जुर्माना भरकर या अतिरिक्त टोल देकर ओवरलोड ट्रक आगे नहीं जा सकेगा; वजन कम कराने के बाद ही मिलेगी अनुमति
नई दिल्ली। ओवरलोड ट्रकों से होने वाले सड़क हादसों और सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम दिशा-निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सीमा से अधिक माल लेकर चल रहे वाहन को केवल जुर्माना भरने या अतिरिक्त टोल शुल्क देने के बाद आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अतिरिक्त माल को उतारकर वाहन का दोबारा वजन कराया जाना जरूरी होगा और निर्धारित सीमा के भीतर आने के बाद ही उसे आगे जाने दिया जाएगा। अदालत के समक्ष यह मामला अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन की ओर से दायर इंटरवेंशन एप्लीकेशन (आईए) 233571/2025 के माध्यम से उठाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ओवरलोडिंग को सड़क सुरक्षा से सीधे जुड़ा खतरा बताते हुए अतिरिक्त माल हटाने, दोबारा वजन और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी सहित कई उपायों पर आदेश दिया गया है।
केसी जैन ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि ओवरलोड वाहन केवल यातायात नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि इससे वाहन की ब्रेकिंग दूरी बढ़ती है, ब्रेक फेल होने, टायर फटने और वाहन पलटने का खतरा बढ़ता है। अधिक वजन से वाहन पर नियंत्रण और स्टीयरिंग क्षमता भी प्रभावित होती है। अतिरिक्त एक्सल लोड से सड़क की सतह को भी अनुपात से कहीं अधिक नुकसान पहुंच सकता है।
मामले में मांग की गई थी कि किसी भी ओवरलोड वाहन की पहचान होने के बाद उसे उसी स्थान पर रोका जाए। टोल प्लाजा, चेक पोस्ट या किसी अन्य जांच स्थल से उसे तब तक आगे न जाने दिया जाए, जब तक अतिरिक्त माल उतार नहीं दिया जाता। इसके बाद वाहन का दोबारा वजन कराया जाए और निर्धारित सीमा में आने पर ही उसे आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए।
अदालत के समक्ष यह भी कहा गया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की ओर से तैयार मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया में ओवरलोड वाहन की पहचान, वजन, वाहन रोकना, अतिरिक्त माल उतारना और दोबारा वजन करना शामिल है। केरल हाईकोर्ट के एक आदेश में भी इस एसओपी को शामिल किया जा चुका है।
पांच साल में 1.40 लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं
खबर में दिए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2023 के बीच ओवरलोड वाहनों से जुड़ी 1,40,945 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 60,082 लोगों की मौत हुई, जबकि 1,44,143 लोग घायल हुए। इनमें 61,411 गंभीर घायल और 82,732 अन्य घायल शामिल हैं।
| वर्ष | दुर्घटनाएं | मौत | गंभीर घायल | अन्य घायल |
|---|---|---|---|---|
| 2019 | 35,578 | 14,320 | 14,758 | 22,134 |
| 2020 | 24,504 | 10,416 | 10,008 | 15,056 |
| 2021 | 25,020 | 11,011 | 11,065 | 14,453 |
| 2022 | 28,033 | 12,181 | 12,367 | 16,374 |
| 2023 | 27,810 | 12,154 | 13,213 | 14,715 |
| कुल | 1,40,945 | 60,082 | 61,411 | 82,732 |
अदालत में यह भी बताया गया कि केवल तीन वर्षों में 27 टोल प्लाजा से जुटाई गई आरटीआई जानकारी में 28,80,115 ओवरलोड वाहनों का पता चला, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसा कोई मामला नहीं मिला जिसमें अतिरिक्त वजन वास्तव में उतरवाकर वाहन को निर्धारित सीमा में लाने के बाद आगे भेजा गया हो। यह स्थिति ओवरलोडिंग पर केवल जुर्माना वसूलने के बजाय वास्तविक वजन कम कराने की जरूरत को सामने रखती है।
अतिरिक्त टोल या जुर्माना वजन उतारने का विकल्प नहीं
मामले में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 113, 114 और 194 तथा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों का हवाला दिया गया। तर्क यह था कि अतिरिक्त शुल्क या जुर्माना जमा कराना उस कानूनी जिम्मेदारी का विकल्प नहीं हो सकता, जिसके तहत ओवरलोड वाहन से अतिरिक्त माल हटाना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा वर्ष 2005 के परमजीत भसीन मामले में तय किए गए सिद्धांत से भी जुड़ा था। करीब 21 वर्ष बाद ओवरलोडिंग के मामले में इस व्यवस्था को फिर से अदालत के सामने विस्तार से रखा गया।
अदालत के निर्देशों में ओवरलोड वाहनों की निगरानी के लिए इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। वजन करने वाली मशीनों और वीइ-इन-मोशन सिस्टम को टोल प्रबंधन तथा इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन व्यवस्था से जोड़ने की बात कही गई है, ताकि वाहन दूसरे राज्य में जाने पर भी कार्रवाई से बच न सके।
इसके साथ ही ओवरलोड वाहनों को रोकने के लिए जरूरत पड़ने पर राज्य पुलिस की सहायता उपलब्ध कराने और प्रवर्तन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की व्यवस्था करने को कहा गया है। राज्यों और संबंधित एजेंसियों से ओवरलोड वाहनों की संख्या, चालान, वास्तव में उतारे गए अतिरिक्त माल, खराब वजन मशीनों और नियमों के विपरीत आगे जाने दिए गए वाहनों का रिकॉर्ड रखने तथा नियमित रिपोर्टिंग की व्यवस्था पर भी निर्देश दिए गए हैं।
ओवरलोडिंग से बढ़ता है हादसे का खतरा
अधिक वजन से भरे ट्रक के लिए समय पर ब्रेक लगाना मुश्किल होता है। इससे ब्रेक फेल होने, टायर फटने, वाहन पलटने और चालक के नियंत्रण खोने की आशंका बढ़ जाती है। भारी वजन सड़क की सतह और सड़क संरचना पर भी अतिरिक्त दबाव डालता है। यही वजह है कि ओवरलोडिंग को केवल राजस्व या जुर्माने से जुड़ा विषय मानने के बजाय सड़क सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत मामले में यही आधार रखा गया कि ओवरलोड वाहन को केवल जुर्माना लेकर आगे भेजने की व्यवस्था दुर्घटनाओं के मूल कारण को खत्म नहीं करती। अतिरिक्त माल उतारना, दोबारा वजन करना और निर्धारित सीमा के भीतर वाहन आने के बाद ही उसे आगे बढ़ने देना ही प्रवर्तन की मूल प्रक्रिया होनी चाहिए।
