आगरा। जिले में स्वास्थ्य विभाग ने जच्चा-बच्चा के बेहतर स्वास्थ्य के लिए संस्थागत प्रसव बढ़ाने पर जोर दिया है। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता, एएनएम, स्टाफ नर्स और प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से भ्रांतियां दूर कर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी आगरा डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में नाई की सराय में केवल 20, देहतोरा मोड में 37 और रामनगर में 25 संस्थागत प्रसव हुए थे। इस वर्ष (2025-26) के लिए प्रभारी अधिकारियों को कुशल रणनीति बनाने का निर्देश दिया गया। परिणामस्वरूप अप्रैल से दिसंबर तक नाई की सराय में 69, देहतोरा मोड में 110 और रामनगर में 64 प्रसव दर्ज किए गए।
राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. ऋषि गोपाल ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना माताओं और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने के लिए महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल हेतु नगद सहायता दी जाती है। शहरी गर्भवती को 1,000 रुपए और ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती को 1,400 रुपए सीधे खाते में भेजे जाते हैं।
नाई की सराय के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवांश उपाध्याय ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और स्टाफ नर्स के साथ नियमित बैठक और घर-घर भ्रमण कर गर्भवती महिलाओं और उनके परिवार को संस्थागत प्रसव, प्रसव पोटली और पीएमएसएमए दिवस की जानकारी दी गई। आयरन टेबलेट और आयरन सुक्रोज़ इंजेक्शन के माध्यम से मातृ एनीमिया का प्रबंधन किया गया। इन प्रयासों से अप्रैल से दिसंबर तक 69 संस्थागत प्रसव संभव हुए।
देहतोरा मोड की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीक्षा ने बताया कि केंद्र पर सभी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, स्वच्छता और प्रसव कक्ष की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। उच्च जोखिम गर्भवस्थाओं में आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया, जिससे जिला स्तरीय रेफरल में कमी आई।
रामनगर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमंत गोयल ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से नियमित मातृ बैठकें और महिला आरोग्य समिति की बैठकें आयोजित कर गर्भवती और उनके परिवार को संस्थागत प्रसव के लाभों के प्रति जागरूक किया गया।
शाहनगर की 25 वर्षीय गर्भवती नरगिस ने बताया कि उनका पहला बच्चा घर पर ही जन्मा था, लेकिन दूसरी बार आशा कार्यकर्ता की समझाइश और स्वास्थ्य केंद्र के सहयोग से उन्होंने सुरक्षित रूप से शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नाई की सराय में प्रसव कराया। उन्होंने कहा, “स्टाफ का व्यवहार बहुत अच्छा है, सभी को स्वास्थ्य केंद्र पर ही डिलीवरी करनी चाहिए।”
सभी प्रयासों से न केवल संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई है, बल्कि माताओं और नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ है।
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