आगरा। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शहीद स्मारक प्रांगण में अभिलेख एवं चित्र प्रदर्शनी तथा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी झेलकर भारत आए परिवारों के सदस्यों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। विभाजन के दौरान प्राणोत्सर्ग करने वाले लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में विभाजन से जुड़ी तत्कालीन तस्वीरों, अखबारों की कतरनों, साहित्य, राजकीय अभिलेखों और विस्थापित परिवारों की संरक्षित सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई।

विभाजन पीड़ित परिवारों के सदस्यों ने अपनी आपबीती सुनाई तो माहौल भावुक हो गया। मुख्य अतिथि विधायक एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री राजेश चौधरी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य अतीत की पीड़ा को याद करने के साथ वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से परिचित कराना तथा देश की एकता, अखंडता और सौहार्द को मजबूत करना है। सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि स्वतंत्रता के पीछे देशवासियों ने बड़ी कीमत चुकाई और विभाजन पीड़ित परिवारों ने विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर अपने जीवन को फिर से खड़ा किया।
शहीद स्मारक प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के माध्यम से वर्ष 1947 के दौरान हुए भीषण संकट, पीड़ा और विस्थापन की स्मृतियों को सामने लाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल इतिहास की एक त्रासद घटना को याद करना नहीं, बल्कि उस दौर में अपने घर, परिवार, संपत्ति और परिचित परिवेश से उजड़ने वाले लोगों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी रहा। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करने से समाज को यह सीख मिलती है कि देश की एकता, अखंडता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को हमेशा मजबूत बनाए रखना आवश्यक है।
कार्यक्रम में विभाजन विभीषिका से विस्थापित परिवारों के सदस्यों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान उन परिवारों के संघर्ष और योगदान को याद किया गया, जिन्होंने विभाजन के बाद बेहद कठिन परिस्थितियों में अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया। कार्यक्रम में विभाजन की त्रासदी पर आधारित लघु नाट्य प्रस्तुति भी देखी और सुनी गई। नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से उस दौर की पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष को सामने रखा गया, जिससे उपस्थित लोगों को विभाजन के मानवीय पक्ष को समझने का अवसर मिला।

शहीद स्मारक प्रांगण में उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार के सौजन्य से विभाजन विभीषिका से संबंधित अभिलेख एवं चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी में तत्कालीन घटनाक्रम से जुड़े फोटो, अखबारों की कतरनें, साहित्य, राजकीय अभिलेख और विस्थापित परिवारों की संरक्षित सामग्री प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी को विभाजन विभीषिका से विस्थापित परिवारों के सदस्यों के साथ आमजन ने भी देखा। ऐतिहासिक दस्तावेजों और तस्वीरों के माध्यम से लोगों को उस समय की परिस्थितियों और विभाजन के दौरान सामने आई घटनाओं से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम में विभाजन से विस्थापित परिवारों के सदस्यों हेमंत भोजवानी, अरुण ग्रोवर, कंचन ग्रोवर, नरेंद्र जग्गा, रामचंद छाबड़िया, रोचीराम नागरानी, तिलकराज महाजन, रोहित कत्याल और रंजीत सामा सहित अन्य लोगों ने विभाजन से जुड़ी अपनी दास्तां सुनाई। उन्होंने उस दौर में अपने परिवारों द्वारा झेली गई कठिनाइयों, विस्थापन और नए स्थान पर जीवन शुरू करने के संघर्ष को साझा किया। उनकी आपबीती सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। विभाजन की व्यक्तिगत स्मृतियों ने इतिहास की उस त्रासदी को भावनात्मक रूप से लोगों के सामने ला दिया, जिसे किताबों और दस्तावेजों में पढ़ा जाता रहा है।
कार्यक्रम में सिंधी काउन्सिल ऑफ इंडिया उत्तर प्रदेश, सिंधी सभा, उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी और सनातनी पंजाबी महासभा सहित विभिन्न सामाजिक एवं गैर सरकारी संगठनों के सदस्यों ने भी सहभागिता की। संगठनों से जुड़े लोगों ने विभाजन की स्मृतियों और उससे जुड़े अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उस दौर की पीड़ा को भुलाया नहीं जा सकता। साथ ही, विभाजन से निकली सीख को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां देश की एकता और सामाजिक सौहार्द का महत्व समझ सकें।

