- यमुना और चंबल नदी पर पॉन्टून पुलों के निर्माण, मरम्मत और संचालन की तैयारियां तेज
- आगरा, अलीगढ़ और अमेठी में करोड़ों रुपये की परियोजनाओं पर शुरू हुआ काम
- ग्रामीण संपर्क, आवागमन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाने पर फोकस
सार: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नदी पार आवागमन को सुगम बनाने के लिए पॉन्टून पुल, फेरी और पावर वार्ज संचालन से जुड़े बड़े कार्यों को मंजूरी दी गई है। आगरा, अलीगढ़ और अमेठी जिलों में यमुना और चंबल नदी पर पुल निर्माण, अनुरक्षण, मरम्मत, डिस्मेंटलिंग और फेरी संचालन से जुड़े करीब डेढ़ दर्जन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे। सबसे अधिक परियोजनाएं आगरा जिले में प्रस्तावित हैं, जहां ग्रामीण संपर्क, धार्मिक क्षेत्रों तक पहुंच और नदी पार आवाजाही को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
आगरा। जिले में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत यमुना और चंबल नदी पर पॉन्टून पुलों तथा फेरी संचालन से जुड़े कई कार्य शुरू किए जा रहे हैं। आगरा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में जनपद मथुरा के अंतर्गत यमुना नदी पर स्थित मांट बाबूगढ़ घाट पॉन्टून फेरी के निर्माण, अनुरक्षण और डिस्मेंटलिंग का कार्य प्रस्तावित किया गया है, जिसकी लागत 30.95 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
ग्रामीण क्षेत्र में नगला सांवला मार्ग पर यमुना नदी के समोगर घाट पर पॉन्टून पुल के निर्माण, मरम्मत और डिस्मेंटलिंग का कार्य कराया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 28.93 लाख रुपये रखी गई है।
बाह विधानसभा क्षेत्र में चंबल नदी पर कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल की गई हैं। कैजरा घाट और उचीतगढ़ के मध्य चंबल नदी पर पॉन्टून पुल के निर्माण, मरम्मत, संचालन और डिस्मेंटलिंग के कार्य पर 37.95 लाख रुपये खर्च होंगे। इसी क्षेत्र में पिनाहट घाट फेरी पर पॉन्टून की मरम्मत तथा पॉन्टून पुल के इरेक्शन और डिस्मेंटलिंग के लिए 31.87 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
ग्राम बटेश्वर और ग्राम कल्याणपुर भरतार के मध्य यमुना नदी पर पॉन्टून पुल के निर्माण, मरम्मत और डिस्मेंटलिंग का कार्य भी कराया जाएगा। इस योजना पर 26.55 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। धार्मिक और ग्रामीण दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मार्ग के विकसित होने से क्षेत्रीय लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
बाह क्षेत्र में ही चंबल नदी पर स्थित पिनाहट घाट पर फेरी और पावर वार्ज संचालन, पॉन्टून की सुरक्षा तथा रखरखाव के लिए 23.28 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। वहीं कैजरा घाट और उदीयतगढ़ के मध्य चंबल नदी के घाट क्षेत्र में फेरी और पावर वार्ज संचालन, सुरक्षा और रखरखाव कार्य के लिए 19.62 लाख रुपये खर्च होंगे।
बटेश्वर और कल्याणपुर भरतार के बीच यमुना नदी पर संचालित फेरी और पावर वार्ज व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए 17.24 लाख रुपये की योजना बनाई गई है। इससे ग्रामीणों के साथ-साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही भी आसान होगी।
एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र में भी यमुना नदी पर कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। नगला बतुरा और सिकंदरपुर दयालबाग के मध्य यमुना नदी पर पॉन्टून सेतु के अनुरक्षण और मरम्मत के लिए 34.35 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं गिबौली और मऊ आनंदी मेरो घाट के मध्य पॉन्टून सेतु के अनुरक्षण और मरम्मत कार्य पर 32.74 लाख रुपये की लागत आएगी।
गिजौली और मऊ आनंदी भैरों घाट के मध्य यमुना नदी पर पावर वार्ज संचालन के लिए 16.56 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसी प्रकार समोगर घाट फेरी पर पावर वार्ज संचालन तथा नगला बतुरी और सिकंदरपुर दयालबाग के मध्य यमुना नदी पर पावर वार्ज संचालन के लिए भी 16.56-16.56 लाख रुपये की योजनाएं तैयार की गई हैं।
अलीगढ़ जिले के खैर विधानसभा क्षेत्र में यमुना नदी पर स्थित मालव घाट फेरी पर पॉन्टून पुल के निर्माण और रखरखाव के लिए 39.38 लाख रुपये की परियोजना प्रस्तावित है। इसके अलावा मालव घाट फेरी पर पावर वार्ज संचालन के लिए 22.82 लाख रुपये की लागत तय की गई है। इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
अमेठी जिले के गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण परियोजना शामिल की गई है। मुसाफिरखाना विकास खंड के अंतर्गत ग्राम दम्डेश्वर देव स्थान पर पीपे के पुल के इरेक्शन, डिस्मेंटलिंग और फेरी संचालन हेतु पावर वार्ज प्रयोग का कार्य कराया जाएगा। इस परियोजना की लागत 37.89 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य नदी पार ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत करना, स्थानीय आवागमन को सुरक्षित बनाना और धार्मिक तथा सामाजिक गतिविधियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। बरसात और बाढ़ के मौसम में जहां कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क टूट जाता है, वहां ये पॉन्टून पुल और फेरी सेवाएं लोगों के लिए राहत का बड़ा माध्यम साबित होती हैं। प्रशासनिक स्तर पर इन कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की तैयारी की जा रही है, ताकि आम लोगों को समय पर बेहतर सुविधा मिल सके।
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प्रशासन की ओर से कंजरा घाट और उद्योतगढ़ के बीच फेरी-पावर वार्ज (नाव/बार्ज) संचालन को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को भी स्वीकृति मिल गई है, जिससे अब नदी पार करने वाले लोगों को अधिक सुविधा और सुरक्षित आवागमन मिल सकेगा।
फेरी-पावर वार्ज एक बड़ी नाव या बार्ज होती है, जिसके माध्यम से लोगों, बाइक, छोटे वाहनों और सामान को नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचाया जाता है। अब तक स्थानीय लोगों को चंबल नदी पार करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, खासकर बरसात के समय। ऐसे में इस सेवा के शुरू होने से आसपास के गांवों के लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों अनुसार, फेरी संचालन के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट, सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी। नाव संचालन के लिए तय मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने की अनुमति नहीं होगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फेरी सेवा शुरू होने से समय की बचत होगी और आवागमन आसान बनेगा। किसानों, व्यापारियों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि फेरी सेवा की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अव्यवस्था से बचा जा सके।
