आगरा। सड़क हादसों में कमी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नए परिवहन वाहनों की बिक्री, पंजीकरण और फिटनेस को लेकर अहम निर्देश दिए हैं। नियम 118 के दायरे में आने वाले परिवहन वाहन में स्पीड लिमिटिंग डिवाइस या वाहन में मौजूद स्पीड लिमिटिंग फंक्शन के बिना उसे बेचा और पंजीकृत नहीं किया जा सकेगा। फिटनेस जांच के दौरान भी गति नियंत्रक की जांच करनी होगी। वाहन ट्रैकिंग उपकरण और आपातकालीन बटन के नियमों पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से समयबद्ध अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड को जल्द पूरी तरह सक्रिय करने और सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन के वाहन ट्रैकिंग, स्पीड गवर्नर और सड़क सुरक्षा से जुड़े सुझावों पर विचार करने को कहा गया है।

नई परिवहन गाड़ी खरीदने वाले लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने 15 सितंबर 2026 को रिट याचिका सिविल संख्या 295 वर्ष 2012 में आदेश दिया। मामला देशभर में सड़क सुरक्षा कानूनों और पहले दिए गए न्यायालय के आदेशों के पालन से संबंधित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियम 118 के दायरे में आने वाले परिवहन वाहनों में निर्धारित अधिकतम गति को सीमित करने वाली व्यवस्था होना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे परिवहन वाहन स्पीड लिमिटिंग डिवाइस या वाहन के भीतर मौजूद स्पीड लिमिटिंग फंक्शन के बिना न बेचे जाएं। यदि कोई निर्माता या विक्रेता इस व्यवस्था के बिना वाहन बेचता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। स्पीड लिमिटिंग डिवाइस ऐसा उपकरण है जो वाहन को निर्धारित अधिकतम गति से आगे जाने से रोकता है, जबकि स्पीड लिमिटिंग फंक्शन इंजन या ईंधन व्यवस्था में मौजूद ऐसी सुविधा है जो वाहन की अधिकतम गति को सीमित करती है।
अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे अपने आरटीओ अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी करें। नियम के दायरे में आने वाले वाहन का पंजीकरण स्पीड गवर्नर या निर्धारित गति नियंत्रक व्यवस्था लगे होने की पुष्टि के बाद ही किया जाए। केंद्र और राज्यों को यह भी बताना होगा कि नए पंजीकृत वाहनों में गति नियंत्रक व्यवस्था लगी है या नहीं और नियम तोड़ने वाले निर्माताओं या विक्रेताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई या जुर्माना किया गया।
पुराने परिवहन वाहनों में भी नियम का पालन किस तरह कराया जाएगा, इस संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शपथपत्र दाखिल करना होगा। अदालत ने फिटनेस जांच के दौरान स्वचालित जांच केंद्रों पर भी गति नियंत्रक की जांच करने को कहा है। वाहन की डिलीवरी के समय इसका सत्यापन किस व्यावहारिक व्यवस्था से किया जाएगा, यह संबंधित अधिकारियों को सुनिश्चित करना होगा।
इसी मामले में वाहन ट्रैकिंग उपकरणों को लेकर भी अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से रिपोर्ट मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को वाहन निर्माताओं के साथ हुई बातचीत की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। यह बातचीत सार्वजनिक सेवा वाहनों में निर्माण के समय ही वाहन ट्रैकिंग उपकरण लगाए जाने के संबंध में हुई थी।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वाहन ट्रैकिंग और आपातकालीन बटन से जुड़े नियम 125एच तथा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के 19 दिसंबर 2025 के पत्र के संबंध में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। मुख्य सचिवों को समयबद्ध और प्रभावी कदम उठाने हैं। अगली सुनवाई से पहले लिए गए निर्णय और की गई कार्रवाई की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी।
सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने इन विषयों से जुड़े आवेदन और सुझाव स्वयं तैयार कर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए थे। 15 सितंबर की सुनवाई में वह आवेदक के रूप में स्वयं अदालत के सामने उपस्थित हुए। उनके आवेदन में वाहन ट्रैकिंग, गति नियंत्रक और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड से जुड़े कई सुझाव रखे गए। अदालत के आदेश में भी इन सुझावों का उल्लेख किया गया है।
