• Fri. Mar 6th, 2026

TODAY News Track

India #1 News Platform लेटेस्ट व ब्रेकिंग न्यूज | हिन्दी समाचार | यूपी न्यूज

बजट 2026–27: सड़क दुर्घटना पीड़ितों के मुआवज़े पर ब्याज पर कोई आयकर या टीडीएस नहीं, पूरा मुआवज़ा सीधे परिवार को मिलेगा

Spread the love

आगरा। बजट वर्ष 2026–27 में सरकार ने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मानवीय प्रावधान पेश किया है। इसके तहत मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा दिए जाने वाले मुआवज़े पर मिलने वाला ब्याज अब आय नहीं माना जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस ब्याज पर न तो कोई आयकर लगेगा और न ही बीमा कंपनियां या कोई अन्य संस्था इस पर टीडीएस (Tax Deducted at Source) काट सकेगी।

यह राहत केवल प्राकृतिक व्यक्ति (natural person) के लिए लागू होगी, जैसे कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति, मृतक की पत्नी, बच्चे या अन्य आश्रित। किसी कंपनी, एलएलपी, ट्रस्ट, सोसाइटी या अन्य कृत्रिम व्यक्ति (artificial person) को यह सुविधा नहीं मिलेगी। यह प्रावधान विशेष रूप से आम नागरिक और पीड़ित परिवार को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

पहले की व्यवस्था में जब किसी सड़क दुर्घटना के मामले में न्यायालय द्वारा मुआवज़ा दिया जाता था, तो उस पर मिलने वाले ब्याज को “अन्य स्रोत से आय” मानकर कर लगाया जाता था। जबकि यह ब्याज किसी व्यापार, नौकरी या निवेश से नहीं बल्कि न्याय मिलने में हुई देरी के कारण दिया जाता था। कई मामलों में पीड़ित या उसका परिवार वर्षों तक मुकदमेबाज़ी झेलता रहा और अंत में जब राहत मिली, तो उसका एक हिस्सा कर के रूप में काट लिया जाता था, जो अत्यंत अन्यायपूर्ण था।

इस नए प्रावधान का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पीड़ित व्यक्ति या परिवार को पूरा मुआवज़ा और पूरा ब्याज बिना किसी कटौती के मिलेगा। इससे उन्हें इलाज, पुनर्वास, बच्चों की पढ़ाई, घर चलाने और जीवन को पुनः पटरी पर लाने में वास्तविक मदद मिलेगी। यह राशि उनके लिए कमाई नहीं, बल्कि उनके नुकसान और पीड़ा की भरपाई है।

यह निर्णय विशेष रूप से गरीब, ग्रामीण और साधारण परिवारों के लिए बहुत उपयोगी है। पहले टीडीएस कटने के बाद राशि की वापसी के लिए आयकर रिटर्न भरना पड़ता था, जो अधिकांश लोगों के लिए जटिल, खर्चीला और तनावपूर्ण था। कई लोग संसाधनों या जानकारी के अभाव में अपनी ही राशि वापस नहीं ले पाते थे। अब इस व्यवस्था के समाप्त होने से उन्हें आयकर विभाग के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

इससे मुआवज़े का भुगतान भी तेज़ और सरल हो जाएगा। बीमा कंपनियाँ अब कर काटने के नाम पर भुगतान रोक नहीं सकेंगी और अदालत द्वारा तय की गई पूरी राशि सीधे पीड़ित तक पहुँचेगी। इससे न्याय मिलने में अनावश्यक देरी भी कम होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि MACT द्वारा दिए गए मुआवज़े पर मिलने वाला ब्याज आय नहीं बल्कि न्याय में हुई देरी की क्षतिपूर्ति है। इसे कर के दायरे में लाना न तो कानूनी रूप से उचित था और न ही नैतिक रूप से। यह फैसला राज्य की संवेदनशीलता और पीड़ित-केंद्रित सोच को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, बजट 2026–27 का यह प्रावधान सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए आर्थिक राहत, मानसिक शांति और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करता है। यह कदम न्याय प्रणाली पर आम आदमी का भरोसा बढ़ाने वाला है और यह संदेश देता है कि सरकार सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को करदाता नहीं, बल्कि सहायता के पात्र नागरिक मानती है।

#RoadAccidentCompensation #MACT #TaxFreeInterest #Budget2026 #AccidentVictimsRelief #FullPayout #TDSExemption #FinancialRelief #IndianBudget #VictimSupport

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *