आगरा। बाद टैंक वैगन डिपो कार्यालय में 08 मई 2026 को राजभाषा हिंदी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक सहायक मंडल यांत्रिक इंजीनियर, टैंक वैगन डिपो, बाद कार्यालय में संपन्न हुई, जिसमें कार्यालयी कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग, राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा प्रचार-प्रसार पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में भाषा की सरलता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता को बढ़ाना रहा।

बैठक की अध्यक्षता सीनियर सेक्शन इंजीनियर नवज्योति भटनागर ने की। उनके नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में बाद स्टेशन एवं टैंक वैगन डिपो के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ पर्यवेक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों ने राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे और इसे कार्यालयी कार्य प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर सहमति व्यक्त की।
बैठक के दौरान यह विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि बाद डिपो, आगरा मंडल के अंतर्गत आता है और यहां राजभाषा नीति के तहत हिंदी को प्राथमिकता देने का कार्य लगातार जारी है। अधिकारियों ने बताया कि मंडल रेल प्रबंधक आगरा गगन गोयल, अपर मंडल रेल प्रबंधक गिरीश कुमार गुप्ता तथा मंडल वाणिज्य प्रबंधक बीरेंद्र सिंह चौहान के मार्गदर्शन में पूरे मंडल में राजभाषा हिंदी का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। उनके नेतृत्व में हिंदी के उपयोग को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में एकरूपता और सरलता लाई जा सके।
बैठक में यह भी बताया गया कि आगरा मंडल “क” क्षेत्र में स्थित है, जिसके कारण यहां राजभाषा हिंदी में कार्य करने का लक्ष्य शत-प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है और समय-समय पर समीक्षा भी की जाती है। अधिकारियों ने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति केवल निर्देशों से नहीं, बल्कि सभी कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी से संभव है।
राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रत्येक तिमाही में नियमित रूप से हिंदी बैठकों का आयोजन किया जाता है। इन बैठकों में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भाग लेते हैं और हिंदी के प्रयोग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव साझा करते हैं। बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कार्यालयी पत्राचार, नोटिंग, रिपोर्टिंग एवं अन्य सभी प्रशासनिक कार्य हिंदी में अधिक से अधिक किए जाएं।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ पर्यवेक्षकों ने यह सुझाव दिया कि कार्यालयी कार्यों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए, जिससे कर्मचारियों की दक्षता और आत्मविश्वास में वृद्धि हो सके। इसके साथ ही हिंदी में कार्य करने के लिए प्रेरक वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि राजभाषा हिंदी केवल एक औपचारिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक कार्यों को सरल, स्पष्ट और प्रभावी बनाने का एक सशक्त माध्यम है। हिंदी में कार्य करने से न केवल संवाद आसान होता है, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आती है।
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि सभी विभागों में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर निगरानी और समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही कर्मचारियों को प्रेरित करने के लिए समय-समय पर सम्मान एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।
वरिष्ठ पर्यवेक्षकों ने कहा कि राजभाषा हिंदी को व्यवहारिक रूप से अपनाने के लिए सकारात्मक वातावरण बनाना अत्यंत आवश्यक है। जब कर्मचारी सहज रूप से हिंदी में कार्य करेंगे, तभी राजभाषा नीति का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकेगा।
बैठक में यह भी विचार रखा गया कि हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए तकनीकी साधनों का उपयोग भी बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे डिजिटल कार्यों में भी हिंदी का अधिक प्रयोग सुनिश्चित किया जा सके। इससे कार्य प्रणाली अधिक आधुनिक और प्रभावी बनेगी।
अंत में बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी कार्यालयी कार्यों में हिंदी के अधिकतम प्रयोग को बढ़ावा देंगे और राजभाषा नीति को पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ लागू करेंगे।
यह बैठक न केवल एक औपचारिक आयोजन रही, बल्कि राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। इससे आने वाले समय में कार्यालयी कार्यों में सरलता, पारदर्शिता और एकरूपता आने की पूरी संभावना है।