जैन ने अदालत के सामने कहा कि केवल नियम बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सामने आना चाहिए कि उनका वास्तविक पालन कितना हो रहा है। कितने वाहनों में ट्रैकिंग उपकरण लगाए गए हैं, कितने उपकरण काम कर रहे हैं और नियमों का पालन न करने वाले निर्माताओं, विक्रेताओं या अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी आम लोगों के सामने होनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि पात्र वाहनों, उनमें लगे वाहन ट्रैकिंग उपकरणों और गति नियंत्रकों का जिला और राज्यवार विवरण वाहन पोर्टल से लेकर हर महीने सार्वजनिक किया जाए। इससे यह पता चल सकेगा कि किस जिले और राज्य में नियमों का पालन हो रहा है और कहां कमी बनी हुई है। उन्होंने जिला सड़क सुरक्षा समितियों से इस जानकारी की हर महीने समीक्षा कराने और अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड को भेजने का सुझाव भी दिया।
जैन ने प्रत्येक वाहन ट्रैकिंग उपकरण का पहचान नंबर वाहन पोर्टल पर दर्ज करने, उसे संबंधित राज्य के निगरानी केंद्र से जोड़ने और आपातकालीन संदेश संबंधित सर्वरों तक पहुंचाने की व्यवस्था का सुझाव दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को इन सुझावों पर विचार कर उचित जवाब या रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड को लेकर भी अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार ने 29 जून 2026 को बोर्ड का गठन किया था और इसकी पहली बैठक 21 जुलाई को हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बोर्ड को जल्द से जल्द पूरी तरह कामकाजी बनाया जाए। अगली सुनवाई तक केंद्र को यह बताना होगा कि बोर्ड पूरी तरह सक्रिय हुआ या नहीं।
केसी जैन ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड की अलग वेबसाइट बनाने का सुझाव दिया है। इसमें बोर्ड का डाक पता, ईमेल और फोन नंबर उपलब्ध कराने के साथ उसके फैसले, सलाह और गतिविधियों को सार्वजनिक करने की बात कही गई है। उन्होंने नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं से शिकायत और सुझाव लेने के लिए अलग ईमेल, ऑनलाइन स्थिति बताने वाला डैशबोर्ड और ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा का भी सुझाव दिया। अदालत ने बोर्ड से इन सुझावों पर जल्द विचार करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में उत्तर प्रदेश से जुड़े गंभीर मोटर वाहन मामलों का भी उल्लेख है। अदालत ने राज्य के वर्ष 2023 के कानून के कारण समाप्त माने गए मामलों पर और जानकारी मांगी है। अदालत ने कहा कि समझौते से समाप्त न होने वाले अपराधों, अनिवार्य जेल वाले मामलों और बार-बार अपराध करने वालों के खिलाफ मुकदमा न चलाने का कोई उचित कारण नहीं है। राज्य को यह स्पष्ट करने की अपेक्षा की गई है कि ऐसे गंभीर मामले कभी समाप्त नहीं हुए थे।
दिल्ली हाई कोर्ट और राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के पास मथुरा रोड पार करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी केंद्र और दिल्ली सरकार को छह सप्ताह के भीतर कदम उठाने हैं। दोनों सरकारों को विशेषज्ञ नियुक्त करने होंगे, जो सुरक्षित पैदल पारपथ, सिग्नल, गति कम करने और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी सहित जरूरी उपाय सुझाएंगे। इसके बाद अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी।
इसी सड़क सुरक्षा मामले में केसी जैन के तीन अन्य अंतरिम आवेदन 23 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर के आदेश में कहा है कि 23 सितंबर को केवल इन्हीं चार आवेदनों पर सुनवाई होगी। वाहन ट्रैकिंग, गति नियंत्रक और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड सहित 15 सितंबर के आदेश में तय अन्य विषयों पर अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी। संबंधित सरकारों और प्राधिकरणों को उससे पहले अपनी रिपोर्ट और शपथपत्र दाखिल करने होंगे।

केसी जैन ने कहा कि सड़क सुरक्षा के नियम तभी लोगों की जान बचाने में प्रभावी होंगे, जब उनका पालन सड़क पर दिखाई दे। स्पीड गवर्नर और ट्रैकिंग उपकरण केवल प्रमाणपत्रों तक सीमित न रहें, बल्कि वाहन में लगे हों और ठीक से काम करें। उन्होंने कहा कि जिला और राज्यवार आंकड़े हर महीने सार्वजनिक होने से नियमों के पालन की स्थिति सामने आएगी और कमियों की पहचान की जा सकेगी। उन्होंने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड को नागरिकों की शिकायत और सुझाव आसानी से पहुंचाने वाला मंच बनाने की आवश्यकता भी बताई।
