आगरा। सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC), आगरा में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भावपूर्ण एवं श्रद्धापूर्ण वातावरण में मनाया गया। 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले, विस्थापित होने वाले और अपार यातनाएं सहने वाले लाखों देशवासियों के संघर्ष एवं बलिदान को याद करते हुए विद्यार्थियों ने मार्मिक नाटिका प्रस्तुत की। नाटिका में बेघर होने की त्रासदी और परिवारों के बिछड़ने की पीड़ा का सजीव चित्रण किया गया, जिससे सभागार में मौजूद डॉक्टरों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की आंखें नम हो गईं। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर दिए गए संदेश को उपस्थित लोगों के सामने पढ़कर सुनाया। कार्यक्रम के अंत में विभाजन में जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों की आत्मशांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई और विद्यार्थियों के सामूहिक ‘वंदे मातरम’ गान से पूरा सभागार राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया।
सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान सामने आई मानवीय त्रासदी को याद करना और उस दौर में जान गंवाने वाले तथा विस्थापन एवं यातनाओं का सामना करने वाले लोगों को श्रद्धापूर्वक नमन करना रहा। कार्यक्रम में चिकित्सकों, शिक्षकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने विभाजन की त्रासदी से सीख लेते हुए देश में एकता, सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और अखंडता को मजबूत करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन के बाद मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग एवं एमबीबीएस छात्र-छात्राओं ने मार्मिक नाटिका प्रस्तुत की। विद्यार्थियों ने अभिनय के माध्यम से विभाजन के उस दर्दनाक दौर को मंच पर जीवंत करने का प्रयास किया, जब बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था। नाटिका में बेघर होने की त्रासदी, परिवारों के बिछड़ने की पीड़ा और उस समय आम नागरिकों के सामने आई कठिन परिस्थितियों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया।
विद्यार्थियों की प्रस्तुति में विभाजन के दौरान लोगों की भावनात्मक और सामाजिक पीड़ा को प्रमुखता से सामने रखा गया। नाटिका के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया कि ऐतिहासिक घटनाओं का सबसे गहरा प्रभाव आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। घर, परिवार और परिचित परिवेश से अचानक दूर होने की पीड़ा को विद्यार्थियों ने अभिनय के जरिए प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया। नाटिका के दौरान सभागार का माहौल गंभीर और भावुक हो गया। प्रस्तुति समाप्त होने के बाद भी कुछ समय तक विभाजन की त्रासदी और उसके मानवीय प्रभावों को लेकर वातावरण संवेदनशील बना रहा। डॉक्टरों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की आंखें भी नम नजर आईं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर दिए गए विशेष संदेश को उपस्थित संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों के समक्ष पढ़कर सुनाया। उन्होंने प्रधानमंत्री के संदेश के माध्यम से विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए उस दौर के पीड़ितों के संघर्ष और साहस को नमन किया।
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने प्रधानमंत्री के संदेश को साझा करते हुए कहा कि विभाजन का दौर इतिहास का ऐसा क्षण था, जिसने अनेक जिंदगियों को तहस-नहस कर दिया, परिवारों को उखाड़ फेंका और असहनीय पीड़ा दी। इसके बावजूद उस दौर के लोगों ने विपरीत परिस्थितियों से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने कहा कि विभाजन से प्रभावित लोगों का साहस और उनकी जीवन यात्रा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।
प्राचार्य ने कहा कि वर्ष 1947 की त्रासदी को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत के दुख को दोहराना नहीं है, बल्कि उससे सीख लेकर वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाने का संकल्प लेना भी है। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा हमें समाज में भेदभाव और नफरत के जहर को खत्म करने तथा देश में एकता, सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और अखंडता को मजबूत करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास से सीख लें और देश के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को विभाजन जैसे ऐतिहासिक घटनाक्रम के मानवीय पक्ष को समझना चाहिए। इतिहास से मिलने वाली सीख वर्तमान समाज के लिए महत्वपूर्ण है। आपसी विश्वास, भाईचारा और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करके ही एक सशक्त समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को ‘विकसित भारत’ के निर्माण में एकजुट होकर योगदान देने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी सामने आया कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन लोगों की स्मृतियों को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने उस कठिन दौर में अपना जीवन गंवाया या अपना घर-परिवार और जीवन की जमा पूंजी छोड़कर विस्थापन का दर्द झेला। बड़ी संख्या में लोगों को अचानक अपना परिचित परिवेश छोड़ना पड़ा और अनजान स्थानों की ओर जाना पड़ा। इस त्रासदी ने परिवारों और समाज पर गहरा प्रभाव डाला, जिसकी स्मृतियां लंबे समय तक लोगों के जीवन का हिस्सा बनी रहीं।
कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों ने भी विभाजन के इतिहास और उससे जुड़ी मानवीय संवेदनाओं को समझने का प्रयास किया। मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम केवल ऐतिहासिक जानकारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी लेकर आया। नाटिका के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि किसी भी संकट की सबसे बड़ी कीमत आम इंसान को चुकानी पड़ती है। ऐसे में समाज में संवेदनशीलता, सहयोग और एकता की भावना को बनाए रखना जरूरी है।
कार्यक्रम के अंत में विभाजन के दौरान प्राण गंवाने वाले सभी निर्दोष नागरिकों की आत्मशांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। उपस्थित चिकित्सकों, शिक्षकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से मौन रखकर विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सभागार में गंभीर और श्रद्धापूर्ण वातावरण बना रहा। दो मिनट के मौन के माध्यम से सभी ने उन लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त किया, जिन्होंने विभाजन की त्रासदी में अपनी जान गंवाई।
कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के उप-प्राचार्य डॉ. टीपी सिंह, सीएमएस डॉ. जीवी सिंह, डॉ. शिखा सिंह, डॉ. राजेश गुप्ता, डॉ. अतिहर्ष, डॉ. गीतू सिंह सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे। बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टरों और छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। सभी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के उद्देश्य और संदेश को समझते हुए कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. एसपीएम विभाग के डॉ. हिमालय सिंह ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया और उपस्थित लोगों को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के महत्व से जोड़े रखा। कार्यक्रम के दौरान नाटिका, संबोधन और श्रद्धांजलि के बीच उन्होंने आयोजन को व्यवस्थित रूप से संचालित किया।
कार्यक्रम के समापन का दृश्य भी बेहद भावपूर्ण रहा। विद्यार्थियों ने ओजस्वी एवं राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गान प्रस्तुत किया। जैसे ही विद्यार्थियों की आवाज में ‘वंदे मातरम’ गूंजा, पूरा सभागार देशभक्ति के रंग में रंग गया। डॉक्टरों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इस सामूहिक गान में राष्ट्रप्रेम की भावना के साथ सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन देशभक्ति, संवेदना और राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ हुआ।
