आगरा। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने आमजन से अपील की है कि वे निक्षय मित्र बनकर देशहित में टीबी मरीजों की सहायता करें। डॉ. गुप्ता ने एक ऑडियो संदेश जारी कर बताया कि टीबी कोई अभिशाप नहीं, बल्कि पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है। सही जांच और पूर्ण उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। सरकार टीबी की जांच और दवा मुफ्त देती है, लेकिन कुछ मरीज ठीक नहीं हो पाते हैं। इसका कारण शरीर की कमजोरी, सही भोजन की कमी और सामाजिक सहारे का अभाव है।
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| डॉ. सुखेश गुप्ता |
निक्षय मित्र योजना: टीबी मरीजों की मदद का माध्यम
भारत सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए निक्षय मित्र योजना शुरू की है। निक्षय का अर्थ है टीबी से मुक्ति और मित्र का मतलब दोस्त। जो व्यक्ति टीबी मरीजों को उनके इलाज में सहायता करता है, उसे निक्षय मित्र कहा जाता है।
कौन बन सकता है निक्षय मित्र
डॉ. गुप्ता ने बताया कि निक्षय मित्र व्यक्तिगत, संस्थागत और कॉर्पोरेट तीन प्रकार के हो सकते हैं:
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व्यक्तिगत निक्षय मित्र: शिक्षक, डॉक्टर, छात्र, समाजसेवी या कोई भी संवेदनशील नागरिक जो अपनी क्षमता के अनुसार मरीजों की मदद कर सकता है।
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संस्थागत निक्षय मित्र: स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, धार्मिक, सामाजिक संगठन और सामुदायिक समूह।
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कॉर्पोरेट निक्षय मित्र: कंपनियां, जो CSR फंड के माध्यम से टीबी मरीजों की सहायता करें।
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सार्वजनिक निक्षय मित्र: सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक उपक्रम और शैक्षणिक संस्थान भी इस योजना में भाग ले सकते हैं।
मदद कैसे कर सकते हैं
डॉ. गुप्ता ने कहा कि मदद बड़ी होना जरूरी नहीं है। हर महीने टीबी मरीज को थोड़ा पौष्टिक भोजन जैसे मूंगफली, दाल, भुना चना, सरसों का तेल और तिल देना काफी है। साथ ही मरीज के दवा लेने की निगरानी करने से उसे हिम्मत मिलती है और दवा प्रभावी होती है।
निक्षय पोर्टल के माध्यम से सहयोग
निक्षय मित्र योजना निक्षय पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाती है, जिससे मदद सही मरीज तक पहुंच सके। स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ता और टीबी स्टाफ मिलकर इस योजना को सफल बना रहे हैं। आज हजारों टीबी मरीज निक्षय मित्र की मदद से पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं। टीबी से स्वस्थ होकर बच्चे स्कूल लौट रहे हैं और परिवारों में खुशियां लौट रही हैं।
सबकी जिम्मेदारी, सिर्फ सरकार की नहीं
डॉ. गुप्ता ने कहा, “टीबी से लड़ाई सिर्फ सरकार की नहीं है, यह सबकी जिम्मेदारी है। आइए हम सब मिलकर निक्षय मित्र बनें, क्योंकि इलाज दवा से होता है, लेकिन जीत इंसानियत से होती है।”
निक्षय मित्र कैसे बनें
डॉ. गुप्ता ने आमजन से कहा कि वे निक्षय मित्र बनने के लिए अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, आशा कार्यकर्ता या टीबी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही, निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण करके भी निक्षय मित्र बन सकते हैं।
वे कहते हैं, “आप एक मरीज के निक्षय मित्र बनें या कई मरीजों के लिए मदद करें, आपका सहयोग कीमती है। आज ही संकल्प लें और कम से कम एक टीबी मरीज की सहायता करने का संकल्प लें।”
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