बरसाना। बुधवार को बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली का आयोजन हुआ। इस अवसर पर नंदगांव से हुरियारे बरसाना पहुंचे और बरसाना की महिलाएं प्रेमपगी लाठियों के प्रहार के साथ होली खेली। इस रंगीन उत्सव को देखने के लिए देश और विदेश से श्रद्धालु बरसाना पहुंचे।

होली के दौरान हुरियारे खुद को ढाल से बचाते नजर आए, जबकि हुरियारिनों ने ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक ब्रज गीतों के साथ लाठियों की बौछार की। रंगीली गलियों में करीब 20 क्विंटल गुलाल उड़ाया गया और हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई, जिससे पूरे माहौल में उल्लास और उत्साह का रंग भर गया।

बरसाना की गलियां श्रद्धालुओं से भरी रहीं। हर ओर अबीर-गुलाल और ढोल-नगाड़ों की थाप सुनाई दी। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की धुन पर झूमते और होली के गीत गाते नजर आए। नंदगांव से आए हुरियारे भगवान कृष्ण और बलराम के रूप में श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। प्रिया कुंड पर उन्हें मिठाई, भांग और ठंडाई से सत्कार किया गया। इसके बाद हुरियारे पगड़ी बांधकर रंगीली गलियों में राधा रानी से होली खेलने की अनुमति लेकर परंपरा निभाते हुए आगे बढ़े।

हुरियारों और हुरियारिनों के बीच रंगीली गलियों में नृत्य और हंसी-ठिठोली का अद्भुत संगम देखने को मिला। नन्हे हुरियारे भी शामिल हुए और उन्होंने ढाल का सहारा लेकर लाठियों से बचाव किया। पुरुषों की ढाले हल्की लकड़ी और चमड़े की बनी हुई थीं, वहीं महिलाएं पूरे उत्साह के साथ लाठियां बरसाती रहीं।
इस परंपरा की खासियत यह है कि यह 5000 साल पुरानी मानी जाती है। माना जाता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण और उनके सखाओं ने राधा और उनकी सखियों को लट्ठमार होली खेलकर चिढ़ाया था। बरसाना की यह होली बसंत पंचमी से शुरू होकर लगभग 45 दिनों तक चलती है।
इस रंगीन उत्सव को देखने के लिए देश-विदेश से करीब 20 लाख श्रद्धालु बरसाना पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 4500 पुलिसकर्मी, PAC और एंटी रोमियो टीम तैनात रही। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई। प्रशासन ने पीने के पानी, शौचालय और अन्य व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा।
श्रद्धालु इस परंपरा को देखकर भाव-विभोर हो गए। उन्होंने बताया कि लाठियों की मार प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, किसी प्रकार की चोट पहुंचाने के लिए नहीं। कुछ श्रद्धालु तो बरसाना में पहली बार लट्ठमार होली देखने पहुंचे और उन्होंने इसे जीवनभर यादगार बताया।
बरसाना में होली का यह आयोजन न केवल स्थानीय लोगों बल्कि देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को भी रोमांचित कर गया। रंग-बिरंगे गुलाल, ढोल-नगाड़ों की थाप, पुष्प वर्षा और हुरियारों व हुरियारिनों के बीच नृत्य ने इस परंपरा को और भी जीवंत बना दिया।
इस प्रकार, बरसाना में लट्ठमार होली का आयोजन ब्रज की सांस्कृतिक विरासत और प्रेम-रस की अमिट छवि को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है।
