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Agra News:दवा माफिया हिमांशु अग्रवाल गिरफ्तार, STF और ड्रग विभाग की छापेमारी में करोड़ों की दवाएं सील

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आगरा।आगरा का दवा माफिया हिमांशु अग्रवाल अब पुलिस कस्टडी में है। STF और ड्रग विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान यह पता चला है कि हिमांशु और उसके भाई के गोदाम से अब तक लगभग 6.35 करोड़ रुपए की दवाएं सील की जा चुकी हैं। इसके अलावा बंसल मेडिको का आंकड़ा अलग से है।पिछले 15 वर्षों में हिमांशु अग्रवाल ने दवा कारोबार में किस तरह सेटिंग की, कैसे दवाएं बेचता था और कहां दवाएं बनवाई जाती थीं, यह पूरी कहानी अब सामने आई है। STF और ड्रग विभाग की संयुक्त टीम ने पिछले शुक्रवार को सबसे पहले फव्वारा बाजार में ‘हे मां मेडिको’ और ‘बंसल मेडिकल’ एजेंसी के मोतीकटरा स्थित गोदामों को सील किया।

बंसल मेडिको पर जांच करती विभागीय टीम

एसटीएफ इंस्पेक्टर एक करोड़ रिश्वत देने की हुई थी कोशिश

हे मां मेडिको के संचालक हिमांशु अग्रवाल ने एसटीएफ इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा को एक करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश की। अधिकारियों ने रकम मंगवाई और उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। इसके खिलाफ एंटी करप्शन का मुकदमा दर्ज किया गया।सहायक औषधि आयुक्त नरेश मोहन की तहरीर पर हिमांशु सहित छह अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इसमें शामिल हैं विक्की कुमार (एलडीए कालोनी, लखनऊ) सुभाष कुमार (आलमबाग, लखनऊ) यूनिस (सुल्तानपुरा, आगरा) वारिस (सुल्तानपुरा, आगरा)फरहान (लड़ामदा पथौली, आगरा) हिमांशु को मेरठ जेल भेजा गया है।

अंतरराज्यीय हो रही थी सप्लाई

करीब दो महीने पहले “सनौफी” नामक दवा कंपनी ने शासन स्तर पर शिकायत की। STF को पता चला कि हिमांशु पुडुचेरी से ट्रेन के जरिए नकली दवा मंगा रहा था। पहली बार कार्रवाई से पहले सूचना लीक हो गई, जिससे माल गायब कर दिया गया।दूसरी बार लखनऊ से विशेष टीम बनाई गई और हिमांशु का सिंडिकेट पकड़ने की योजना बनाई गई। विभाग के अनुसार हिमांशु दक्षिण के बड़े दवा माफिया राजा सिंह के साथ मिलकर नकली दवाएं नेपाल, बांग्लादेश और 12 अन्य राज्यों में सप्लाई कर रहा था।चेन्नई से ट्रेन के जरिए आगरा लाई जाने वाली दवाओं को आगरा से ट्रांसपोर्ट के जरिए अन्य राज्यों में भेजा जाता था। पुडुचेरी स्थित मीनाक्षी फार्मा से 10 लाख के बिल के साथ 87 लाख रुपए की नकली दवा भेजी गई थी।

हिमांशु का कारोबार मॉडल और लॉजिस्टिक नेटवर्क

सूत्रों के अनुसार, हिमांशु अग्रवाल 15 साल पहले आगरा का एक छोटा दवा सप्लायर था। चचेरे भाई बबलू के साथ उसने “बबलू दवाई” नाम से दवा व्यापार शुरू किया। दक्षिण के राजा सिंह के साथ संपर्क में रहते हुए वह कंपनी से 100 डिब्बे मंगवाता और पुडुचेरी में 1000 डिब्बे बनवाता। दवाओं के बिल और वास्तविक स्टॉक में अंतर रखा जाता था। रेलवे स्टेशन पर माल लोड और अनलोड करने के लिए पूरा गैंग काम करता था। हर रेलवे स्टेशन पर महीनेदारी की जाती थी और हिमांशु का यह नेटवर्क नेपाल, बांग्लादेश और 12 राज्यों तक फैल गया।

फर्म और व्यापार की रणनीति

हिमांशु ने तीन अलग-अलग फर्म खोली:

  1. हे मां मेडिको (मोतीकटरा और मुबारक महल में)
  2. केएनके फार्मा प्राइवेट लिमिटेड (अमिता अग्रवाल के नाम पर)
  3. बंसल मेडिकल

इन फर्मों के जरिए उसने सरकारी विभागों की नजर से अपना टर्नओवर कम दिखाया। चेन्नई और पुडुचेरी से दवाएं मंगाई जाती थीं, रीलैबल की जाती थीं और नेपाल व बांग्लादेश समेत 12 राज्यों में सप्लाई की जाती थीं।

कर्मयोगी इनक्लेव एक्सटेंशन में हिमांशु का आलीशान मकान है, जिसकी कीमत लगभग 3 करोड़ रुपए बताई जाती है। आसपास के लोग बताते हैं कि वह बड़े आलीशान गाड़ियों में आता-जाता था।हिमांशु ने 2019 में कर्मयोगी इनक्लेव में शिफ्ट किया। पहले बल्केश्वर इलाके की संगम विहार कॉलोनी में रहता था। चचेरे भाई बबलू के साथ मिलकर बैन दवाओं का कारोबार शुरू किया।हिमांशु का नेटवर्क लगभग मल्टीनेशनल कंपनी की तरह काम करता था। प्रत्येक स्तर के लिए मैनेजर, सीनियर मैनेजर और ऑपरेटिंग ऑफिसर थे। चेन्नई से आगरा तक और वहां से अन्य राज्यों में सप्लाई का पूरा काम यह गैंग संभालता था।1 साल में 450 करोड़ रुपए की दवा सप्लाई करने वाला हिमांशु अब STF की गिरफ्त में है।

STF की कार्रवाई और गिरफ्तारी की पूरी कहानी

22 अगस्त को आगरा में STF और ड्रग विभाग ने छापेमारी की। टीम ने हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल स्टोर के गोदामों में साढ़े 3 करोड़ की दवाएं बरामद की।हिमांशु अग्रवाल ने छापेमारी के बाद मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। उसने STF इंस्पेक्टर से 1 करोड़ की रिश्वत देने का ऑफर किया। 4 घंटे में नोट इकट्ठा कर तीन बैग में लेकर पहुंचा, लेकिन STF ने मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया। नोटों की गिनती में पता चला कि आधे नोट गीले थे, शायद जमीन में छिपाए गए थे।गोदामों से 5 बड़ी कंपनियों की नकली दवाएं बरामद हुईं। इनमें कई लाइफ-सर्विंग ड्रग शामिल थीं। दवाओं पर फर्जी QR कोड लगाए गए थे, ताकि असली दवा जैसी दिखें।गोदामों से 5 बड़ी कंपनियों की नकली दवाएं बरामद हुईं: ग्लेनमार्क,सन फार्मा,जाइडस,सनोफी,USB कंपनियों के नाम शामिल हैं|

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