आगरा। देशभर में शुरू हुए नशा मुक्त युवा, विकसित भारत अभियान की गूंज आगरा में भी सुनाई दी। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के जेपी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने और समाज को जागरूक करने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण हुआ, जबकि कुलपति प्रो. आशु रानी ने युवाओं से संयमित, जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

आगरा में रविवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद (खंदारी) परिसर स्थित जेपी सभागार में “नशा मुक्त युवा, विकसित भारत” संकल्प अभियान के अंतर्गत विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 100 सप्ताह के राष्ट्रव्यापी जनभागीदारी अभियान के तहत राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सहयोग से आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आशु रानी ने की।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण किया गया, जिसे विद्यार्थियों, शिक्षकों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने ध्यानपूर्वक सुना। अभियान का उद्देश्य युवाओं को मादक द्रव्यों के सेवन से दूर रखना, स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना और समाज में व्यापक जनजागरूकता पैदा करना है।

कार्यक्रम की शुरुआत में कुलपति प्रो. आशु रानी ने उपस्थित विद्यार्थियों को जीवनभर नशा न करने तथा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि युवा नशे से दूर रहकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ें, तो विकसित भारत का सपना तेजी से साकार हो सकता है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) जैसे संगठन युवाओं में सेवा, अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की एनएसएस इकाई ने सेवा कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश के विश्वविद्यालयों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है, जो स्वयंसेवकों की मेहनत, समर्पण और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

कुलपति ने विद्यार्थियों से संयमित और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जीवन में कई बार माता-पिता, शिक्षक या बड़े लोगों की बातें उस समय अच्छी नहीं लगतीं, लेकिन किसी भी परिस्थिति में अभद्र भाषा या अनुचित व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करता है और वह अपनी भावनाओं तथा इंद्रियों पर नियंत्रण खो देता है।
उन्होंने कहा कि नशे की स्थिति में व्यक्ति क्रोध और आवेश में ऐसे कदम उठा सकता है, जो उसे अपराध की ओर ले जाएं। इसलिए प्रत्येक युवा का दायित्व है कि वह स्वयं नशे से दूर रहे और अपने मित्रों, परिवार तथा समाज को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करे। उन्होंने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया, जनसंपर्क और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से नशा विरोधी संदेश फैलाने की अपील की।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी प्रभारी प्रो. संजय चौधरी ने कहा कि नशा केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति को प्रभावित करने वाली गंभीर चुनौती है। युवाओं को सही दिशा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पूनम तिवारी ने बताया कि विश्वविद्यालय में आगे भी नशा मुक्ति से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम, रैलियां, शपथ अभियान, पोस्टर प्रतियोगिताएं और जनसंवाद आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक यह संदेश पहुंच सके।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तरुण कांत पाठक, डॉ. गरिमा अग्रवाल, डॉ. के.के. पचौरी, डॉ. मोनिका अस्थाना और डॉ. रत्ना पांडेय ने भी विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, मानसिक रूप से मजबूत बनने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनना है।
इस अवसर पर एनएसएस स्वयंसेवक संगीता त्यागी, शिवम, राम, तुषार और कादिर सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से नशा मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया।
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने युवाओं के बीच यह संदेश मजबूत किया कि नशे से दूरी ही स्वस्थ जीवन, सुरक्षित समाज और विकसित भारत की मजबूत नींव है। आयोजकों ने विश्वास जताया कि युवा वर्ग इस अभियान को जनआंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगा।
