आगरा। आगरा में जनसुनवाई के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल ने खंदौली ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय उजरई और उच्च प्राथमिक विद्यालय उजरई (कंपोजिट) का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने छात्राओं से पढ़ाई, भोजन, दैनिक दिनचर्या, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी लेने के साथ कक्षा में बच्चों को पढ़ाया और सवाल हल कराए। निरीक्षण के दौरान डिजिटल शिक्षा, स्वच्छता, खेलकूद, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और एचपीवी वैक्सीनेशन को लेकर भी जरूरी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया गया। जिले के सभी 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में सीएसआर फंड से बुनियादी सुविधाओं, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, मरम्मत, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा और खेल सामग्री को बेहतर बनाने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल सीधे खंदौली ब्लॉक के उजरई पहुंचे। यहां उन्होंने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का औचक निरीक्षण किया और छात्राओं के बीच बैठकर उनकी पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा की सुविधाओं तक की जानकारी ली। अधिकारियों के साथ औपचारिक निरीक्षण करने के बजाय जिलाधिकारी ने बच्चों से सीधे बातचीत कर यह जानने का प्रयास किया कि विद्यालय में उन्हें किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं और पढ़ाई का माहौल कैसा है।
कक्षा में पहुंचते ही जिलाधिकारी ने छात्राओं से पढ़ाई के बारे में सवाल किए। उन्होंने पूछा कि उन्हें किताबें मिल गई हैं या नहीं, कितनी ड्रेस मिली हैं, भोजन में क्या-क्या मिलता है और खाने की गुणवत्ता कैसी रहती है। छात्राओं से उनकी दैनिक दिनचर्या के बारे में भी जानकारी ली गई। उन्होंने यह भी पूछा कि सुबह सभी बच्चे नियमित रूप से स्नान करते हैं या नहीं, गीजर काम कर रहा है या नहीं और कपड़ों की धुलाई की व्यवस्था किस तरह होती है। इस दौरान छात्राओं ने सहज होकर जिलाधिकारी के सवालों के जवाब दिए।

विद्यालय में उपलब्ध शैक्षिक संसाधनों को लेकर भी उन्होंने बच्चों से जानकारी ली। कक्षा में लगी टीवी चलती है या नहीं, डिजिटल माध्यम से पढ़ाई होती है या नहीं और अंग्रेजी तथा गणित के शिक्षक किस तरह पढ़ा रहे हैं, इस बारे में उन्होंने छात्राओं से बातचीत की। जिलाधिकारी को अपने बीच देखकर शुरुआत में उत्साहित नजर आ रही छात्राएं कुछ ही देर में सहज हो गईं और उन्होंने बिना झिझक अपने अनुभव साझा किए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्वयं बच्चों को पढ़ाया। उन्होंने किताब लेकर छात्राओं को कोशिका से संबंधित ज्ञान समझाया और अंग्रेजी के मीनिंग पूछकर उनके ज्ञान का आकलन किया। उन्होंने सवाल-जवाब के जरिए बच्चों की समझ को परखा। छात्राओं का शिक्षा स्तर उन्हें उचित मिला। कक्षा में जिलाधिकारी के इस संवाद का उद्देश्य केवल बच्चों की जानकारी लेना नहीं था, बल्कि पढ़ाई के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ाना भी रहा।

मनीष बंसल ने छात्राओं को जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को बड़े सपने देखने चाहिए और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने छात्राओं से कठिन परिश्रम के साथ आगे बढ़ने और सफलता हासिल करने का आह्वान किया। उनके इस संवाद से विद्यालय की छात्राओं में उत्साह दिखाई दिया।
इसके बाद जिलाधिकारी उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय पहुंचे, जहां कक्षा नौ और दस की छात्राएं अध्ययनरत थीं। उन्होंने वहां कक्षाओं का निरीक्षण करने के साथ विद्यालय में उपलब्ध अन्य शैक्षिक और बुनियादी संसाधनों की स्थिति भी देखी। भौतिक विज्ञान और जीव विज्ञान की प्रयोगशालाओं का निरीक्षण करते हुए उन्होंने प्रायोगिक शिक्षा की स्थिति जानी। लाइब्रेरी में उपलब्ध संसाधनों को देखा और छात्राओं के लिए अध्ययन की सुविधाओं का जायजा लिया।

विद्यालय की रसोई और छात्रावास का भी निरीक्षण किया गया। इसके अलावा खेलकूद के उपकरण, शौचालय, पेयजल व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी जिलाधिकारी ने देखा। उन्होंने पूरे परिसर में स्वच्छता का स्तर बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। विद्यालय में रहने वाली छात्राओं के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण को जरूरी बताते हुए संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखने के लिए कहा गया।
भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए जिलाधिकारी ने स्वयं खाना खाकर उसकी गुणवत्ता देखी। उन्होंने भोजन तैयार करने और बच्चों तक पहुंचने की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी ली। छात्राओं से भोजन को लेकर उनकी राय जानी गई, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें नियमित रूप से निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन मिल रहा है या नहीं।

