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District Magistrate Manish Bansal reviewing Agra water supply and sewerage projects with officials during a presentation
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शहर में पेयजल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कैंप कार्यालय में जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) द्वारा कराए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा शहर की वर्तमान स्थिति, प्रगति पर चल रही परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया।

समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि अमृत योजना के अंतर्गत आगरा गंगाजल परियोजना के जरिए बुलंदशहर के पालड़ा झाल से लगभग 130 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से शहर को गंगाजल की आपूर्ति की जा रही है। गंगाजल के संचयन के लिए सिकंदरा और जीवनी मंडी में वाटरवर्क्स स्थापित किए गए हैं, जबकि तीसरा वाटरवर्क्स पोइया क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने शहर में पेयजल आपूर्ति की पूरी व्यवस्था का गहन विश्लेषण करते हुए कुल वाटर हाउस कनेक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, पाइपलाइन, ओवरहेड टैंक और उनके रखरखाव की स्थिति की विस्तृत जानकारी तलब की। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि शहर के कितने घरों में गंगाजल की आपूर्ति की जा रही है, जल गुणवत्ता की जांच किस प्रकार हो रही है, शहर की कुल पेयजल मांग क्या है और उसके मुकाबले कितनी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में शहर में 2,13,653 वाटर हाउस कनेक्शन हैं और लगभग 1,848 किलोमीटर लंबा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क कार्यरत है। इसके साथ ही विभिन्न प्रगतिमान परियोजनाओं की स्थिति भी प्रस्तुत की गई। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से आगरा वाटर सप्लाई री-ऑर्गनाइजेशन स्कीम और ट्रांस यमुना जोन परियोजना की प्रगति की समीक्षा की।

समीक्षा में सामने आया कि ट्रांस यमुना जोन की परियोजना 1 अगस्त 2025 को शुरू हुई थी और इसे 31 अगस्त 2027 तक पूरा किया जाना है। इस परियोजना के तहत प्रस्तावित 11 ओवरहेड टैंकों में से अब तक केवल 15 प्रतिशत कार्य ही पूरा हुआ है, जबकि 4 सीडब्ल्यूआर (Clear Water Reservoir) में मात्र 5 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। कुल मिलाकर परियोजना की प्रगति 22.5 प्रतिशत पाई गई, जिस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कार्यों में तेजी लाकर निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने सभी प्रगतिमान परियोजनाओं में आ रही भूमि या अन्य बाधाओं को चिन्हित करने और उन्हें तत्काल अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे को अवगत कराकर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परियोजना में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में भविष्य की कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें जनसंख्या के अनुसार पेयजल मांग का आकलन, कॉन्सेपचुअल ले-आउट प्लान, सोर्स डेवलपमेंट और पाइपलाइन विस्तार जैसी योजनाओं की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने इन सभी बिंदुओं पर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

पेयजल आपूर्ति को लेकर जिलाधिकारी ने जलकल विभाग को सख्त निर्देश दिए कि जल की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए और भीषण गर्मी को देखते हुए शहर में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पेयजल आपूर्ति से संबंधित किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने ऐसे क्षेत्रों और कॉलोनियों को चिन्हित करने के निर्देश दिए जहां पेयजल आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो रही है। साथ ही इन क्षेत्रों में पानी के टैंकरों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने और पहले से कार्ययोजना तैयार कर सभी तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए।

सीवरेज व्यवस्था की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि शहर में कुल 1,96,935 सीवर हाउस कनेक्शन हैं, 12 पंपिंग स्टेशन और 12 एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित हैं। इसके अलावा 38 नालों की टैपिंग का कार्य प्रगति पर है। जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन सभी एसटीपी परियोजनाओं में तेजी लाने और उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने यमुना नदी में गिरने वाले बल्केश्वर नाला, भैरो नाला और मंटोला नाला सहित सभी प्रमुख नालों की टैपिंग के लिए प्रभावी कार्रवाई करने को कहा, ताकि नदी प्रदूषण को रोका जा सके और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित हो।

बैठक में अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे जुहैर बेग, अधिशासी अभियंता एहतशामुद्दीन, महाप्रबंधक जलकल और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि पेयजल और सीवरेज से जुड़ी परियोजनाओं में समन्वय के साथ कार्य करते हुए समयबद्ध तरीके से लक्ष्य पूरे किए जाएं, ताकि शहरवासियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

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