आगरा। भीषण गर्मी के बीच यात्रियों को राहत देने वाली एसी बसें ही ठप पड़ी हैं। ताज डिपो की कई एसी बसें खराबी और मेंटीनेंस की कमी के चलते वर्कशॉप में खड़ी हैं, जिससे यात्रियों को मजबूरन सामान्य बसों में सफर करना पड़ रहा है। बसों की खराब हालत, एसी सिस्टम फेल और जरूरी पार्ट्स की दिक्कतों ने परिवहन व्यवस्था की पोल खोल दी है।

तापमान लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों को राहत देने वाली एसी बसें सड़कों पर नजर नहीं आ रहीं। ताज डिपो की एसी बसों की स्थिति इस समय बेहद खराब है। आरामदायक सफर की उम्मीद लगाए बैठे यात्रियों को चिलचिलाती गर्मी में साधारण बसों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
ताज डिपो के वर्कशॉप में कई एसी बसें लंबे समय से खड़ी हैं। किसी बस की बॉडी खराब है तो किसी के पहिए खुले पड़े हैं। कई बसें ऐसी हैं जिनके एसी सिस्टम पूरी तरह से ठप हैं, जबकि कुछ बसों के अल्टरनेटर खराब होने के कारण वे संचालन में नहीं लाई जा पा रही हैं। बसों की खिड़कियों की हालत भी बेहद खराब है और उन्हें रस्सियों से बांधकर किसी तरह काम चलाया जा रहा है।

डिपो में कुल 98 बसें हैं, जिनमें से 24 एसी बसें शामिल हैं। ये एसी बसें आमतौर पर आगरा से लखनऊ, बनारस, इलाहाबाद, देहरादून, हरिद्वार, नोएडा और दिल्ली जैसे लंबे रूटों पर संचालित होती हैं। लेकिन वर्तमान में इन बसों का बड़ा हिस्सा मेंटीनेंस के इंतजार में वर्कशॉप में खड़ा है, जिससे यात्रियों को सुविधा नहीं मिल पा रही है।
बसों के रखरखाव का जिम्मा एक निजी कंपनी को सौंपा गया है, जिसे बसों के संचालन के किलोमीटर के आधार पर भुगतान किया जाता है। इस व्यवस्था के बावजूद समय पर मेंटीनेंस नहीं होने से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। ताज डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश कुमार का कहना है कि एसी बसों की उम्र जरूर ज्यादा हो चुकी है, लेकिन वे अभी नीलामी के लायक नहीं हैं।

उन्होंने बताया कि शेड्यूल के अनुसार एसी बसों का संचालन किया जाता है और एक बस रोजाना करीब 700 से 950 किलोमीटर तक चलती है। ऐसे में अल्टरनेटर या एसी में खराबी आना सामान्य बात है, जिसे ठीक कराया जाता है। वर्तमान में 24 में से 16 एसी बसें संचालित की जा रही हैं, जबकि बाकी बसें मेंटीनेंस के बाद ही सड़क पर उतरेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि आमतौर पर करीब पांच प्रतिशत बसें वर्कशॉप में रहती हैं और यदि कोई बस रास्ते में खराब होती है तो संबंधित कंपनी से रिकवरी की जाती है।
हालांकि, जमीनी स्थिति इससे अलग नजर आ रही है। आगरा के पांच प्रमुख डिपो आगरा फोर्ट, ईदगाह, ताज डिपो, फाउंड्री नगर और बाह में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। इन डिपो में करीब 20 से 25 बसें लंबे समय से खड़ी हैं, जबकि लगभग 50 बसें 40 हजार किलोमीटर का संचालन पूरा कर चुकी हैं और उन्हें पूरी सर्विसिंग का इंतजार है।
रोजाना करीब छह बसें वर्कशॉप में मरम्मत के लिए पहुंचती हैं, लेकिन इंजन जैसे बड़े पार्ट्स में खराबी के कारण वे लंबे समय तक खड़ी रह जाती हैं। इससे बसों की उपलब्धता और कम हो जाती है और यात्रियों को सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ताज डिपो का पानी खारा है, जिससे बसों की बॉडी तेजी से गल रही है। इससे बसों की हालत लगातार खराब होती जा रही है और मेंटीनेंस का खर्च भी बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, भीषण गर्मी के बीच एसी बसों का ठप होना परिवहन विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। यात्रियों को राहत देने के बजाय उन्हें असुविधा झेलनी पड़ रही है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

