सार
विश्व धरोहर ताजमहल में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की भीड़ और स्मारक पर उसके प्रभाव का आकलन करने के लिए आईआईटी दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने विस्तृत निरीक्षण किया। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) की सिफारिश के बाद यह अध्ययन कराया जा रहा है, ताकि ताजमहल की वहन क्षमता, भीड़ प्रबंधन और स्मारक संरक्षण के लिए नई व्यवस्था तैयार की जा सके। निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने पर्यटकों की आवाजाही, रुकने के स्थानों और फोटोग्राफी पॉइंट्स का गहन अध्ययन किया।

आगरा। स्थित विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल में हर दिन उमड़ने वाली भारी भीड़ अब वैज्ञानिक अध्ययन का विषय बन चुकी है। स्मारक पर बढ़ते दबाव, सुरक्षा व्यवस्था और संरक्षण संबंधी चुनौतियों को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने आईआईटी दिल्ली की विशेषज्ञ टीम के साथ मिलकर ताजमहल का विस्तृत निरीक्षण कराया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि ताजमहल एक दिन में कितने पर्यटकों का दबाव सुरक्षित रूप से सह सकता है और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कौन-कौन से नए उपाय लागू किए जा सकते हैं।
यह अध्ययन सर्वोच्च न्यायालय के उस विजन डॉक्यूमेंट से जुड़ा हुआ है, जिसमें ताजमहल में पर्यटकों की संख्या तय करने और स्मारक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इससे पहले वर्ष 2015 में राष्ट्रीय पर्यावरणीय अभियांत्रिकी शोध संस्थान (नीरी) ने भी ताजमहल की वहन क्षमता और भीड़ प्रबंधन को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की थी। हालांकि, बीते वर्षों में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ने और स्मारक पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब नए सिरे से अध्ययन की आवश्यकता महसूस की गई।
एएसआई के उत्तरी क्षेत्र के निदेशक वसंत कुमार स्वर्णकार ने आईआईटी दिल्ली की टीम के साथ करीब ढाई घंटे तक ताजमहल परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य मकबरे तक पर्यटकों की आवाजाही का बारीकी से अध्ययन किया। टीम ने यह भी देखा कि सैलानी किन स्थानों पर सबसे ज्यादा समय बिताते हैं, कहां भीड़ अधिक जमा होती है और फोटो खिंचवाने के लिए कौन-कौन से हिस्से सबसे अधिक उपयोग में आते हैं।
विशेषज्ञों ने स्मारक के उन हिस्सों का भी अध्ययन किया जहां पर्यटकों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। खासकर मुख्य मकबरे के भीतर और संगमरमर के प्लेटफॉर्म पर भीड़ नियंत्रण को लेकर विशेष ध्यान दिया गया। टीम ने यह जानने का प्रयास किया कि अत्यधिक भीड़ का स्मारक की संरचना, सुरक्षा और पर्यटकों के अनुभव पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
ताजमहल में सामान्य दिनों में प्रतिदिन 25 से 30 हजार पर्यटक पहुंचते हैं, जबकि शनिवार, रविवार और अवकाश के दिनों में यह संख्या 50 हजार के पार पहुंच जाती है। पंद्रह वर्ष तक की आयु के बच्चों का प्रवेश निशुल्क होने के कारण कई बार वास्तविक संख्या अनुमान से भी अधिक हो जाती है। अत्यधिक भीड़ के कारण कई बार लंबी कतारें, धक्का-मुक्की, सुरक्षा संबंधी परेशानियां और स्मारक के भीतर अव्यवस्था जैसी स्थितियां भी पैदा हो जाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक तरीके से भीड़ प्रबंधन लागू किया जाए तो न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि स्मारक के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। अध्ययन के आधार पर भविष्य में समय स्लॉट आधारित प्रवेश व्यवस्था, सीमित संख्या में टिकट, भीड़ के लिए अलग-अलग मार्ग, डिजिटल मॉनिटरिंग और संवेदनशील क्षेत्रों में नियंत्रित प्रवेश जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं।
इस निरीक्षण का एक बड़ा उद्देश्य ताजमहल की मूल संरचना और ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखना भी है। लगातार बढ़ती भीड़ से संगमरमर की सतह, फर्श और आंतरिक हिस्सों पर प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में विशेषज्ञ यह तय करेंगे कि किस स्तर तक पर्यटकों की संख्या सुरक्षित मानी जा सकती है।
निरीक्षण के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट एएसआई, सीईसी और सर्वोच्च न्यायालय को सौंपी जाएगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में ताजमहल में प्रवेश और भीड़ नियंत्रण को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यदि सुझाए गए उपाय लागू होते हैं तो इससे न केवल स्मारक की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।
