.आगरा।डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में सैमसंग इनोवेशन कैंपस की शुरुआत के साथ विद्यार्थियों के लिए तकनीकी शिक्षा का नया अवसर खुला है। पहले चरण में 850 विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई में 300 घंटे से अधिक का थ्योरी और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम का लक्ष्य युवाओं को केवल प्रमाणपत्र देने के बजाय प्रोजेक्ट, नवाचार, समस्या समाधान और रोजगारपरक कौशल से जोड़ना है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने सैमसंग से परिसर में लैब स्थापित करने का आग्रह किया, ताकि विद्यार्थियों को तकनीक पर सीधे काम करने का अवसर मिल सके।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET), खंदारी के शिवाजी मंडपम में शनिवार को सैमसंग इनोवेशन कैंपस का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और ललित कला संस्थान के विद्यार्थियों की सरस्वती वंदना से हुई। तकनीकी शिक्षा को रोजगार और नवाचार से जोड़ने की दिशा में शुरू किए गए इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय, सैमसंग और स्वदेश संस्था की साझेदारी को आगे बढ़ाया गया है।

विश्वविद्यालय, सैमसंग और स्वदेश संस्था के बीच हुए एमओयू के तहत संचालित कार्यक्रम के पहले चरण में 850 विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण 300 घंटे से अधिक का होगा, जिसमें थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। इसका मकसद विद्यार्थियों को तकनीक की केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी परियोजनाओं पर काम करने के लिए तैयार करना है, जिनका इस्तेमाल वास्तविक समस्याओं के समाधान में किया जा सके।

वर्तमान समय में एआई का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, बैंकिंग, संचार, व्यापार और कई अन्य क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही नई तकनीकों से जोड़ना उनके कौशल विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सैमसंग इनोवेशन कैंपस के माध्यम से विद्यार्थियों को एआई और जेनरेटिव एआई के साथ काम करने की समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण में व्यावहारिक पक्ष पर जोर होने से विद्यार्थी सीखी गई तकनीक को प्रोजेक्ट के रूप में इस्तेमाल कर सकेंगे।

कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने शिक्षा, उद्योग और समाज के बीच साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब शैक्षणिक संस्थान, उद्योग और समाज साथ मिलकर काम करते हैं तो उसका प्रभाव व्यापक होता है। उनके अनुसार एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बिग डेटा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों के दौर में तकनीकी दक्षता आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण के लिए महत्वपूर्ण आधार बन रही है।
उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक के साथ मूल्यों को जोड़ने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि तकनीकी कौशल के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की समझ भी जरूरी है। तकनीक का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सुविधा या रोजगार तक सीमित न रहकर समाज के सामने मौजूद समस्याओं के समाधान में भी किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों की भूमिका केवल तकनीक इस्तेमाल करने वाले युवाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे नए समाधान विकसित करने में भी भागीदार बन सकेंगे।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि विश्वविद्यालय का काम केवल डिग्री प्रदान करना नहीं है। विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ कौशल, रचनात्मकता और आत्मविश्वास विकसित करना भी उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को Competence, Creativity और Character के तीन सूत्र अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पहले चरण में प्रशिक्षण ले रहे 850 विद्यार्थी केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि उनके भीतर 850 नए विचार और नवाचार की संभावनाएं हैं।
कुलपति ने सैमसंग से विश्वविद्यालय परिसर में जल्द IoT लैब स्थापित करने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि ऐसी लैब बनने से विद्यार्थियों को तकनीक पर सीधे काम करने और हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण हासिल करने का अवसर मिलेगा। कक्षा में पढ़ी गई अवधारणाओं को उपकरणों और प्रोजेक्ट के माध्यम से समझने से विद्यार्थियों की व्यावहारिक क्षमता विकसित होगी। इसके साथ ही बेहतर प्लेसमेंट के अवसर तैयार करने में भी मदद मिल सकती है।
सैमसंग के कॉरपोरेट वाइस प्रेसिडेंट (Public Affairs, South West Asia) एस.पी. चुन ने कहा कि सैमसंग पिछले 30 वर्षों से भारत के विकास में योगदान दे रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक के केवल उपभोक्ता बनकर न रहने और उसे समझकर नए समाधान तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उनके अनुसार युवाओं में समस्या को समझने, उसका समाधान खोजने और नए विचारों को तकनीक के माध्यम से आकार देने की क्षमता विकसित करना जरूरी है।
IET के निदेशक प्रो. मनु प्रताप सिंह ने कहा कि आधुनिक इंजीनियरिंग शिक्षा को कक्षाओं की सीमाओं से आगे ले जाना जरूरी है। विद्यार्थियों को तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल के साथ वास्तविक समस्याओं से जोड़ने पर उनकी सीख अधिक उपयोगी बनती है। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम को विद्यार्थियों के कौशल विकास से जोड़ते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा का प्रभाव तभी व्यापक होगा, जब विद्यार्थी सीखी गई जानकारी को व्यवहार में उतार सकें।
कार्यक्रम में उद्योग और शैक्षणिक संस्थान के बीच सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर भी बात हुई। एआई और जेनरेटिव एआई के प्रशिक्षण के साथ विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट आधारित सीख का अवसर मिलने से उनके लिए तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने की संभावनाएं बढ़ेंगी। वहीं IoT लैब की स्थापना की पहल विश्वविद्यालय में तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम हो सकती है।
कार्यक्रम के अंत में ESSCI के उपाध्यक्ष सरोज ए. पार्थो ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. शिल्पी लावानिया ने किया। कार्यक्रम में Samsung India के CSR हेड शुभम मुखर्जी, आकाश दीक्षित, अतुल उरवील द्विवेदी, स्वदेश के अध्यक्ष डॉ. राजीव निगम, कुलसचिव अजय मिश्रा, वित्त अधिकारी सुदर्शन, परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओम प्रकाश, प्रो. बी.पी. सिंह, प्रो. संजय चौधरी और प्रो. अर्चना सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अधिकारी मौजूद रहे।
सैमसंग इनोवेशन कैंपस की शुरुआत के साथ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को एआई जैसी तेजी से विकसित हो रही तकनीक को सीखने और उस पर व्यावहारिक रूप से काम करने का अवसर मिला है। 850 विद्यार्थियों से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि परियोजना आधारित सीख, नवाचार और रोजगारपरक क्षमता विकसित करने की दिशा में भी केंद्रित है। विश्वविद्यालय में IoT लैब की स्थापना का प्रस्ताव इस पहल को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है, जिससे आने वाले समय में विद्यार्थियों को तकनीक के कई क्षेत्रों में सीधे प्रयोग और प्रशिक्षण का अवसर मिल सके।