जिलाधिकारी ने छात्राओं के लिए पढ़ाई के साथ प्रायोगिक ज्ञान को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विद्यालयों में बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर देने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही प्रतिदिन खेलकूद की गतिविधियां कराने के निर्देश दिए, ताकि छात्राओं के शारीरिक विकास के साथ उनमें टीम भावना और आत्मविश्वास भी विकसित हो।
उच्चीकृत कस्तूरबा विद्यालय के निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ा विषय भी सामने आया। जिलाधिकारी ने छात्राओं से एचपीवी वैक्सीन के बारे में बातचीत की और उन्हें इसके संबंध में जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने अभिभावकों को भी एचपीवी वैक्सीनेशन के बारे में बताएं और वैक्सीनेशन कराने के लिए जागरूक करें। इस तरह विद्यालय निरीक्षण में शिक्षा के साथ स्वास्थ्य जागरूकता को भी स्थान दिया गया।

कस्तूरबा विद्यालयों के बाद जिलाधिकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय उजरई (कंपोजिट) पहुंचे। यहां उन्होंने बच्चों से सीधे संवाद करते हुए विद्यालय में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से पूछा कि उन्हें ड्रेस, जूते-मोजे और पाठ्य पुस्तकें मिली हैं या नहीं। मिड डे मील में मिलने वाले भोजन के बारे में भी बच्चों से जानकारी ली। इस दौरान बच्चों से उनके अनुभव सीधे जानने का प्रयास किया गया।
कक्षा में बच्चों की शैक्षिक समझ देखने के लिए जिलाधिकारी ने उन्हें सवाल दिए और ब्लैक बोर्ड पर उन्हें हल करने के लिए कहा। बच्चों द्वारा सवाल हल करने की प्रक्रिया के माध्यम से उन्होंने उनके पढ़ाई के स्तर को समझने का प्रयास किया। इस दौरान शिक्षकों की भूमिका और कक्षा में पढ़ाई के वातावरण का भी जायजा लिया गया।
विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जिले के सभी 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन विद्यालयों में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी सीएसआर फंड के माध्यम से आवश्यक कार्य कराए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय की जरूरत के अनुसार बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
सीएसआर फंड के माध्यम से बच्चों के लिए कुर्सी-मेज, डिजिटल शिक्षा और पोषण कार्यक्रमों को बेहतर करने की दिशा में काम किया जाएगा। विद्यालय भवन में जहां कहीं टूट-फूट है, वहां मरम्मत कराने के साथ रंगाई-पुताई के कार्य भी कराए जाएंगे। शौचालय और वॉशरूम की आवश्यक मरम्मत, स्कूल की चारदीवारी और पेयजल सुविधा को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम होगा।
इसके अलावा स्मार्ट क्लासरूम विकसित करने और उच्चीकृत कंप्यूटर लैब की व्यवस्था करने की योजना बनाई जाएगी। जिन विद्यालयों में शौचालय की मरम्मत की जरूरत है, वहां काम कराया जाएगा। खिड़कियों और जालियों की मरम्मत, हाथ धोने की सुविधा तथा खेलकूद के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने को भी कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इन कार्यों के लिए जल्द कार्ययोजना और एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड का उपयोग जरूरत के अनुसार और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए। फंड से कराए जाने वाले कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी नामित करने और सभी कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।
मनीष बंसल ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक और आधुनिक शिक्षा का है। ऐसे में बालिकाओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ना जरूरी है, ताकि उनके शैक्षिक स्तर में गुणात्मक सुधार लाया जा सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक संसाधनों के साथ पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होना भी जरूरी है। आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को सुरक्षित वातावरण और बेहतर पठन-पाठन की सुविधा मिलनी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर में चल रहे बाउंड्रीवाल के निर्माण कार्य को भी जिलाधिकारी ने देखा। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय का भी निरीक्षण किया गया। इस दौरान शिक्षा विभाग से जुड़े कार्यों और विद्यालयों की व्यवस्थाओं की स्थिति को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली गई।
पूरे निरीक्षण में जिलाधिकारी का जोर बच्चों से सीधे संवाद के माध्यम से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति जानने पर रहा। उन्होंने भोजन, कपड़े, किताबें, डिजिटल संसाधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, सुरक्षा और खेलकूद जैसे अलग-अलग पहलुओं के बारे में बच्चों से जानकारी ली। कक्षा में पढ़ाकर और ब्लैक बोर्ड पर सवाल हल कराकर बच्चों की शैक्षिक स्थिति को भी समझा।
निरीक्षण के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी सुमित कुमार, डीसी बालिका कुलदीप तिवारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों की मौजूदगी में जिलाधिकारी ने विद्यालयों की शैक्षिक, आवासीय, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं का निरीक्षण किया तथा आगे किए जाने वाले कार्यों के लिए आवश्यक दिशा तय की।
