आगरा। मंगलवार को कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के हिंदी विभाग द्वारा विद्यापीठ के सूरकक्ष में प्रातः 12:30 बजे से माननीय कुलपति महोदय के दिशा-निर्देशन में संचालित अंतरराष्ट्रीय प्रसार व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘कैनेडा में हिंदी : दशा एवं दिशा’ विषय पर प्रसार व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विद्यापीठ के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने अतिथियों का स्वागत किया और विषय आधारित बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय अतिथियों को, जो भारत से बाहर रहकर साहित्य-सृजन में संलग्न हैं, उन्हें आमंत्रित कर विदेशों में हिंदी की स्थिति को जानना ही इस प्रसार व्याख्यानमाला का उद्देश्य है।”
मुख्य वक्ता के रूप में हिंदी राइटर्स गिल्ड, कैनेडा की सह-संस्थापिका, निदेशिका एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शैलजा सक्सेना ने कैनेडा में हिंदी की दशा और दिशा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से कैनेडा में भारतीय संस्कृति और हिंदी के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं। उनका कहानी संग्रह ‘लेबनान की रात तथा अन्य कहानियाँ’ तथा कविता संग्रह ‘क्या तुमको भी ऐसा लगा?’, ‘अष्टाक्षर’ और ‘काव्योत्पल’ प्रकाशित हो चुके हैं। वे हिंदी अनुवाद और संपादन के क्षेत्र में भी निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्हें मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, सरस्वती सम्मान, वुमैन अचीवर अवार्ड 2018 और वुमैन हीरो अवार्ड 2021 सहित अनेक सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है।
अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा, “आज हिंदी केवल रोजगार की भाषा नहीं, बल्कि जीवन को परिष्कृत करने की भाषा भी है। यदि हम किसी भाषा को केवल रोजगार से जोड़ देंगे तो उसकी मूल आत्मा से नहीं जुड़ पाएंगे। भाषा की मूल संवेदना और संस्कार ही हमें आगे ले जाते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि विदेश में रहकर भारतीयता के और करीब आने का अनुभव होता है। कैनेडा में मंदिर सांस्कृतिक केंद्र के रूप में कार्य करते हैं, जहां वैदिक ज्ञान, नीति ज्ञान, तबला और हारमोनियम की शिक्षा भी दी जाती है। वहां हिंदी एक औपचारिक विषय के रूप में नहीं पढ़ाई जाती, बल्कि शनिवार और रविवार को हेरिटेज क्लास के रूप में मंदिरों में कक्षाएं संचालित होती हैं। इन कक्षाओं में बच्चों की भागीदारी उनकी रुचि पर आधारित होती है। उन्होंने बताया कि पिछले 18 वर्षों से हिंदी राइटर्स गिल्ड के माध्यम से साहित्य सृजन का कार्य जारी है और टोरंटो के लगभग 60 लेखक सक्रिय रूप से लेखन कर रहे हैं। हाल के वर्षों में हिंदी नाटक पर भी कार्य हो रहा है। गद्य और पद्य दोनों विधाओं में रचनाएं हो रही हैं, जिनमें रंगभेद जैसे सामाजिक विषय भी शामिल हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय हिंदी संस्थान की पूर्व निदेशक तथा शिक्षाशास्त्र की प्रोफेसर और वर्तमान में विद्या भारती के गणेशराम नागर कन्या इंटर कॉलेज में प्रबंधक के दायित्व का निर्वहन कर रहीं प्रो. बीना शर्मा ने कहा, “विदेश में जाकर अपनी भाषा और संस्कृति को बचाए रखना हमारा धर्म है और प्रवासी साहित्यकार इस धर्म का निर्वहन कर रहे हैं, यही सार्थकता है।”
कार्यक्रम के दौरान हिंदी राइटर्स गिल्ड, कैनेडा और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के मध्य समझौता ज्ञापन पर माननीय कुलपति प्रो. आशुरानी, के.एम.आई. के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर तथा संस्था की संस्थापक डॉ. शैलजा सक्सेना ने हस्ताक्षर किए।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं एवं अतिथियों के साथ विद्यापीठ के प्राध्यापकगणों में डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. मोहिनी दयाल, डॉ. रमा ‘रश्मि’, डॉ. शालिनी श्रीवास्तव, डॉ. अंगद, विशाल शर्मा, डॉ. संदीप सिंह, उपेंद्र पचौरी, प्रीती यादव तथा कंचन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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