आगरा। आगरा में राष्ट्रीय चम्बल सैंक्चुरी क्षेत्र में अवैध बालू खनन को लेकर फैलाई जा रही खबरों पर वन विभाग ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करते हुए इन्हें भ्रामक बताया है। उप वन संरक्षक चांदनी सिंह ने कहा कि सैंक्चुरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के यांत्रिकृत अवैध खनन के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं और न ही यहां कोई खनन पट्टा स्वीकृत है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में लगातार ड्रोन, बोट पेट्रोलिंग, वॉच टावर और संयुक्त गश्त के माध्यम से निगरानी की जा रही है तथा सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले से जोड़कर फैलाई जा रही अफवाहों को भी उन्होंने पूरी तरह निराधार बताया।

राष्ट्रीय चम्बल सैंक्चुरी क्षेत्र में अवैध बालू खनन को लेकर पिछले कुछ दिनों से विभिन्न माध्यमों और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबरों पर वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्थिति स्पष्ट की है। उप वन संरक्षक चांदनी सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित SUO MOTO WRIT PETITION (CIVIL) NO 2 OF 2026 के संदर्भ में कुछ असत्य और भ्रामक सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि चम्बल सैंक्चुरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर यांत्रिकृत खनन हो रहा है, जबकि यह पूरी तरह गलत और तथ्यहीन है।
उन्होंने बताया कि जनपद आगरा के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय चम्बल वन्य जीव विहार क्षेत्र की सीमा में किसी भी प्रकार का संगठित या यांत्रिकृत बालू खनन नहीं पाया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में कभी-कभार स्थानीय लोग अपनी घरेलू या निजी आवश्यकता के लिए ऊँटों और ट्रैक्टरों के माध्यम से सीमित मात्रा में बालू उठाते हैं, जिन मामलों में विभाग द्वारा समय-समय पर कार्रवाई भी की जाती है।
वन विभाग के अनुसार, अवैध बालू खनन और परिवहन की रोकथाम के लिए एक जनपद स्तरीय खनन टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर निगरानी कर रही है। इसके साथ ही नियमित अंतराल पर समन्वय बैठकें भी आयोजित की जाती हैं, जिनमें विभिन्न विभागों के अधिकारी संयुक्त रूप से समीक्षा कर आगे की रणनीति तय करते हैं।
उप वन संरक्षक ने बताया कि चम्बल सैंक्चुरी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। ड्रोन कैमरों के माध्यम से नदी क्षेत्र की निगरानी की जा रही है, वहीं बोट पेट्रोलिंग के जरिए नदी के अंदरूनी हिस्सों पर नजर रखी जाती है। इसके अलावा वॉच टावर और मॉनिटरिंग स्टेशनों से भी पूरे क्षेत्र की लगातार निगरानी होती है। संवेदनशील इलाकों में बाइनोक्युलर से भी गश्त की जा रही है ताकि किसी भी गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने बताया कि हाल ही में चम्बल नदी क्षेत्र का उच्च स्तरीय निरीक्षण किया गया, जिसमें सीईसी के सदस्य द्वारा भी क्षेत्र का अवलोकन किया गया। इस निरीक्षण में उत्तर प्रदेश सीमा के अंतर्गत किसी भी प्रकार के यांत्रिकृत अवैध बालू खनन के साक्ष्य नहीं पाए गए। यह रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन की कोई गतिविधि नहीं चल रही है।
चांदनी सिंह ने स्पष्ट किया कि जनपद आगरा की सीमा में स्थित राष्ट्रीय चम्बल सैंक्चुरी क्षेत्र में न तो कोई खनन पट्टा स्वीकृत है और न ही किसी प्रकार का औद्योगिक खनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो भी खबरें इसके विपरीत प्रसारित हो रही हैं, वे पूरी तरह भ्रामक हैं और जनता को भ्रमित करने वाली हैं।
वन विभाग ने आम नागरिकों और मीडिया से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट या भ्रामक खबर पर विश्वास न करें और न ही ऐसी जानकारी को आगे साझा करें। विभाग ने कहा कि चम्बल सैंक्चुरी एक संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र है, जिसकी सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाते हैं। विभाग ने यह भी भरोसा दिलाया कि निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को पूरी तरह रोका जा सके।
फिलहाल पूरे चम्बल सैंक्चुरी क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और वन विभाग, प्रशासन एवं सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्कता के साथ कार्य कर रही हैं।
