आगरा। भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार को संजय प्लेस स्थित प्रशासनिक कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय स्टेट बैंक कर्मचारी महासंघ के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में शहर की विभिन्न शाखाओं से पहुंचे सैकड़ों कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। कर्मचारियों ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने, पर्याप्त भर्ती करने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव को खत्म करने की मांग उठाई। साथ ही चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर 25 और 26 मई को देशव्यापी दो दिवसीय हड़ताल की जाएगी।

सोमवार दोपहर करीब 1:45 बजे भारतीय स्टेट बैंक की विभिन्न शाखाओं से कर्मचारी संजय प्लेस स्थित प्रशासनिक कार्यालय पहुंचे और केंद्र सरकार तथा बैंक के उच्च प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने भोजनावकाश के दौरान सामूहिक प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए उप महासचिव गजेंद्र सिंह ने कहा कि बैंकों में स्थाई प्रकृति के कार्यों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था को तुरंत बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती गलत वित्तीय योजनाओं की बिक्री और लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली से कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। इसका असर कर्मचारियों की कार्यक्षमता और ग्राहकों को मिलने वाली सेवाओं पर भी पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि बैंक शाखाओं में कर्मचारियों और ग्राहकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
सहायक महासचिव सुरेश बाबू ने कहा कि बैंक शाखाओं में कर्मचारियों की भारी कमी है। कार्यभार के अनुपात में कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने से कर्मचारियों को अतिरिक्त दबाव में काम करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शाखाओं में पर्याप्त कर्मचारियों, संदेशवाहकों और सुरक्षा कर्मियों की तत्काल भर्ती की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले 29 वर्षों से संदेशवाहक संवर्ग में कोई भर्ती नहीं हुई है। वहीं वर्ष 2022 में सुरक्षा कर्मियों की भर्ती इतनी सीमित संख्या में की गई कि उसका कोई विशेष प्रभाव दिखाई नहीं दिया।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बैंक प्रबंधन स्थाई कर्मचारियों की जगह आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर निर्भरता बढ़ा रहा है। संगठन का कहना है कि इससे रोजगार की स्थिरता प्रभावित हो रही है और बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। कर्मचारियों ने मांग की कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर नियमित और स्थाई कर्मचारियों की भर्ती की जाए।
प्रदर्शन के दौरान वर्ष 2019 या उसके बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरण की सुविधा बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। कर्मचारियों का कहना है कि इस सुविधा के अभाव में कई कर्मचारी पारिवारिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। संगठन ने कहा कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण नीति में सुधार जरूरी है।
इसके साथ ही कर्मचारियों ने पदोन्नति और सेवा उन्नयन योजना की विसंगतियों को दूर करने तथा उसकी समीक्षा की मांग की। कर्मचारियों का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में कई कर्मचारियों को पदोन्नति और कैरियर विकास के समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन में गजेंद्र सिंह, सुरेश बाबू, आनंद चतुर्वेदी, शुभम वर्मा, शब्बीर हसन और जगजीत सिंह समेत सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और कहा कि बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान जरूरी है।
प्रदर्शन के अंत में संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर बैंकिंग सेवाओं और ग्राहकों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा, अन्यथा 25 और 26 मई की देशव्यापी हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
