वृंदावन के रेडिसन होटल से गोवर्धन पहुंचीं राष्ट्रपति, गोल्फ कार्ट से परिक्रमा के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
दानघाटी मंदिर में दूध, दही, रबड़ी, शहद, घी और बूरा से किया गिरिराज जी का अभिषेक, सुगंधित इत्र अर्पित कर की पूजा
मंदिर रिसीवर व सेवायतों की मौजूदगी में हुआ पारंपरिक स्वागत, रेडिसन होटल में ODOP स्टॉल का अवलोकन कर ली जानकारी
मथुरा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने मथुरा प्रवास के अंतिम दिन गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर में पहुंचकर गिरिराज जी के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना कर अभिषेक किया। राष्ट्रपति ने पारंपरिक वैदिक विधि-विधान के अनुसार दूध, दही, रबड़ी, शहद, घी और बूरा से गिरिराज जी का अभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने सुगंधित इत्र अर्पित कर अपनी आस्था व्यक्त की। मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण के बीच यह आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ।

दानघाटी मंदिर में राष्ट्रपति के आगमन पर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। मंदिर रिसीवर ललित पुरोहित सहित सेवायत दीपू पुरोहित, सीताराम शर्मा, कुलदीप कौशिक, बलदेव पुरोहित, बांके बिहारी पुरोहित, सत्यप्रकाश पुरोहित, अजय कौशिक, मनमोहन कौशिक एवं लेखाधिकारी त्रिभुवन कौशिक सहित अन्य पदाधिकारी और सेवायत मौजूद रहे। सभी ने मिलकर राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और पूजा-अर्चना के दौरान सहयोग प्रदान किया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और उत्सुकता का माहौल देखने को मिला।

राष्ट्रपति के आगमन को लेकर दानघाटी मंदिर और आसपास के क्षेत्र को विशेष रूप से सजाया गया था। मंदिर में गिरिराज जी का भव्य फूलों से श्रृंगार किया गया था। साथ ही गोवर्धन क्षेत्र के तिराहा और चौराहों को रंग-बिरंगी लाइटों और सजावट से आकर्षक बनाया गया था। प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे राष्ट्रपति का कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके।

पूजा-अर्चना के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गोवर्धन की सात कोसीय परिक्रमा भी की। उन्होंने परिवार के साथ गोल्फ कार्ट के माध्यम से लगभग 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा प्रारंभ की। परिक्रमा मार्ग पर प्रशासन द्वारा विशेष निगरानी रखी गई थी और पूरे रास्ते को सुव्यवस्थित किया गया था।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था और विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया गया था। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला, जो राष्ट्रपति की उपस्थिति से प्रेरित थे।

इससे पहले राष्ट्रपति वृंदावन स्थित रेडिसन होटल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुईं, जहां उन्होंने एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) के अंतर्गत लगाए गए स्टॉल का अवलोकन किया।

इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने राष्ट्रपति को ODOP के तहत तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी। विशेष रूप से ठाकुर जी की पोशाक और जनपद की कारागार (जेल) में बंदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया।
स्टॉल में साड़ी, दुपट्टा, शॉल, तौलिया सहित राधा-कृष्ण के वस्त्र और श्रृंगार सामग्री प्रदर्शित की गई थी। राष्ट्रपति ने इन उत्पादों का अवलोकन किया और उनकी गुणवत्ता व कारीगरी की सराहना की। यह पहल स्थानीय कारीगरों और बंदियों के कौशल को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रेडिसन होटल में इस अवसर पर राष्ट्रपति के साथ उपस्थित अधिकारियों के साथ सामूहिक छायाचित्र भी लिया गया, जो इस कार्यक्रम की स्मृति के रूप में दर्ज हुआ।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मथुरा दौरा धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहा। इससे पूर्व उन्होंने वृंदावन में संत प्रेमानंद के आश्रम में पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी। इस दौरान संत प्रेमानंद ने ‘राधे-राधे’ कहकर उनका अभिवादन किया, जिसे राष्ट्रपति ने हाथ जोड़कर स्वीकार किया। आश्रम में संतों द्वारा पारंपरिक तरीके से माला और चुनरी ओढ़ाकर उनका स्वागत किया गया। राष्ट्रपति ने संत प्रेमानंद को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं भी दीं, जो एक दिन पहले 19 मार्च को मनाया गया था।

यह यात्रा राष्ट्रपति के उत्तर प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे का हिस्सा रही, जिसकी शुरुआत अयोध्या से हुई थी, जहां उन्होंने रामलला के दर्शन किए थे। इसके बाद वे मथुरा पहुंचीं और विभिन्न धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया। यह उनका मथुरा का दूसरा दौरा भी रहा, इससे पहले वह पिछले वर्ष 25 सितंबर को यहां आ चुकी हैं और बांके बिहारी मंदिर में दर्शन कर चुकी हैं।
गोवर्धन की परिक्रमा और दानघाटी मंदिर में अभिषेक के साथ संपन्न यह दौरा धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति उनके जुड़ाव को दर्शाता है। साथ ही ODOP स्टॉल के अवलोकन के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को प्रोत्साहन देने का संदेश भी इस यात्रा में शामिल रहा। प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे कार्यक्रम को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं, जिनके परिणामस्वरूप यह आयोजन सुचारु रूप से सम्पन्न हुआ।