मुख्य अतिथि विधायक एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री राजेश चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया, ताकि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्रता से पहले देशवासियों द्वारा झेली गई उस भीषण त्रासदी से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित मौन जुलूस, स्मृति कार्यक्रम और अन्य आयोजनों का उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी को इतिहास से परिचित कराते हुए स्वतंत्रता के महत्व, देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को और मजबूत करना है।
राजेश चौधरी ने कहा कि विभाजन पीड़ित परिवारों का सम्मान केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं होना चाहिए। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर इन परिवारों की चिंता करनी चाहिए, उनके बारे में जानकारी रखनी चाहिए और उनके सुख-दुख में सहभागी बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने सभी विभाजन पीड़ित परिवारों को हृदय से नमन और अभिनंदन करते हुए कहा कि उनका संघर्ष और संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी इन परिवारों ने जिस धैर्य और साहस का परिचय दिया, वह समाज के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण है।
मुख्य अतिथि ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य भारत के विभाजन के दौरान हुए भीषण संकट, पीड़ा और विस्थापन की स्मृति को जीवित रखना तथा देश की एकता, अखंडता एवं सौहार्द को सशक्त करना है। उन्होंने कहा कि इतिहास की त्रासद घटनाओं को याद करने के साथ उनसे सीख लेना भी जरूरी है। वर्तमान पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि आपसी भाईचारा, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत होती है।
सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि यह दिवस याद दिलाता है कि 15 अगस्त 1947 को प्राप्त स्वतंत्रता के पीछे देशवासियों ने कितनी बड़ी पीड़ा और कीमत चुकाई थी। उन्होंने विभाजन पीड़ित परिवारों को नमन करते हुए कहा कि विभाजन के समय लोगों ने अत्याचार, हिंसा, हत्या, विस्थापन और परिवारों के बिछड़ने जैसी असहनीय पीड़ा झेली। बड़ी संख्या में लोग अपनी जान बचाने के लिए घर-बार, जमीन-जायदाद और व्यापार छोड़कर अनिश्चित परिस्थितियों में भारत आने को मजबूर हुए। ट्रेनों में भयावह परिस्थितियों के बीच यात्रा करने और अपने घरों से उजड़ने की उस त्रासदी की कल्पना मात्र से ही मन विचलित हो जाता है।
राजकुमार चाहर ने कहा कि विभाजन के बाद अनेक परिवारों के सामने न रहने का ठिकाना था, न रोजगार और न ही भविष्य की कोई निश्चितता। इसके बावजूद इन परिवारों ने विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं मानी। उन्होंने संघर्ष, परिश्रम और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर अपने जीवन को दोबारा स्थापित किया। उन्होंने व्यापार खड़े किए, अपने परिवारों को संभाला और आज देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके राष्ट्र के प्रति विश्वास और संकल्प का प्रमाण है। ऐसे परिवारों की संघर्ष गाथा नई पीढ़ी को विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
कार्यक्रम में विधायक डॉ. जीएस धर्मेश, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और विधायक चौधरी बाबूलाल ने भी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभाजन की त्रासदी में पीड़ित लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। महापौर हेमलता दिवाकर और भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विभाजन की स्मृतियों से सीख लेकर समाज में भाईचारा और आपसी सद्भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान विभाजन विभीषिका त्रासदी में प्राणोत्सर्ग करने वाले लोगों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया। उपस्थित लोगों ने मौन श्रद्धांजलि अर्पित कर उन सभी निर्दोष नागरिकों को नमन किया, जिन्होंने विभाजन की भयावह परिस्थितियों में अपनी जान गंवाई। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धा और संवेदना का वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी मनीष बंसल, मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन आजाद भगत सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रोटोकॉल अमरेंद्र कुमार, पीडी डीआरडीए रेणु कुमारी, पीडी मनरेगा रामायण सिंह यादव, पीडी एनआरएलएम, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में आमजन ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की और अभिलेख एवं चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
आयोजन के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि विभाजन की पीड़ा को याद करना केवल अतीत को दोहराना नहीं, बल्कि वर्तमान को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी भी है। विभाजन पीड़ित परिवारों की दास्तां, ऐतिहासिक दस्तावेज, तस्वीरें और प्रदर्शित सामग्री ने लोगों को उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित कराया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देते हुए देश की एकता, अखंडता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को मजबूत बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम ने यह भी याद दिलाया कि स्वतंत्रता का मूल्य समझने के साथ उन लाखों लोगों के संघर्ष और त्याग को याद रखना भी जरूरी है, जिन्होंने विभाजन की पीड़ा झेलकर नए भारत के निर्माण में अपना योगदान दिया।
