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AGRA SNMC NEWS: पहली बार एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशन की प्रक्रिया सफल, मरीज को मिला जीवनदान

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न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी और एनेस्थेसिया के एक्सपर्ट डॉक्टर्स का रहा सहयोग

नहीं लगानी होगी दिल्ली-मुंबई की दौड़, आगरा में ही मिलेगी सुविधा बेजोड़

आगरा।आगरा का सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज अब चिकित्सा इतिहास में एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। यहां पहली बार एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है। यह प्रक्रिया, जिसे एंटीरियर कम्युनिकेटिंग आर्टरी एन्यूरिज्म कॉइलिंग के नाम से जाना जाता है, मरीज की जान बचाने वाली जटिल सर्जरी है, जो अब तक आमतौर पर केवल दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े महानगरों के उच्चस्तरीय अस्पतालों में ही संभव हो पाती थी और इसकी लागत लगभग 15 लाख रुपये तक आती थी। लेकिन एसएन मेडिकल कॉलेज के PMSSY विंग में स्थित कार्डियक कैथ लैब में यह उपलब्धि न केवल हासिल की गई, बल्कि इसे आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निशुल्क कर दिखाया गया। इस प्रक्रिया की सफलता ने साबित कर दिया है कि सरकारी संस्थानों में भी विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाएं दी जा सकती हैं और आगरा जैसे शहर के मरीजों को अब राजधानी या अन्य महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा

Agra's SN Medical College successfully performs complex neuro-intervention for the first time. The procedure, previously available only in top metros, is now free under Ayushman Bharat, providing life-saving treatment to local patients
ऑपरेशन के दौरान मौजूद एसएन के एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम

एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम का किया गठन

इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम का गठन किया गया जिसमें न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजी, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, एनेस्थिसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एकजुट होकर काम किया। कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार गुप्ता ने प्रक्रिया का नेतृत्व किया, जबकि न्यूरोसर्जरी विभाग से डॉ. गौरव धाकरे, डॉ. मयंक अग्रवाल और डॉ. तरुणेश शर्मा की भूमिका अहम रही। इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजी में मैक्स नोएडा से जुड़े डॉ. अंशुल जैन का विशेष योगदान रहा जिन्होंने तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया। इसके अलावा इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग से डॉ. पल्लव गुप्ता और एनेस्थिसिया विभाग से डॉ. अतिहर्ष मोहन तथा डॉ. प्रभा ने मरीज की जान को सुरक्षित रखने और ऑपरेशन की सफलता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। इसके साथ ही सभी रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सों और तकनीशियनों की टीम ने इस जटिल और लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया में अभूतपूर्व सहयोग किया।

ये तकनीकी गिने-चुने हॉस्पिटल में ही उपलब्ध

प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह केवल मेडिकल कॉलेज ही नहीं बल्कि पूरे ब्रज क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। उनके अनुसार, इस तरह की उन्नत तकनीक अब तक केवल कुछ गिने-चुने निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध थी और उसकी लागत इतनी अधिक थी कि गरीब और मध्यमवर्गीय मरीज उसका खर्च उठाने में असमर्थ रहते थे। लेकिन आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब वही सुविधा यहां पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हो पाई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में समानता और न्याय सुनिश्चित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि एसएनएमसी के चिकित्सा ढांचे को और मजबूत करेगी और आने वाले वर्षों में न्यूरो-इंटरवेंशन को सुपर सब-स्पेशलिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे न केवल आगरा बल्कि आसपास के जिलों के हजारों मरीजों को जीवनरक्षक इलाज उपलब्ध हो सकेगा।

बेहद जटिल है प्रक्रिया

एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशन प्रक्रिया को लेकर विशेषज्ञ बताते हैं कि यह बेहद जटिल तकनीक है, जिसमें मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में सूक्ष्म स्तर पर हस्तक्षेप करना पड़ता है। एंटीरियर कम्युनिकेटिंग आर्टरी एन्यूरिज्म कॉइलिंग में मस्तिष्क की धमनी में बने एन्यूरिज्म (गुब्बारे जैसी सूजन) को बंद किया जाता है ताकि वह फटकर जानलेवा रक्तस्राव न कर सके। इस प्रक्रिया के लिए उच्चस्तरीय उपकरणों और प्रशिक्षित टीम की जरूरत होती है। यहां तक कि देश के कई बड़े मेडिकल कॉलेजों में भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, लेकिन एसएन कॉलेज ने इसे सफलतापूर्वक कर दिखाया है।

मरीज के परिजनों ने जताया आभार

इस उपलब्धि के साथ ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में और भी जटिल न्यूरो-इंटरवेंशन प्रक्रियाओं को नियमित रूप से शुरू किया जाएगा। इसके लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम, उपकरणों की उपलब्धता और सुपर स्पेशलिटी टीम का विस्तार किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इसका लाभ मिले और किसी भी मरीज को महंगे इलाज के लिए दिल्ली, नोएडा या मुंबई न जाना पड़े।मरीज और उनके परिवार की तरफ से भी मेडिकल कॉलेज की टीम का आभार व्यक्त किया गया। उनका कहना था कि अगर यह सुविधा आगरा में उपलब्ध न होती तो उन्हें लाखों रुपये खर्च करके दिल्ली जाना पड़ता, जो संभव नहीं था। उन्होंने इस जीवनरक्षक इलाज के लिए डॉक्टरों और स्टाफ को भगवान का रूप बताया।

आगरा ही नहीं प्रदेश के लिए गर्व की बात

यह उपलब्धि न केवल एसएन मेडिकल कॉलेज की कार्यकुशलता और समर्पण को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अगर सही संसाधन और सहयोग मिले तो सरकारी अस्पताल भी निजी संस्थानों से किसी भी स्तर पर कमतर नहीं हैं। आगरा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए यह गर्व का क्षण है कि यहां सरकारी स्तर पर इतनी उन्नत चिकित्सा प्रक्रिया को सफल बनाया गया। यह आने वाले समय में एक नया अध्याय लिखेगा और ब्रज क्षेत्र के हजारों मरीजों को नई जिंदगी देने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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