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Agra News: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में AI और भूगोल आधारित भाषा शिक्षण कार्यशाला

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आगरा। शिक्षा, तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते वैश्विक समन्वय को ध्यान में रखते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में जियोप्रॉम्प्टिंग पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

Dr. Bhimrao Ambedkar University Agra Geoprompting international workshop inauguration with Vice-Chancellor Prof. Ashu Rani


 
यह कार्यशाला 05 से 07 फरवरी 2026 तक विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित जे.पी. सभागार में संपन्न होगी।कार्यशाला का आयोजन माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में विदेशी भाषा विभाग द्वारा किया जा रहा है। 

इसे विदेशी भाषा विभाग, एसोसिएशन ऑफ इंडियन फ्रेंच प्रोफेशनल्स एंड रिसर्चर्स, इंटरनेशनल फ्रैंकोफोनी इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इन AI न्यूरोपेडागोजी एंड डिटेक्टिव्स (IFRINA) और एसोसिएशन ऑफ एक्सपर्ट्स एंड इवेलुएटर्स इन द फील्ड ऑफ ह्यूमन एंड AI (EVAL) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

इस कार्यशाला में रूस, फ्रांस और उज़्बेकिस्तान से विद्वान, शिक्षाविद् और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं। फ्रांस के प्रतिष्ठित AI विशेषज्ञ प्रो. निकोला मर्तिन विशिष्ट अतिथि होंगे, जबकि अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त AI विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार शांतालिंगम (पुदुचेरी) मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगे।

कार्यशाला का विषय है “GEOPROMPTING: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भूगोल के माध्यम से नवाचारी भाषा शिक्षण”, जिसका उद्देश्य भाषा शिक्षण को पारंपरिक कक्षा-आधारित ढांचे से आगे ले जाकर AI, डिजिटल तकनीक और वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ना है।

देशभर के विभिन्न राज्यों और उच्च शिक्षण संस्थानों से 50 से अधिक प्राध्यापक, शोधार्थी, भाषा विशेषज्ञ और विद्यार्थी इसमें भाग ले रहे हैं। कार्यशाला को इनडोर और आउटडोर दोनों स्वरूपों में आयोजित किया जा रहा है।

कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि आज का युग केवल ज्ञान अर्जन का नहीं, बल्कि ज्ञान के सृजन और उसके नवाचारी उपयोग का है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक शिक्षा के स्वरूप को नई दिशा दे रही हैं।

उन्होंने बताया कि Geoprompting जैसी कार्यशालाएँ भाषा शिक्षण को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और समसामयिक बनाती हैं तथा विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक हैं। विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय सहयोग, तकनीक आधारित शिक्षण और अंतःविषयी अनुसंधान को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है और यह कार्यशाला उसी दूरदर्शी शैक्षणिक दृष्टि का सशक्त उदाहरण है।

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