आगरा। बाबूलाल गोयल सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, तहसील मार्ग में शनिवार को संस्कार, शिक्षा और पारिवारिक मूल्यों को समर्पित भव्य अभिभावक सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अभिभावकों को संस्कारयुक्त शिक्षा, बालकों के समग्र विकास और भारतीय संस्कृति के महत्व से अवगत कराया गया। इस दौरान छात्र संसद एवं शिशु भारती के पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह भी संपन्न हुआ। मातृ दिवस के अवसर पर बच्चों ने अपनी माताओं का पूजन कर चरण स्पर्श किए, वहीं महाराणा प्रताप जयंती पर उनके जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग सुनाकर विद्यार्थियों को राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया।

आगरा के तहसील मार्ग स्थित श्बाबूलाल गोयल सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शनिवार को आयोजित अभिभावक सम्मेलन पूरी तरह भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और नैतिक शिक्षा के वातावरण में संपन्न हुआ। विद्यालय परिसर में सुबह से ही उत्साह और उल्लास का माहौल दिखाई दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सहभागिता की। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को विद्यालय की कार्यपद्धति, संस्कारयुक्त शिक्षा प्रणाली और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉक्टर पार्थसारथी शर्मा, मुख्य वक्ता लेखिका भावना वरदान शर्मा तथा प्रधानाचार्य राजकुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही पूरा वातावरण भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा। विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने कार्यक्रम को गरिमामय स्वरूप प्रदान किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य राजकुमार ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास करना नहीं है, बल्कि उनमें नैतिकता, अनुशासन, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारियों की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा देना अत्यंत आवश्यक हो गया है, क्योंकि यही संस्कार उन्हें जीवन में सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें और उनके मानसिक तथा सामाजिक विकास पर विशेष ध्यान दें।
मुख्य अतिथि डॉक्टर पार्थसारथी शर्मा ने अपने संबोधन में स्वच्छता, अनुशासन और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक संस्कारित विद्यार्थी ही भविष्य में एक आदर्श नागरिक बनता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ जीवन मूल्यों को अपनाना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता लेखिका भावना वरदान शर्मा ने छात्र संसद एवं शिशु भारती के नव निर्वाचित पदाधिकारियों को गोपनीयता की शपथ दिलाई। सभी पदाधिकारियों ने अपने दायित्वों का निष्ठा, ईमानदारी और अनुशासन के साथ पालन करने का संकल्प लिया। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। विद्यालय परिवार ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सभी पदाधिकारियों का उत्साहवर्धन किया।
भावना वरदान शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों के शैक्षिक और नैतिक विकास में अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। भारतीय सनातन संस्कृति में घर को संस्कारों की प्रथम पाठशाला माना गया है, जहां बच्चे अपने माता-पिता से जीवन के नैतिक मूल्यों और व्यवहारिक संस्कारों को सीखते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर बराबर ध्यान देना चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
मातृ दिवस के अवसर पर आयोजित मातृ पूजन कार्यक्रम भावनात्मक क्षणों से भरपूर रहा। विद्यालय के नन्हें-मुन्ने बच्चों ने अपनी माताओं के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया तथा माल्यार्पण कर सदा सम्मान और आदर करने का प्रण लिया। इस दौरान कई अभिभावक भावुक नजर आए। कार्यक्रम ने भारतीय संस्कृति में माता के महत्व और पारिवारिक मूल्यों की गरिमा को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया।
इसी अवसर पर महाराणा प्रताप जयंती भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। विशिष्ट अतिथियों द्वारा महाराणा प्रताप के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया गया। वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों को सुनाकर विद्यार्थियों को साहस, राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का संदेश दिया। बच्चों को बताया गया कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म की रक्षा करना ही सच्चा चरित्र है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। गीत, समूह गायन और नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। नन्हें बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों पर अभिभावकों और अतिथियों ने जोरदार तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।
पूरा कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, शिक्षा, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।

