आगरा। संस्कृत को भारतीय ज्ञान, संस्कृति और पहचान से जोड़ते हुए नई पीढ़ी को इस भाषा के अध्ययन के साथ आधुनिक भाषाओं का ज्ञान हासिल करने की जरूरत बताई गई। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ में आगरा मंडल स्तरीय संस्कृत प्रतिभा खोज प्रतियोगिताओं में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी के 60 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। संस्कृत गीत, वाचन, सामान्य ज्ञान और श्लोकात्याक्षरी में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। कुलपति प्रो. आशु रानी ने विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष में संस्कृत को समर्पित बड़े आयोजन की घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय में चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर कुलपति का अभिनंदन भी किया गया।
संस्कृत को केवल प्राचीन भाषा के रूप में देखने के बजाय भारतीय ज्ञान, संस्कृति और संस्कारों की समृद्ध परंपरा से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। भारतीय वैदिक ज्ञान को दुनिया तक पहुंचाने के लिए संस्कृत के साथ विदेशी भाषाओं का ज्ञान हासिल करना भी उपयोगी साबित हो सकता है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ में आयोजित आगरा मंडल स्तरीय संस्कृत प्रतिभा खोज प्रतियोगिताओं में भाषा के इसी व्यापक स्वरूप पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में मंडल के चार जिलों से आए 60 से अधिक प्रतिभागियों ने संस्कृत गीत, संस्कृत वाचन, सामान्य ज्ञान और श्लोकात्याक्षरी जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ, भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के सहयोग से आयोजित प्रतियोगिताएं तीन अक्टूबर को सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक चलीं। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी के संस्कृत विद्यालयों के अलावा अन्य विद्यालयों, महाविद्यालयों और संस्कृत पाठशालाओं के विद्यार्थी इसमें शामिल हुए। प्रतियोगिताओं के जरिए विद्यार्थियों के संस्कृत ज्ञान, उच्चारण, प्रस्तुति और विषय की समझ को परखा गया। अलग-अलग वर्गों में विद्यार्थियों के बीच प्रतिस्पर्धा हुई और विजेताओं का चयन निर्णायक मंडल ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि संस्कृत सिर्फ एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और संस्कारों की समृद्ध परंपरा की संवाहक है। उन्होंने संस्कृत को भारत की शक्ति और पहचान से जोड़ते हुए कहा कि इसे उसका पुराना सम्मान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत में श्रेष्ठता हासिल करने के साथ विद्यार्थियों को अंग्रेजी, रूसी, फ्रेंच और जर्मन जैसी विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी हासिल करना चाहिए। इससे भारतीय वैदिक ज्ञान, साहित्य और ज्ञान परंपरा को विदेशी भाषाओं के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय वेदों और ज्ञान परंपरा में निहित विचारों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए भाषा की समझ जरूरी है। संस्कृत के साथ दूसरी भाषाओं का ज्ञान रखने वाले विद्यार्थी भारतीय ज्ञान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कुलपति ने कहा कि जब दूसरे देशों के लोग वेदों में निहित ज्ञान को समझने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर रुख करेंगे, तब संस्कृत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष में संस्कृत को समर्पित बड़े आयोजन की भी जानकारी दी। इसमें मंडल के महाविद्यालयों के विद्यार्थी, शिक्षक, पूर्व विद्यार्थी और संस्कृत के जानकार शामिल होंगे।
मुख्य अतिथि आगरा कॉलेज के सेवानिवृत्त संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. शशि तिवारी ने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान, संस्कृति और संस्कारों की समृद्ध परंपरा की संवाहक है। संस्कृत प्रतिभा खोज जैसे आयोजन विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने अपनी स्वरचित रचना ‘प्रिया संस्कृतम्’ प्रस्तुत की। रचना के माध्यम से संस्कृत की रोचकता और व्यापकता को सामने रखा गया। विद्यार्थियों ने भी प्रस्तुति का उत्साह के साथ स्वागत किया।
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की संचालन समिति के सदस्य लव शुक्ल ने विश्वविद्यालय को आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत गीत, श्लोक और सामान्य ज्ञान जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देती हैं। इससे भाषा के प्रति रुचि और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति गौरव की भावना विकसित होती है। संस्थान के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने कहा कि संस्कृति व्यक्ति को अपनी जड़ों से जोड़कर रखती है। यही मूल परंपरा समाज को दिशा देती है। संस्कृत के प्रति जनमानस में सकारात्मक माहौल बनाने के लिए संस्थान लगातार प्रयास कर रहा है और इन प्रयासों को आगे भी जारी रखने की जरूरत है।
प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अलग-अलग वर्गों में स्थान हासिल किए। संस्कृत गीत बाल वर्ग में मंजरी प्रथम, जयति दीक्षित द्वितीय और आदर्श मिश्र तृतीय रहे। संस्कृत वाचन एवं सामान्य ज्ञान बाल वर्ग में कार्तिकेय मिश्रा प्रथम, अखंड मिश्रा द्वितीय और अभिषेक दीक्षित तृतीय रहे। संस्कृत सामान्य ज्ञान युवा वर्ग में ऋषभ यादव प्रथम, अंशु द्वितीय और नियति कन्नौजिया तृतीय स्थान पर रहीं। श्लोकात्याक्षरी में प्रशांत अवस्थी प्रथम, निशांत कुमार द्वितीय और संदीप तृतीय रहे।
संस्कृत गीत प्रतियोगिता में डॉ. अभिषेक तिवारी, डॉ. रोहितास गौतम और लव शुक्ल निर्णायक रहे। सामान्य ज्ञान बाल वर्ग में डॉ. वंदना मिश्रा, हितेश कुमार और डॉ. डोली शर्मा ने निर्णायक की भूमिका निभाई। सामान्य ज्ञान युवा वर्ग में हितेश कुमार, डॉ. डोली शर्मा और डॉ. अरुण कुमार द्विवेदी निर्णायक रहे। श्लोकात्याक्षरी में डॉ. वंदना मिश्रा, डॉ. अभिषेक तिवारी और लव शुक्ल ने निर्णय किया। मंच संचालन और धन्यवाद मंडल संयोजक डॉ. वर्षा रानी ने किया।
कार्यक्रम में डॉ. पल्लवी आर्य, डॉ. प्रवीप वर्मा, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. संदीप कुमार शर्मा, डॉ. मोहिनी दयाल, डॉ. रमा, डॉ. संदीप सिंह, कृष्णकांत, कंचन, विशाल शर्मा, अंगद कुशवाहा, प्रीति और उपेंद्र पचौरी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय में चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर कुलपति प्रो. आशु रानी का केएमआई में अभिनंदन भी किया गया। संस्थान निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर और डॉ. पल्लवी आर्य ने फूल-माला पहनाकर उनका स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चारण के बीच शिक्षकों और विद्यार्थियों ने कुलपति का अभिनंदन किया। इस दौरान संस्थान के शिक्षक और अन्य उपस्थित सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल रहे।
