वृंदावन में यमुना में नाव डूबी, 10 पर्यटकों की मौत लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी, तेज हवा और पीपा पुल से टकराने के बाद हुआ हादसा
पंजाब से आए 30 से अधिक श्रद्धालु नाव में थे सवार, 3 से 5 लापता, सेना-NDRF का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
वृंदावन (मथुरा)। वृंदावन के केसी घाट पर यमुना नदी में बड़ा दर्दनाक हादसा हो गया, जहां लगभग 30 से अधिक पर्यटकों से भरी प्राइवेट नाव पलट गई। इस हादसे में 10 पर्यटकों की डूबने से मौत हो गई, जिनमें 7 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं। मृतकों में पति-पत्नी और पिता-बेटी जैसे रिश्तेदार भी शामिल हैं।

सभी पर्यटक पंजाब से आए थे और बांके बिहारी क्लब के सदस्य बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सेना, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की संयुक्त टीमें बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गईं, जो देर रात तक जारी रहा।

जानकारी के अनुसार यह हादसा शुक्रवार को दोपहर करीब 3 बजे केसी घाट पर हुआ, जो श्री बांके बिहारी मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। जिला प्रशासन ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया और सेना को भी मौके पर बुलाया गया। गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम भी वृंदावन पहुंची और सर्च ऑपरेशन में शामिल हुई।

डीआईजी शैलेश पांडेय ने बताया कि कुल पर्यटक दो नावों में सवार थे, जिनमें एक नाव में करीब 25 से 27 लोग थे और वही नाव हादसे का शिकार हो गई। कुल मिलाकर करीब 33 लोग नावों में सवार थे। अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि 3 से 5 लोग अभी भी लापता हैं। उनकी तलाश के लिए लगातार सर्च ऑपरेशन जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि कुछ लोग पानी में फंसे हैं या बाहर निकल चुके हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस नाव में हादसा हुआ उसकी क्षमता केवल 15 लोगों की थी, लेकिन उसमें 25 से अधिक लोगों को बैठाया गया था। इसके अलावा किसी भी पर्यटक ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी, जिससे डूबने का खतरा और बढ़ गया। नाव का संचालन पप्पू निषाद कर रहा था, जिसे पुलिस ने करीब 6 घंटे बाद हिरासत में ले लिया। हादसे के बाद वह मौके से फरार हो गया था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नाव यमुना के लगभग 30 फीट गहरे पानी में थी, तभी अचानक तेज हवा लगभग 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने लगी। हवा के झोंके से नाव असंतुलित हो गई और नियंत्रण खो बैठी। नाव पहले पीपा पुल से टकराने से बची, लेकिन तीसरी टक्कर में संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और नाव पलट गई।
हादसे के समय कई पर्यटक नाविक से नाव रोकने की अपील कर रहे थे, लेकिन उसने ध्यान नहीं दिया। बताया गया कि कुछ लोग नाव की छत पर भी मौजूद थे, जिससे संतुलन और बिगड़ गया। अचानक हुए हादसे से चीख-पुकार मच गई और लोग पानी में गिरने लगे।
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय गोताखोर, पुलिस, पीएसी, एनडीआरएफ और सेना की टीमों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। लगभग 40 से 50 गोताखोर यमुना में लगातार लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ा, लाइट की व्यवस्था कर सर्च ऑपरेशन को और तेज किया गया।
सेना की इंजीनियरिंग कोर की टीम भी मौके पर पहुंची, जिसमें एक अधिकारी, चार जेसीओ और लगभग 20 जवान शामिल हैं। सभी टीमें मिलकर रातभर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और बताया कि सभी एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं। मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
हादसे के बाद घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे शुरुआती रेस्क्यू कार्य में बाधा भी आई। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे राहत कार्य में बाधा न डालें और टीमों को काम करने दें।
इस दर्दनाक हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।
लापता लोगों की सूची में मानिक टंडन (जलालाबाद), पंकज मल्होत्रा (अबोरा), निशभ शर्मा (जगराओं), यश (लुधियाना) और एक अज्ञात युवती शामिल हैं। इन सभी की तलाश लगातार जारी है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि यमुना विहार के नाम पर अक्सर सुरक्षा नियमों की अनदेखी होती है। नावों में क्षमता से अधिक लोग बैठाए जाते हैं और लाइफ जैकेट का उपयोग नहीं कराया जाता, जिससे ऐसे हादसे हो जाते हैं।
फिलहाल सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और गोताखोरों की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक रेस्क्यू अभियान जारी रहेगा।

