आगरा। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में कुलपति प्रोफेसर आशु रानी की अध्यक्षता में हुई कार्य परिषद की महत्वपूर्ण बैठक में शताब्दी वर्ष की तैयारियों, शैक्षणिक सुधार, प्रशासनिक पारदर्शिता और नवाचार से जुड़े कई बड़े निर्णय लिए गए। बैठक में डाक टिकट एवं स्मारक सिक्का जारी करने, प्रोन्नति, भर्ती प्रक्रिया, इनक्यूबेशन फाउंडेशन, पुस्तकालय आधुनिकीकरण और अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

आगरा स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद खंदारी परिसर स्थित गेस्ट हाउस में सोमवार को कार्य परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने की, जिसमें विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं विकासात्मक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक की शुरुआत पिछली कार्य परिषद बैठकों में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा से हुई, जिन्हें सर्वसम्मति से अनुमोदन प्रदान किया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय के आगामी शताब्दी वर्ष को लेकर विशेष चर्चा की गई। शताब्दी वर्ष को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विचार किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय के नाम पर डाक टिकट एवं स्मारक सिक्का जारी करने के प्रस्ताव को भी बैठक में मंजूरी दी गई। निर्णय लिया गया कि यह प्रस्ताव माननीय कुलाधिपति के माध्यम से भारत सरकार को भेजा जाएगा।
शैक्षणिक गुणवत्ता और मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देते हुए कार्य परिषद ने कैरियर एडवांसमेंट योजना के तहत कई शिक्षकों को पदोन्नति प्रदान की। इसके तहत प्रोफेसर संजीव शर्मा, प्रोफेसर अजय तनेजा, प्रोफेसर मनु प्रताप सिंह, प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर एवं प्रोफेसर संजय चौधरी को सीनियर प्रोफेसर पद पर पदोन्नति दी गई। वहीं डॉ. राजेश कुशवाहा, डॉ. नीलम यादव, डॉ. राजीव वर्मा और डॉ. मोहम्मद हुसैन को सह आचार्य पद पर पदोन्नत किया गया।
विश्वविद्यालय में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया को गति देने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी के गठन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। यह पूरी प्रक्रिया ‘समर्थ’ पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी और डिजिटल तरीके से संपन्न की जाएगी, जिससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
बैठक में विवेकानंद इनक्यूबेशन फाउंडेशन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अब तक इस पहल के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा 15 स्टार्टअप कंपनियों का पंजीकरण किया जा चुका है। कार्य परिषद ने सभी संबद्ध महाविद्यालयों को निर्देश दिए कि वे छात्रों को इस योजना से जोड़ें और उन्हें उद्यमिता की ओर प्रेरित करें।
पुस्तकालय आधुनिकीकरण के अंतर्गत आरएफआईडी प्रणाली के विस्तार को भी मंजूरी दी गई। अब तक लगभग 60,000 पुस्तकों को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जा चुका है, जबकि शेष पुस्तकों को भी इस प्रणाली से जोड़ने का कार्य जारी है, जिससे केंद्रीय पुस्तकालय में पुस्तकों की उपलब्धता और प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा।
बैठक में शांति देवी महाविद्यालय, मैनपुरी के विरुद्ध गंभीर अनियमितताओं के चलते सत्र 2026-27 से प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। महाविद्यालय द्वारा भूमि संबंधी गलत तथ्य प्रस्तुत करने और जांच लंबित होने के कारण यह कार्रवाई की गई है। साथ ही अन्य ऐसे महाविद्यालयों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं जिन्होंने ऑनलाइन पोर्टल पर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं की हैं। नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों पर आर्थिक दंड लगाने की भी स्वीकृति दी गई।
शिक्षक संघ और कर्मचारी संघ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए निर्णय लिया गया कि सभी को राज्य सरकार के स्वायत्त निकाय के अंतर्गत नियमों के अनुसार सेवा शर्तों में शामिल किया जाएगा। इससे कर्मचारियों और शिक्षकों से जुड़े प्रशासनिक मामलों में स्पष्टता आएगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में प्रोफेसर गौतम जायसवाल द्वारा प्रस्तुत निलंबन समाप्ति के आवेदन पर निर्णय लेते हुए इसे पुनः आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को भेजने का निर्णय लिया गया, ताकि राज्य सरकार की नियमावली के अनुसार पुनः परीक्षण किया जा सके।
बैठक में नव-नामित सदस्य श्री पूरन डाबर ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना के अंतर्गत छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने का सुझाव दिया और विशेष रूप से फुटवियर टेक्नोलॉजी में पाठ्यक्रम शुरू करने की बात रखी।
गवर्नर नॉमिनी डॉ. जगन्नाथ गुप्ता ने विश्वविद्यालय की नवाचार आधारित योजनाओं की सराहना की। उन्होंने बताया कि ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ योजना के तहत उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के विशेषज्ञ छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करेंगे। इस योजना के तहत चयनित विशेषज्ञों में डॉ. अनिल कुमार पांडे, श्री दिवाकर खरे और श्री देवेंद्र सक्सेना शामिल हैं।
न्यायाधीश एवं कार्य परिषद सदस्य श्री सुधीर कुमार सक्सेना ने भी बैठक में महत्वपूर्ण सुझाव दिए और निर्णय प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाने की बात कही।
बैठक में कुलसचिव अजय मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओम प्रकाश, अधिकारी महिमा चंद सहित सभी सदस्य एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, यह बैठक विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष की तैयारी के साथ-साथ शैक्षणिक गुणवत्ता, पारदर्शिता और नवाचार को नई दिशा देने वाली साबित हुई, जिससे आने वाले समय में संस्थान की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है।
