आगरा। मण्डलायुक्त नगेन्द्र प्रताप ने गुरुवार को लेडी लायल महिला चिकित्सालय परिसर में चल रहे विस्तारीकरण योजना के निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। इस योजना के तहत हॉस्पिटल ब्लॉक, मोर्चरी, मेडिकल ब्लॉक और ईएसएस ब्लॉक का निर्माण कार्य जारी है। अधिकारियों ने अवगत कराया कि वर्तमान में कार्य की भौतिक प्रगति लगभग 30 प्रतिशत है। सात मंजिला मेडिकल कॉलेज ब्लॉक में बेसमेंट आरसीसी कार्य पूरा हो चुका है, जबकि ग्राउंड फ्लोर का 95 प्रतिशत और फर्स्ट फ्लोर का 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। अन्य ब्लॉकों में बेसमेंट या ग्राउंड फ्लोर स्तर पर आरसीसी एवं कॉलम कास्टिंग का कार्य चल रहा है। निरीक्षण के दौरान मण्डलायुक्त ने गुणवत्ता, गति और सुरक्षा मानकों पर विशेष जोर देते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

आगरा। लेडी लायल महिला चिकित्सालय परिसर में चल रहे विस्तारीकरण योजना के निर्माण कार्य का गुरुवार को मण्डलायुक्त नगेन्द्र प्रताप ने स्थलीय निरीक्षण किया। यह परियोजना जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, प्रगति और सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की।

अधिकारियों ने बताया कि इस विस्तारीकरण योजना के अंतर्गत हॉस्पिटल ब्लॉक, मोर्चरी, मेडिकल ब्लॉक और ईएसएस ब्लॉक का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में परियोजना की कुल भौतिक प्रगति लगभग 30 प्रतिशत है। सात मंजिला मेडिकल कॉलेज ब्लॉक में बेसमेंट का आरसीसी कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा ग्राउंड फ्लोर का 95 प्रतिशत तथा फर्स्ट फ्लोर का 60 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। अन्य ब्लॉकों में अभी बेसमेंट अथवा ग्राउंड फ्लोर स्तर पर ही आरसीसी और कॉलम कास्टिंग का कार्य प्रगति पर है।

निरीक्षण के दौरान मण्डलायुक्त ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पाया कि कुछ स्थानों पर शटरिंग की लाइन और लेवल की सही जांच किए बिना ही कंक्रीट कार्य कर दिया गया, जिससे सतह की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इस पर उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आरएफआई (Request for Inspection) केवल शटरिंग की लाइन और लेवल की पूरी जांच के बाद ही जारी की जाए। साथ ही जहां भी मानकों के विपरीत कार्य पाया जाए, वहां तत्काल एनसीआर जारी कर कार्य को तोड़कर पुनः मानक के अनुसार कराया जाए।
निर्माण कार्य की धीमी गति पर भी मण्डलायुक्त ने असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कार्य में लगी मैनपावर की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि परियोजना को निर्धारित समय में पूर्ण करने के लिए श्रमिकों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए और भौतिक प्रगति में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण और वायु प्रदूषण रोकथाम के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं। इस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण स्थल पर प्रभावी डस्ट कंट्रोल उपाय अनिवार्य रूप से लागू किए जाएं, जिससे आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
मण्डलायुक्त ने यह भी निर्देश दिए कि निर्माण स्थल पर ट्रांसपोर्टेशन प्लान के अनुसार जीएसबी (Granular Sub Base) कार्य व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित किया जाए, जिससे सामग्री की आवाजाही में सुगमता बनी रहे और कार्य प्रभावित न हो। साथ ही उन्होंने निर्माण स्थल पर बिखरी हुई भवन सामग्री और शटरिंग को सुव्यवस्थित ढंग से रखने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को रोका जा सके।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, समयबद्धता और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। सभी कार्य तकनीकी मानकों के अनुसार ही पूर्ण किए जाएं और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर संयुक्त विकास आयुक्त उमेशमणि त्रिपाठी, एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रशांत गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी अरुण श्रीवास्तव, पीडब्ल्यूडी सहायक अभियंता किशोर कुमार, अवर अभियंता स्वदेश कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
