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Agra Cyber Crime News:आगरा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 3 साइबर गिरोहों के 32 ठग गिरफ्तार, दुबई तक जुड़े तार, लोगों को विज्ञापन में फंसाकर बनाते थे शिकार

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आगरा। साइबर अपराध के खिलाफ रविवार को आगरा पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन अलग-अलग मामलों में सक्रिय तीन संगठित साइबर गिरोहों के 32 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन गिरोहों के तार दुबई तक जुड़े पाए गए हैं और ये बीते पांच वर्षों में देशभर के लोगों से 300 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी कर चुके थे। कार्रवाई में 100 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल रहे। आरोपियों के खिलाफ पूरे देश में 500 से ज्यादा शिकायतें दर्ज थीं।

Agra police with arrested cyber criminals involved in ₹300 crore fraud with Dubai links

साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर सख्ती दिखाते हुए आगरा पुलिस ने एक बड़ी और सुनियोजित कार्रवाई को अंजाम दिया है। एडीसीपी सिटी आदित्य कुमार के निर्देशन में पुलिस ने तीन अलग-अलग साइबर गिरोहों का खुलासा कर कुल 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई साइबर क्राइम के इतिहास में आगरा पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।


एडीसीपी सिटी आदित्य कुमार ने बताया कि एनसीआरपी पोर्टल पर साइबर फ्रॉड और बैंक खातों के दुरुपयोग से जुड़ी लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों की तकनीकी और फील्ड स्तर पर जांच कराई गई। इसी दौरान एक शिकायतकर्ता ने बताया कि 15 जून 2025 को वह एटीएम से रुपये निकालने गया था, जहां एक अज्ञात व्यक्ति ने उससे नगद 3600 रुपये लेकर ऑनलाइन भुगतान करने को कहा। कुछ दिन बाद उसका बैंक खाता होल्ड हो गया। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि उसके खाते में साइबर फ्रॉड की रकम आई थी।


इस मामले की जांच आगे बढ़ाने पर किरावली निवासी ऋषि नामक व्यक्ति सामने आया, जिसके लिंक बैंक खातों पर 54 शिकायतें दर्ज पाई गईं। गोपनीय जांच में पता चला कि नितिन भगौर नाम का व्यक्ति एक संगठित साइबर गैंग चला रहा था। 13 दिसंबर को ताजगंज क्षेत्र से तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं।


पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे डिजिटल अरेस्ट, व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से फर्जी यूपीआई लिंक भेजकर ठगी, गूगल विज्ञापनों के जरिए लोगों को फंसाने और क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करते थे। आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में फर्जी आधार कार्ड भी बरामद हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि गैंग का सरगना नितिन दुबई में बैठकर “मेडलर सर्विसेज ग्रुप” नाम की बोगस कंपनी के खातों में भारत से साइबर ठगी की रकम मंगवाता था। इस गैंग के नौ सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।


इसी क्रम में थाना शाहगंज पुलिस ने लोन के नाम पर ठगी करने वाले एक अन्य गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सोशल मीडिया पर लोन एप का प्रचार कर लोगों को झांसे में लेता था। लोन के लिए मोबाइल नंबर डालने पर एप डाउनलोड कराकर ओटीपी हासिल किया जाता और फिर एप के वॉलेट में मौजूद राशि निकाल ली जाती थी। यह गिरोह राजस्थान से ऑपरेट हो रहा था।


इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों द्वारा फर्जी आधार कार्ड बनवाने के लिए जनसेवा केंद्रों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस मामले में सिकंदरा क्षेत्र के पनवारी निवासी जनसेवा केंद्र संचालक पवन को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कई अन्य जनसेवा केंद्र संचालक पुलिस की रडार पर हैं और जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।


पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। उनके नेटवर्क, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के आधार पर साइबर ठगी के कई अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है।

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