आगरा: डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय (DBRAU), आगरा की ओर से यह सूचित किया जाता है कि ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग (DJMC) में आयोजित ‘रिमैजिनिंग न्यूज राइटिंग इन द डिजिटल एज’ विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में विश्वविद्यालय की जनसंपर्क अधिकारी एवं मल्टीमीडिया एक्सपर्ट पूजा सक्सेना ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में महत्वपूर्ण सत्र प्रदान किया। यह सत्र आगरा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

इस राष्ट्रीय कार्यशाला में डिजिटल पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, मोबाइल जर्नलिज्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), प्रभावी संवाद कौशल और आधुनिक मीडिया तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा ने की। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता विकसित करने और नए मीडिया टूल्स के उपयोग में दक्ष बनने के लिए प्रेरित किया।

कार्यशाला में अपने विशेषज्ञ सत्र के दौरान पूजा सक्सेना ने कहा कि आज पत्रकारिता केवल घटनाओं को प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका प्रभाव (Impact) सामने लाना ही उसकी वास्तविक पहचान बन गया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में खबरें तेजी से बदलते स्वरूप में सामने आ रही हैं, इसलिए पत्रकारों को अपनी लेखन शैली, प्रस्तुति और सोच में बदलाव लाना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज पत्रकारिता में इवेंट नहीं, इम्पैक्ट कवर करना जरूरी है।

उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति लेखन की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक प्रभावी प्रेस विज्ञप्ति केवल औपचारिक जानकारी नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें स्पष्टता के साथ यह भी होना चाहिए कि “क्या हुआ, उसका क्या महत्व है और आगे उसका प्रभाव क्या होगा।” उन्होंने “What, So What, Now What” के सिद्धांत को प्रभावी पत्रकारिता का आधार बताया।

इसके साथ ही उन्होंने नकारात्मक खबरों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने और हर परिस्थिति में बैकअप रिपोर्टिंग तैयार रखने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल मीडिया के युग में पत्रकारों को मल्टीमीडिया टूल्स, मोबाइल जर्नलिज्म और एआई आधारित तकनीकों की समझ होना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला में कम्युनिकेशन एवं स्पीच एक्सपर्ट ने वॉइस कल्चर और उच्चारण की शुद्धता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक पत्रकार की पहचान उसकी स्पष्ट और प्रभावशाली आवाज से होती है। उन्होंने छोटे वाक्यों, सही ठहराव (Pause) और भावनात्मक संतुलन के साथ अभिव्यक्ति देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी बताया कि आज एक औसत व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 150 मिनट डिजिटल कंटेंट का उपभोग करता है, ऐसे में पत्रकारों के लिए अपनी प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाना बेहद जरूरी है।
इस अवसर पर डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने अपने संदेश में कहा कि इस प्रकार के नॉलेज एक्सचेंज कार्यक्रम विश्वविद्यालयों के बीच ज्ञान, अनुभव और तकनीकी समझ के आदान-प्रदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को आधुनिक मीडिया की दिशा और तकनीकी विकास को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को समझने के लिए ऐसे आयोजन समय की आवश्यकता हैं।
कुलपति ने आयोजन संस्थान को सफल कार्यशाला के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक सहयोग से विद्यार्थियों के कौशल विकास को नई दिशा मिलती है और वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो पाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. रुचिता चौधरी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी रही, जिसमें उन्हें डिजिटल पत्रकारिता के व्यावहारिक पक्षों को समझने का अवसर मिला। इस अवसर पर डॉ. शचींद्र शेखर, डॉ. काजिम रिजवी, डॉ. नसीब, डॉ. श्वेता सहित अन्य शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। समापन पर प्रश्न-उत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने डिजिटल मीडिया से जुड़ी अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

