आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के खंदारी परिसर स्थित होम साइंस गर्ल्स हॉस्टल में ‘मिशन शक्ति’ अभियान के तहत अग्नि सुरक्षा एवं बचाव प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। फायर स्टेशन टीम ने छात्राओं को आग से सुरक्षा के व्यावहारिक तरीके, फायर एक्सटिंग्विशर का उपयोग और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की तकनीकें सिखाईं। लाइव डेमो के माध्यम से छात्राओं में आत्मविश्वास और सतर्कता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के महिला प्रकोष्ठ द्वारा ‘मिशन शक्ति’ अभियान के अंतर्गत रविवार को खंदारी परिसर स्थित होम साइंस गर्ल्स हॉस्टल में आग से सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन पर केंद्रित विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम कुलपति प्रो. आशु रानी के निर्देशन में संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य छात्राओं को जोखिम की स्थिति में सही निर्णय लेने, सुरक्षित रहने और दूसरों की सहायता करने के लिए तैयार करना था।

कार्यशाला में फायर स्टेशन से पहुंचे अधिकारी सोमदत्त सोनकर और उनकी टीम ने तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आग लगने की घटनाएं अक्सर छोटी लापरवाही या गलत उपयोग से शुरू होती हैं, लेकिन समय रहते सही कदम उठाकर बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को यह समझाया गया कि बिजली के शॉर्ट सर्किट, गैस रिसाव और रसायनों से उत्पन्न आग अलग-अलग प्रकार की होती है और हर स्थिति में प्रतिक्रिया का तरीका भी अलग होता है। टीम ने बताया कि घबराहट किसी भी आपात स्थिति को और गंभीर बना देती है, इसलिए शांत रहकर सही प्रक्रिया अपनाना जरूरी है।

इसके बाद छात्राओं को फायर एक्सटिंग्विशर और अन्य अग्निशमन उपकरणों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि किस स्थिति में कौन सा उपकरण उपयोग किया जाता है और उसका सही उपयोग कैसे किया जाए। छात्राओं ने उपकरणों को करीब से देखा और उनके कार्य करने की प्रक्रिया को समझा।
कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लाइव डेमो रहा, जिसमें फायर ब्रिगेड टीम ने वास्तविक परिस्थितियों में आग बुझाने की तकनीक का प्रदर्शन किया। इसके बाद छात्राओं को स्वयं अभ्यास करने का अवसर दिया गया। कई छात्राओं ने फायर एक्सटिंग्विशर का उपयोग कर आग बुझाने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इस अभ्यास ने उनके आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि की।
कार्यक्रम में महिला प्रकोष्ठ की समन्वयक और मिशन शक्ति की सह-नोडल अधिकारी प्रो. अर्चना सिंह ने कहा कि आज के समय में शिक्षा के साथ सुरक्षा जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्राओं को केवल अकादमिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक और व्यावहारिक रूप से भी मजबूत बनाना है।
महिला प्रकोष्ठ की सह-समन्वयक डॉ. नीलम यादव ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्राओं को जीवन के वास्तविक जोखिमों के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता तभी संभव है जब व्यक्ति किसी भी स्थिति में सही निर्णय लेने में सक्षम हो।
कार्यक्रम में डॉ. रत्ना पांडेय सहित हॉस्टल वार्डन और कर्मचारी भी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और प्रशिक्षण को ध्यानपूर्वक समझा।
फायर ब्रिगेड टीम ने यह भी बताया कि अधिकतर दुर्घटनाएं जानकारी की कमी और लापरवाही के कारण होती हैं। यदि लोग शुरुआती स्तर पर ही सही कदम उठा लें तो बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है।
छात्राओं ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें वास्तविक जीवन में आने वाली आपात स्थितियों का सामना करने का आत्मविश्वास मिला है। कई छात्राओं ने कहा कि उन्होंने पहली बार फायर सेफ्टी उपकरणों का इतना व्यावहारिक उपयोग सीखा है।
कार्यशाला के अंत में यह संदेश दिया गया कि सुरक्षा केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक जागरूकता का विषय है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगे भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही, ताकि छात्राएं हर परिस्थिति में सजग और सुरक्षित रह सकें।
