स्कूल ऑन व्हील्स पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगा शुरू
नगर निगम को बनाया गया नोडल, तैनात किए जाएंगे बेसिक शिक्षा विभाग के दो शिक्षक
आगरा। चौराहों पर भीख मांगने, कचरा बीनने और फुटपाथों पर रहने वाले बच्चों को अब पढ़ाई से जोड़ने की तैयारी है। गुजरात मॉडल पर आगरा में स्कूल ऑन व्हील्स योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की जाएगी। बस को चलती-फिरती पाठशाला बनाया जाएगा, जिसमें डिजिटल बोर्ड समेत बच्चों की पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। खेल और गतिविधियों के जरिए बच्चों को पढ़ाया जाएगा, ताकि वे एक ही जगह बैठकर ऊबें नहीं और उनकी पढ़ाई में दिलचस्पी बनी रहे।
एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार ने बताया कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए गुजरात की तर्ज पर स्कूल ऑन व्हील्स की व्यवस्था की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य उन बच्चों तक पढ़ाई पहुंचाना है, जो आर्थिक तंगी, परिवार के विस्थापन या दूसरी परिस्थितियों के कारण नियमित स्कूल नहीं जा पाते हैं। योजना के तहत बच्चों को शुरुआती शिक्षा देने के साथ आगे नियमित स्कूलों में दाखिला दिलाने की दिशा में काम किया जाएगा।

डिजिटल बोर्ड और खेल के जरिए पढ़ाई
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, बस के भीतर बच्चों के अनुकूल शैक्षिक माहौल तैयार किया जाएगा। पढ़ाने के लिए डिजिटल बोर्ड की व्यवस्था भी होगी। बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय खेल और दूसरी गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना और उन्हें नियमित रूप से कक्षा तक लाना है।https://todaynewstrack.com/2026/10/agra-school-on-wheels-education-for-children-begging-at-traffic-junctions/
योजना में बेसिक शिक्षा विभाग के दो शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। नगर निगम को इसका नोडल विभाग बनाया गया है। बस कहां खड़ी होगी, किन क्षेत्रों में जाएगी, कितने बच्चों को इससे जोड़ा जाएगा और कक्षाएं किस समय चलेंगी, इन बिंदुओं को लेकर विस्तृत व्यवस्था सामने आना बाकी है। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने की तैयारी है।
अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार संभालेंगे जिम्मेदारी
नगर निगम के अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार योजना से जुड़ी तैयारियों को देख रहे हैं। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सदस्य आगरा आए थे। उनके साथ नगर निगम के अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसके बाद बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्था को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
योजना का मकसद बच्चों को केवल चौराहों से हटाना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा से जोड़कर आगे का रास्ता तैयार करना है। इसके लिए बच्चों की पहचान, उनकी नियमित उपस्थिति और परिवारों से संपर्क भी अहम होगा। शुरुआती पढ़ाई के बाद उम्र और शैक्षिक स्तर के अनुसार उन्हें नियमित स्कूलों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था करनी होगी।
सड़क पर रहने वाले बच्चों का मुद्दा पहले भी उठा
आगरा में सड़क पर रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट में इन री: चिल्ड्रन इन स्ट्रीट सिचुएशन्स मामले में ऐसे बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़े पहलुओं पर विचार हुआ था। इससे संबंधित एक पुराने आकलन में फतेहपुर सीकरी में बच्चों की पहचान करने, जागरूकता अभियान चलाने और उनके परिवारों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने जैसे उपाय सुझाए गए थे।http://agra-school-on-wheels-education-for-street-children
केंद्र सरकार की स्माइल (SMILE) योजना में भी भीख मांगने की स्थिति में पाए जाने वाले बच्चों की पहचान, बचाव, शिक्षा और पुनर्वास का प्रावधान है। लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, 30 जून 2026 तक देशभर में इस योजना के तहत 2,824 बच्चों की पहचान कर उनका बचाव और पुनर्वास किया गया था। इनमें 1,549 बच्चों को परिवारों से मिलाया गया और 676 को स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया। ये आंकड़े पूरे देश के हैं, आगरा के नहीं।
खर्च और संचालन का ब्योरा आना बाकी
आगरा में प्रस्तावित स्कूल ऑन व्हील्स योजना पर कितना खर्च होगा, बस की व्यवस्था कैसे की जाएगी और इसके संचालन के लिए कितना बजट रखा गया है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। शहर में बच्चों को भीख मांगने और कचरा बीनने की स्थिति से निकालकर शिक्षा से जोड़ने के लिए इस पहल का असर उसके नियमित संचालन पर निर्भर करेगा। यदि बच्चों की पहचान, पढ़ाई में नियमित भागीदारी, परिवारों से संपर्क और स्कूलों में दाखिले की व्यवस्था साथ-साथ चलती है, तभी यह चलती-फिरती पाठशाला उनके पुनर्वास की दिशा में उपयोगी साबित हो सकेगी।
