिंदी की दशा एवं दिशा’ पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि हिंदी वहां श्रमिकों की भाषा से विकसित होकर आज सम्मानजनक स्थिति में पहुंची है। उन्होंने यह भी बताया कि हिंदी के माध्यम से रामचरितमानस और हनुमान चालीसा जैसे धार्मिक ग्रंथ पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित हुए। विश्व हिंदी सचिवालय की स्थापना और मॉरीशस में हिंदी के प्रसार का उल्लेख करते हुए उन्होंने हिंदी के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

मॉरीशस से पधारे अरुण रघुवीर ने भारतीय संस्कृति के प्रति अपने जुड़ाव को साझा किया। वहीं अरुणा रघुवीर ने बताया कि वे मॉरीशस में भारतीय विवाहों में दूल्हे और बारातियों के लिए पारंपरिक पगड़ी बनाने और बांधने का कार्य करती हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति विदेशों में भी मजबूती से स्थापित है और पांचवीं पीढ़ी तक इसे गर्व के साथ निभा रही है।

कार्यक्रम के दौरान ‘बड़ौदा मेधावी सम्मान समारोह’ में वर्ष 2025 की एम.ए. हिंदी की छात्रा शिल्पी यादव को 11,000 रुपये तथा छात्र निर्दोष कुमार को 7,500 रुपये का चेक प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।

कार्यक्रम में प्राध्यापकगण डॉ. केशव शर्मा, डॉ. आदित्य प्रकाश, डॉ. वर्षा रानी, डॉ. मोहिनी दयाल, डॉ. रमा ‘रश्मि’, डॉ. अंगद, विशाल शर्मा, डॉ. संदीप सिंह, उपेंद्र पचौरी, प्रीती यादव और कंचन सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संदीप शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया।

यह आयोजन न केवल हिंदी की वैश्विक पहचान को मजबूत करने वाला रहा, बल्कि विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़कर ही वे विश्व पटल पर नई पहचान बना सकते हैं।

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