नई दिल्ली। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष महामहिम सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के संपन्न होने की संयुक्त घोषणा की। यह ऐतिहासिक घोषणा यूरोपीय नेताओं की भारत यात्रा के अवसर पर की गई और इसे भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
भारत, जो दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और यूरोपीय संघ, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा रखता है, के बीच यह समझौता एक विश्वसनीय, संतुलित और भविष्य उन्मुख साझेदारी को दर्शाता है। 2022 में वार्ता पुनः आरंभ होने के बाद गहन बातचीत के उपरांत यह समझौता संभव हुआ है।
व्यापार और निर्यात को बड़ी बढ़त
यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच वस्तु व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपये (136.54 अरब अमेरिकी डॉलर) रहा, जिसमें 6.4 लाख करोड़ रुपये (75.85 अरब अमेरिकी डॉलर) का निर्यात और 5.1 लाख करोड़ रुपये (60.68 अरब अमेरिकी डॉलर) का आयात शामिल है। 2024 में सेवा व्यापार 7.2 लाख करोड़ रुपये (83.10 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया।
इस एफटीए के तहत भारत को अपने 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर यूरोपीय संघ में तरजीही बाजार पहुंच मिलेगी। इससे लगभग 6.41 लाख करोड़ रुपये (75 अरब अमेरिकी डॉलर) के निर्यात में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेगा। लगभग 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर लगने वाला 10 प्रतिशत तक का शुल्क समझौते के लागू होते ही शून्य हो जाएगा।
‘मेक इन इंडिया’ और ऑटो क्षेत्र को प्रोत्साहन
कोटा आधारित और सावधानीपूर्वक तैयार ऑटो उदारीकरण पैकेज यूरोपीय संघ के निर्माताओं को भारत में उच्च मूल्य श्रेणी के मॉडल पेश करने की अनुमति देगा, वहीं भारत में निर्मित ऑटोमोबाइल को यूरोपीय संघ के बाजार में प्रवेश का अवसर मिलेगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ को गति मिलेगी और भारतीय उपभोक्ताओं को बेहतर तकनीक का लाभ मिलेगा।
कृषि, एमएसएमई और रोजगार पर सकारात्मक असर
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्रों को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। चाय, कॉफी, मसाले, ताजे फल-सब्जियां और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। हालांकि भारत ने डेयरी, अनाज, मुर्गी पालन, सोयामील और कुछ संवेदनशील कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच न देने का निर्णय लेकर घरेलू हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।
यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), महिलाओं, कारीगरों और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करेगा और रोजगार को बढ़ावा देगा।
सेवा क्षेत्र और पेशेवरों को नई राह
एफटीए के तहत सेवाओं में महत्वाकांक्षी बाजार पहुंच सुनिश्चित की गई है। आईटी, आईटीईएस, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन और निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारतीय सेवा प्रदाताओं को यूरोपीय संघ के 144 उपक्षेत्रों तक पहुंच मिलेगी। वहीं भारत ने 102 उपक्षेत्रों में यूरोपीय संघ को अवसर दिए हैं।
व्यावसायिक आवागमन के लिए एक पूर्वानुमानित ढांचा तैयार किया गया है, जिससे कुशल और अर्ध-कुशल भारतीय पेशेवरों को अल्पकालिक और अस्थायी कार्य अवसर मिलेंगे। अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरण (आईसीटी), संविदात्मक सेवा आपूर्तिकर्ताओं (सीएसएस) और स्वतंत्र पेशेवरों (आईपी) के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सामाजिक सुरक्षा समझौतों पर पांच वर्ष की अवधि में सहयोग का ढांचा भी तैयार किया गया है।
सीबीएएम और तकनीकी सहयोग
सीबीएएम प्रावधानों के तहत तकनीकी सहयोग, कार्बन कीमतों की मान्यता और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने के लिए वित्तीय समर्थन सुनिश्चित किया गया है। साथ ही बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा, डिजिटल व्यापार और उभरती तकनीकों—जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर—में सहयोग को भी बल मिलेगा।
रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए इसे भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी में बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता पारंपरिक व्यापार समझौते से आगे बढ़कर एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी है।
यूरोपीय संघ भारत का 22वां मुक्त व्यापार समझौता भागीदार बन गया है। 2014 के बाद से भारत मॉरीशस, यूएई, यूके, ईएफटीए, ओमान और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते कर चुका है तथा न्यूजीलैंड के साथ भी समझौते की घोषणा की गई है। 2025 में ओमान और यूके के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए और न्यूजीलैंड के साथ समझौते को अंतिम रूप देने की घोषणा हुई।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप समावेशी, लचीले और भविष्य के लिए तैयार विकास की मजबूत नींव रखता है। यह समझौता भारत और 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग के नए युग की शुरुआत करता है।
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