आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान संस्थान में आयोजित ‘होममेड हेल्दी उत्पाद’ प्रदर्शनी ने स्वाद, स्वास्थ्य और स्वरोजगार का प्रेरणादायी संदेश दिया। आहार एवं पोषण विभाग की छात्राओं ने लगभग 45 से 50 पौष्टिक, पारंपरिक और नवाचारपूर्ण उत्पाद तैयार कर न केवल अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया, बल्कि पोषण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत पहल प्रस्तुत की।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान संस्थान में शुक्रवार को ‘होममेड हेल्दी उत्पाद’ विषय पर आयोजित खाद्य प्रदर्शनी ने स्वाद, परंपरा और स्वास्थ्य का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। आहार एवं पोषण विभाग द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी ने यह सिद्ध कर दिया कि घरेलू स्तर पर तैयार किए गए उत्पाद न केवल स्वास्थ्यवर्धक हो सकते हैं, बल्कि स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार भी बन सकते हैं।

यह आयोजन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के निर्देशन में तथा गृह विज्ञान संस्थान की संचालिका डॉ. दीप्ति सिंह के मार्गदर्शन और प्रयोगशाला सहायक सुनीता तिवारी के विशेष सहयोग से छात्राओं द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।

विभाग की डीन प्रो. अर्चना सिंह ने कहा कि इस प्रदर्शनी में छात्राओं की रचनात्मकता, नवाचार और पोषण संबंधी गहरी समझ स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने बताया कि छात्राओं ने विभिन्न प्रकार के पौष्टिक और उपयोगी खाद्य उत्पाद तैयार कर यह साबित किया है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक सोच के समन्वय से बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

प्रदर्शनी में पौष्टिक प्रीमिक्स पाउडर, स्वादिष्ट कचौड़ी, हेल्दी उपमा जैसे उत्पादों के साथ-साथ पारंपरिक पेय पदार्थों ने विशेष आकर्षण का केंद्र बनाया। ठंडाई पाउडर, लेमन स्क्वैश, आंवला स्क्वैश और आम पन्ना जैसे पेय पदार्थों ने आगंतुकों का ध्यान अपनी ओर खींचा और गर्मी के मौसम में स्वास्थ्यवर्धक विकल्प के रूप में सराहना प्राप्त की।
अचारों की विविधता भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण रही। प्याज, मिक्स, नींबू और मिर्च के अचारों ने घरेलू स्वाद और पारंपरिक भारतीय खानपान की याद ताजा कर दी। इन उत्पादों ने यह संदेश दिया कि घर में उपलब्ध साधारण सामग्री से भी स्वाद और स्वास्थ्य दोनों को संतुलित किया जा सकता है। प्रदर्शनी में शामिल छात्राओं ने प्रत्येक उत्पाद के पोषण मूल्य, निर्माण प्रक्रिया और स्वास्थ्य लाभों की विस्तार से जानकारी दी, जिससे दर्शकों को केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी प्राप्त हुई।
संचालिका डॉ. दीप्ति सिंह ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल खाद्य उत्पादों का प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि छात्राओं को व्यावहारिक ज्ञान, उद्यमिता की समझ और पोषण संरक्षण की उपयोगिता से जोड़ना भी था। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में निर्जलीकृत यानी डिहाइड्रेटेड उत्पादों को विशेष रूप से शामिल किया गया।
इनमें पुदीना, करी पत्ता, मेथी पत्तियां, मूंग बड़ी और मैसूर बड़ी जैसे उत्पाद प्रमुख रहे। इन उत्पादों ने यह स्पष्ट किया कि सीमित संसाधनों में भी पोषण को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और खाद्य संरक्षण के माध्यम से घरेलू स्तर पर बेहतर विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।
इसके साथ ही आधुनिक स्वाद को ध्यान में रखते हुए शेजवान चटनी और ग्रीन चिली सॉस जैसे फ्यूजन उत्पाद भी प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने युवाओं और आगंतुकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। इन उत्पादों ने यह संदेश दिया कि परंपरा और आधुनिकता का संतुलन बनाकर नए बाजार और स्वरोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। वहीं आंवला कैंडी और च्यवनप्राश जैसे पारंपरिक उत्पादों ने भारतीय आयुर्वेदिक ज्ञान और स्वास्थ्य परंपरा को नई पीढ़ी के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इन उत्पादों ने यह दर्शाया कि पारंपरिक भारतीय खानपान और घरेलू औषधीय ज्ञान आज भी उतना ही उपयोगी और प्रासंगिक है।
लगभग 45 से 50 उत्पादों की इस भव्य प्रदर्शनी में एमएससी (आहार एवं पोषण) तथा एमएससी (सामान्य) की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। छात्राओं ने स्वयं उत्पाद तैयार किए और उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक, पोषणात्मक और व्यावसायिक पहलुओं को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। दर्शकों ने छात्राओं के आत्मविश्वास, प्रस्तुतीकरण और नवाचार की सराहना की। प्रदर्शनी ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहारिक प्रयोगों के माध्यम से समाज और परिवार दोनों को बेहतर दिशा दी जा सकती है।
कार्यक्रम में डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. संगमित्रा गौतम, डॉ. प्रीति यादव, डॉ. कविता सिंह, डॉ. मोनिका अस्थाना, डॉ. रत्ना पांडेय, डॉ. आभा सिंह, डॉ. नीरज, डॉ. तपस्या, डॉ. नेहा सक्सेना, डॉ. अनुपमा और डॉ. प्रिया यादव की उपस्थिति ने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। सभी शिक्षकों ने छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल शिक्षा को जीवंत बनाती हैं, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी देती हैं।
यह प्रदर्शनी केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं रही, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल बनकर सामने आई। छात्राओं ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि ज्ञान, कौशल और रचनात्मकता का सही समन्वय हो, तो घरेलू स्तर पर भी ऐसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं जो न केवल स्वास्थ्यवर्धक हों, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाले भी हों। विश्वविद्यालय की यह पहल आने वाले समय में युवाओं, विशेष रूप से छात्राओं, को स्वरोजगार और स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में प्रेरित करने का महत्वपूर्ण माध्यम साबित होगी।

