पीपीपी मॉडल पर विकसित किए जाने हैं चार बस अड्डे, फाउंड्रीनगर को मिली शासन से अनुमति
आईएसबीटी के लिए 193 करोड़ और ईदगाह के लिए 52 करोड़ रुपये की योजना
आगरा। शहर के चार प्रमुख बस अड्डों को हाईटेक रूप देने की योजना में तीन बस अड्डों का काम अलग-अलग कारणों से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। आईएसबीटी और ईदगाह बस अड्डे के विकास में निर्माण की जद में आ रहे 194 पेड़ों को हटाने की अनुमति नहीं मिल सकी है। अनुमति की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से दोनों परियोजनाओं में आगे का काम प्रभावित है। वहीं बिजलीघर बस अड्डे के विकास को लेकर निर्माणदायी संस्था से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद शासन स्तर पर अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है। इस वजह से यहां भी काम रुका हुआ है। दूसरी ओर फाउंड्रीनगर में नए बस अड्डे के निर्माण को शासन से अनुमति मिल चुकी है।
चारों बस अड्डों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ बस संचालन को व्यवस्थित करना और शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करना है। सबसे बड़ी परियोजनाओं में आईएसबीटी का विकास शामिल है। इसे एयरपोर्ट की तर्ज पर आधुनिक और बहुमंजिला परिसर के रूप में तैयार किया जाना है।
आईएसबीटी को 30744 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 193 करोड़ रुपये की लागत से विकसित करने की योजना है। इसके लिए गाजियाबाद की मिडसन कंपनी को पीपीपी मॉडल पर निर्माण का टेंडर आवंटित हो चुका है। प्रस्ताव के मुताबिक परिसर में बेसमेंट, बस संचालन के लिए अलग व्यवस्था और तीन से पांच मंजिल तक यात्री सुविधाओं वाली इमारत विकसित की जानी है। यात्रियों को टिकट, प्रतीक्षालय, खानपान, वाणिज्यिक सुविधाओं और अन्य जरूरी सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की योजना है।
194 पेड़ों की अनुमति का इंतजार
आईएसबीटी और ईदगाह बस अड्डे के विकास में फिलहाल पेड़ों की अनुमति सबसे बड़ी अड़चन बनी हुई है। दोनों स्थानों पर निर्माण की जद में आने वाले कुल 194 पेड़ों को हटाने की अनुमति अभी नहीं मिली है। पेड़ों को हटाए बिना प्रस्तावित निर्माण को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। यही वजह है कि परियोजना की अगली प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल के अनुसार ईदगाह बस अड्डे से संबंधित रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा चुकी है। आईएसबीटी के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जाएगा। अनुमति मिलने के बाद ही पेड़ों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी और निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा सकेगा।
आगरा फोर्ट बस अड्डे पर काम शुरू भी किया गया था, लेकिन पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्य रुक गया है। ऐसे में निर्माण की शुरुआत के बावजूद परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। आईएसबीटी के मामले में भी पेड़ों की अनुमति मिलने के बाद ही निर्माण की गति बढ़ने की स्थिति बनेगी।
पिछले साल हुआ था विस्तृत सर्वे
आईएसबीटी, ईदगाह और बिजलीघर बस अड्डों को विकसित करने के लिए पिछले वर्ष विस्तृत सर्वे कराया गया था। जिला प्रशासन, रोडवेज और निजी कंपनी के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से बस अड्डों की जमीन की स्थिति, कब्जे, न्यायालय से जुड़े मामलों, मौजूदा संरचनाओं और यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का आकलन किया था। सर्वे के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी गई थी।
सर्वे का उद्देश्य निर्माण शुरू करने से पहले जमीन और कानूनी स्थिति समेत उन सभी बिंदुओं की जांच करना था, जिनका परियोजना पर असर पड़ सकता है। इसके बावजूद आईएसबीटी और ईदगाह में पेड़ों की अनुमति का मामला आगे की प्रक्रिया में बाधा बना हुआ है।
ईदगाह बस अड्डा 52 करोड़ में होगा हाईटेक
ईदगाह बस अड्डे को 8000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विकसित करने की योजना है। इसके लिए 52 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसे भी पीपीपी मॉडल पर आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाना है। बसों के संचालन और यात्रियों के आवागमन को व्यवस्थित करने के साथ परिसर में जरूरी यात्री सुविधाएं विकसित की जानी हैं।
फिलहाल यहां प्रस्तावित निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए पेड़ों की अनुमति जरूरी है। रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद अब अनुमति की प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई निर्भर है।
बिजलीघर में निर्माण संस्था को लेकर मामला अटका
बिजलीघर बस अड्डे की स्थिति आईएसबीटी और ईदगाह से अलग है। यहां पेड़ों की अनुमति नहीं बल्कि निर्माणदायी संस्था से जुड़े विवाद के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी है। निर्माण से जुड़ी संस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण शासन स्तर पर निर्णय लंबित है। जब तक इस मामले में निर्णय नहीं होता, बिजलीघर बस अड्डे के विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं है।
इस बस अड्डे को भी आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करने की योजना प्रस्तावित है। लेकिन फिलहाल निर्माण से संबंधित विवाद के कारण परियोजना यथावत पड़ी है। रोडवेज स्तर से शासन के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
आईएसबीटी के लिए मिले 25 करोड़
आगरा फोर्ट बस अड्डे को 4046 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 25 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाना प्रस्तावित है। यहां निर्माण कार्य शुरू होने के बाद पेड़ों की अनुमति का मामला सामने आया। अनुमति नहीं मिलने के कारण काम रुक गया। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अब अनुमति मिलने का इंतजार है।
आगरा फोर्ट बस अड्डे का विकास होने से शहर के पुराने हिस्से में बस संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने की उम्मीद है। हालांकि निर्माण कार्य कब दोबारा गति पकड़ेगा, यह पेड़ों की अनुमति मिलने के बाद ही स्पष्ट होगा।
फाउंड्रीनगर को शासन की अनुमति
चारों बस अड्डों में फाउंड्रीनगर परियोजना को फिलहाल शासन से अनुमति मिल चुकी है। नए बस अड्डे के लिए शासन ने 150 करोड़ रुपये की धनराशि निर्धारित की है। इसके तैयार होने से यमुना पार और एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र के यात्रियों को अलीगढ़ रूट की बसों के लिए आईएसबीटी या रामबाग चौराहे तक नहीं जाना पड़ेगा।
फाउंड्रीनगर में बस अड्डा विकसित होने से इस क्षेत्र से आने वाले यात्रियों के लिए बस सेवा तक पहुंच आसान होगी। साथ ही अलीगढ़ दिशा में जाने वाली बसों के संचालन को अलग स्थान मिलने से आईएसबीटी और शहर के अन्य हिस्सों पर बसों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
चारों बस अड्डों को हाईटेक बनाने की योजना तैयार होने के बावजूद परियोजनाओं की प्रगति एक समान नहीं है। आईएसबीटी में 193 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना का टेंडर आवंटित होने के बाद भी पेड़ों की अनुमति लंबित है। ईदगाह के लिए तैयार रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है और वहां भी 194 पेड़ों से जुड़े मामले में अनुमति की प्रक्रिया जरूरी है। आगरा फोर्ट में निर्माण शुरू होने के बाद पेड़ों की अनुमति न मिलने से काम रुक गया है। बिजलीघर में निर्माणदायी संस्था से जुड़े विवाद पर शासन का निर्णय लंबित है। फाउंड्रीनगर को अनुमति मिलने के बाद वहां आगे की प्रक्रिया शुरू होने की स्थिति बनी है।

