फतेहाबाद। भक्ति और अध्यात्म का अनुभव कभी केवल धार्मिक कर्तव्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानव जीवन में सांत्वना, धैर्य और नैतिक प्रेरणा का स्रोत बनता है। ऐसा ही अनुभव रविवार को बाह रोड स्थित लक्ष्मी नारायण उदासीन आश्रम, बाबा की तिबरिया में देखने को मिला, जहां चल रही श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालु पौराणिक कथाओं और भगवान के अवतारों की अद्भुत झांकियों में पूरी तरह डूब गए।

कथा पांडाल में कथा व्यास श्रीकृष्ण दीक्षित महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भक्त प्रह्लाद के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि हिरण्यकश्यप के अत्याचारों के बावजूद प्रह्लाद का अटूट विश्वास ही था जिसने भगवान को नृसिंह अवतार में प्रकट होने पर विवश कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने समुद्र मंथन के प्रसंग के माध्यम से जीवन में धैर्य, संघर्ष और लोक कल्याण के लिए विषपान करने की प्रेरणा दी। कथा व्यास ने वामन अवतार का संदेश देते हुए बताया कि अहंकार का दान ही सबसे बड़ा दान है और वही मनुष्य को सच्ची मुक्ति और समाज के लिए उपकार देता है
जैसे ही कथा में श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का वर्णन किया गया तो पूरा पांडाल परिसर नंद के आनंद से गूंज उठा। भक्तों ने जयकारों के साथ जय कन्हैया लाल की का उद्घोष किया और वातावरण पूरी तरह भक्ति रस में डूब गया। कथा के दौरान वासुदेव द्वारा कान्हा को टोकरी में लेकर यमुना पार करने का दृश्य दिखाया गया, जिसने भक्तों को त्रेता और द्वापर युग की याद दिलाई और उनके हृदय में गहरी श्रद्धा और स्नेह भर दिया।
कथा पांडाल में मौजूद श्रद्धालु भजनों पर नृत्य करते रहे, पुष्प वर्षा की और जन्मोत्सव की खुशियों को हर्षोल्लास के साथ मनाया। कथा व्यास श्रीकृष्ण दीक्षित महाराज ने स्पष्ट किया कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप है, और जो मनुष्य इसे श्रद्धापूर्वक श्रवण करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के कष्ट मिट जाते हैं।
इस अवसर पर पांडाल में गिर्राज दीक्षित शास्त्री, आचार्य सुनील उपाध्याय सहित अन्य प्रमुख विद्वान उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि भागवत कथा न केवल धार्मिक शिक्षाओं का संकलन है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों, धैर्य, त्याग और भक्ति का अद्भुत संदेश भी देती है। कथा पांडाल में सजाई गई झांकियों और प्रसंगों ने प्रत्येक व्यक्ति को भावविभोर कर दिया और उन्होंने भगवान की महिमा का गुणगान करते हुए आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।

