आगरा। जिलाधिकारी ने शनिवार को एमजी रोड स्थित एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी तथा परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का विस्तृत और भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने लेडी लॉयल अस्पताल विस्तारीकरण फेज-1, मेडिकल कॉलेज ब्लॉक तथा यूजी/पीजी हॉस्टल के निर्माणाधीन भवनों की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्धता की गहन समीक्षा की।
निरीक्षण की शुरुआत इमरजेंसी वार्ड से हुई, जहां उन्होंने सर्जरी, अस्थि रोग, बाल रोग, पैथोलॉजी, क्रिटिकल वार्ड, ब्लड लैब, सीटी स्कैन, ओटी सहित विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया। उन्होंने एक्सरे और सीटी स्कैन मशीनों के संचालन, मरीजों की दैनिक संख्या तथा उनसे लिए जा रहे शुल्क की जानकारी ली। इमरजेंसी में व्यवस्थाओं को उन्होंने संतोषजनक पाया।

इसके बाद उन्होंने लेडी लॉयल अस्पताल विस्तारीकरण फेज-1 और मेडिकल ब्लॉक के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। साइट प्लान और लेआउट देखने के बाद उन्होंने कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि कार्य मई 2025 में शुरू हुआ था और इसे मई 2027 तक पूरा किया जाना है, लेकिन वर्तमान में लगभग 35 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण हो सका है।
इस धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई और प्रोजेक्ट मैनेजर को मौके पर तलब कर कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने निर्माण में देरी के कारणों पर सवाल उठाए, जिस पर बताया गया कि बरसात, एनजीटी द्वारा कैंपस में 280 पेड़ों को हटाने में आई बाधा और होली के बाद श्रमिकों की कमी प्रमुख कारण रहे। अधिकारियों ने यह भी बताया कि स्वीकृत 800 श्रमिकों के स्थान पर केवल 350 श्रमिक कार्यरत हैं। इस पर जिलाधिकारी ने 15 दिन की समय सीमा तय करते हुए श्रमिकों की संख्या बढ़ाने और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

इसके बाद मेडिकल ब्लॉक के निर्माण का निरीक्षण किया गया, जहां केवल एक ब्लॉक तैयार मिला और कुल कार्य प्रगति लगभग 21 प्रतिशत पाई गई। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि “आज से दिन काउंट कर लीजिए, मैं दोबारा निरीक्षण करूंगा, 15 दिन में प्रगति परिलक्षित नहीं हुई तो शासन में आपके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हेतु पत्र भेज दिया जाएगा।

इसके पश्चात उन्होंने यूजी/पीजी हॉस्टल का निरीक्षण किया, जहां उन्हें निर्माण गुणवत्ता में गंभीर खामियां मिलीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पिलर और बीम के डिजाइन, शटरिंग की लाइन और लेवल की जांच के बिना कंक्रीट डालने, सरफेस की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप न होने जैसी कमियों पर गहरी नाराजगी जताई। यह भी बताया गया कि यह 07 मंजिला भवन है, जिसमें अब तक केवल 50 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण हुआ है, जबकि इसे जून 2026 तक पूरा होना था।

निर्माण में देरी पर अधिकारियों ने मेट्रो प्रोजेक्ट के कारण जमीन प्राप्त होने में 06 माह की देरी को भी कारण बताया। साथ ही यह जानकारी दी गई कि आईआईटी कानपुर की जांच रिपोर्ट अभी लंबित है।
जिलाधिकारी ने स्वयं 06 मंजिल तक पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और गुणवत्ता की जांच की। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि एक जिलास्तरीय समिति गठित कर निर्माण कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जाए और हर माह प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अधोमानक कार्यों की जिम्मेदारी तय की जाए और श्रमिकों की संख्या तत्काल बढ़ाकर कार्य में तेजी लाई जाए।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण एवं वायु प्रदूषण रोकथाम के उपायों की कमी पर भी नाराजगी जताई। साथ ही निर्माण सामग्री के उचित प्रबंधन और ट्रांसपोर्टेशन प्लान के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
अंत में उन्होंने सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक का भी निरीक्षण किया और वहां दी जा रही चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने रेडियोलॉजी, डायलिसिस, न्यूरोलॉजी, हेपेटाइटिस और ओटी सहित विभिन्न विभागों का जायजा लिया तथा मरीजों एवं तीमारदारों से संवाद कर सुविधाओं की स्थिति जानी। बताया गया कि यहां लगभग 40 प्रतिशत मरीज आसपास के जिलों से उपचार हेतु आते हैं।
निरीक्षण में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य तथा निर्माणदाई संस्थाओं के अभियंता मौजूद रहे।

